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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पर फैसला लेने का हक सिर्फ ERO को

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शीर्ष न्यायालय ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को राज्य द्वारा प्रतिनियुक्त उपयुक्त समूह ‘बी’ अधिकारियों को सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की जगह नियुक्त करने की भी इजाजत दी है

Last Updated- February 09, 2026 | 10:07 PM IST
special intensive revision (sir)
फोटो क्रेडिट: PTI

उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान तैनात सूक्ष्म पर्यवेक्षकों (माइक्रो-ऑब्जर्वर) को कोई निर्णय देने का अधिकार नहीं होगा। न्यायालय ने सोमवार को स्पष्ट किया कि केवल चुनावी पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को दावों और आपत्तियों पर अंतिम आदेश पारित करने का अधिकार है। शीर्ष न्यायालय ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को राज्य द्वारा प्रतिनियुक्त उपयुक्त समूह ‘बी’ अधिकारियों को सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की जगह नियुक्त करने की भी इजाजत दी है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायाधीश जॉयमाल्य बागची और न्यायाधीश एन वी अंजारिया के पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार को एसआईआर कर्तव्यों के लिए 8,550 समूह ‘बी’अधिकारियों को ईसीआई की सहायता में तैनात रखने का निर्देश दिया। ईसीआई को उनकी उपयुक्तता का आकलन करने,(जहां आवश्यक हो) मौजूदा सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को बदलने और संक्षिप्त प्रशिक्षण देने का अधिकार भी दिया गया है।

न्यायालय ने दस्तावेज की जांच और आपत्तियों के लिए निर्धारित तारीख 14 फरवरी से कम से कम एक सप्ताह के लिए और बढ़ा दी। पहले अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को प्रकाशित होनी थी। एसआईआर अधिकारियों के खिलाफ धमकी और हिंसा के आरोपों पर गंभीरता से ध्यान देते हुए पीठ ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक को ईसीआई के इस दावे पर जवाब देते हुए एक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई।

न्यायालय ने ध्यान दिलाया कि उसके 19 जनवरी के आदेश में विशेष रूप से राज्य पुलिस को पुनरीक्षण अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कहा गया था। प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए न्यायालय ने निर्देश दिया कि सभी समूह ‘बी’ अधिकारी अगले दिन शाम 5 बजे तक संबंधित जिला कलेक्टरों या ईआरओ को रिपोर्ट करें।

पीठ ने कहा कि सूक्ष्म पर्यवेक्षक एसआईआर में सहयोग देना जारी रख सकते हैं मगर वे ईआरओ के वैधानिक अधिकार को दरकिनार नहीं कर सकते।

पीठ ने यह भी कहा कि ईआरओ के लिए आपत्तियों की गुणवत्ता के आधार पर जांच करना अनिवार्य है, भले ही आपत्तिकर्ता व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित न हो पाएं। पीठ ने आयोग को ठीक से काम नहीं करने वाले अधिकारियों को बदलने की इजाजत भी दी।

सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को बताया कि समूह ‘बी’अधिकारियों की सूची उसके पहले के निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है और ये अधिकारी एसआईआर कार्यों का निर्वहन करने में सक्षम हैं। ईसीआई की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि कई अधिकारियों के पास अर्द्ध -न्यायिक आदेश पारित करने का अनुभव नहीं है जो एसआईआर ढांचे के तहत दावों और आपत्तियों पर निर्णय लेने के लिए जरूरी है।

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First Published - February 9, 2026 | 10:07 PM IST

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