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PFC का बॉन्ड इश्यू तीसरी बार टला, ऊंची यील्ड ने बिगाड़ा समीकरण; नहीं मिले मनचाहे दाम

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पिछले 2 महीनों में यह तीसरा मौका है, जब पीएफसी ने बॉन्ड जारी करने की योजना को वापस लिया है

Last Updated- December 23, 2025 | 10:45 PM IST
Indian Bonds Market
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सरकारी स्वामित्व वाली पावर फाइनैंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) ने मंगलवार को 6,000 करोड़ रुपये के अपने निर्धारित बॉन्ड जारी करने की योजना रद्द कर दी है। सूत्रों का कहना है कि नीलामी में निवेशकों की ओर से ऐसे यील्ड पर बोलियां आईं, जिसे स्वीकार करने के लिए जारीकर्ता तैयार नहीं थे। पिछले 2 महीनों में यह तीसरा मौका है, जब पीएफसी ने बॉन्ड जारी करने की योजना को वापस लिया है। इसके पहले बढ़े कॉरपोरेट बॉन्ड यील्ड के कारण पीएफसी ने 25 नवंबर को 3,000 करोड़ रुपये के 3 साल के बॉन्ड इशुएंस और 10 दिसंबर को 3,500 करोड़ रुपये के 15 साल के बॉन्ड इश्युएंस को वापस लेने का फैसला किया था।

बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि उम्मीद के मुताबिक बोली  नरम नहीं हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हाल में नीतिगत दर में 25 आधार अंक की कटौती का असर नहीं पड़ा है और अभी कम अवधि के हिसाब से दबाव बना हुआ है।

सूत्र ने कहा कि पीएफसी को वह स्तर नहीं मिला, जिसे उसको उम्मीद थी क्योंकि वह अपने 2 साल के पेपर के लिए 6.90 प्रतिशत के नीचे  कटऑफ की उम्मीद कर रहा था।

इस बीच बैंक ऑफ इंडिया ने 7.23 प्रतिशत ब्याज दर पर 10 साल के इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड  के माध्यम से 10,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं। बीओआई को पीएफसी  से बेहतर दरें मिलीं, क्योंकि  उसने 10 साल का पेपर जारी किया। वहीं पीएफसी ने कम अवधि के पेपर जारी किए, जिसमें निवेशकों ने अपना हित नहीं समझा।  उपरोक्त उल्लिखित सूत्र ने कहा, ‘कट-ऑफ मोटे तौर पर उम्मीदों के अनुरूप था। चूंकि यह 10 साल का पेपर था, इसलिए ईपीएफओ और बीमा कंपनियों जैसे निवेशकों ने भाग लिया, जो लंबी अवधि के निवेश साधनों को पसंद करते हैं।’

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First Published - December 23, 2025 | 10:45 PM IST

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