facebookmetapixel
Advertisement
निर्यात के लिए इन्वेंट्री-आधारित ई-कॉमर्स में FDI को मंजूरी, एक्सपोर्ट बढ़ाने की नई पहलइंडिगो को पहली तिमाही में ₹237.6 करोड़ का घाटा, ईंधन खर्च 86% बढ़ने से बढ़ा दबावआशीष कुमार दास होंगे Infosys के नए CEO और MD, अगले साल 1 अप्रैल से संभालेंगे पद भारCrudeChem डील से बदलेगी Fineotex की तस्वीर? Choice ने BUY रेटिंग के साथ ₹51 दिया टारगेटइंफोसिस Q1 नतीजे: मुनाफा 12.2% बढ़कर ₹7,769 करोड़; राजस्व में 14% इजाफामाल ढुलाई पर रेलवे का बड़ा प्लान, 10 साल 40% हिस्सेदारी हासिल करने की तैयारीIPO के बाद अब SBI Funds लाएगा पहला टेक-फोकस्ड AIF, 20 करोड़ डॉलर के फंड की तैयारीWazirX की वापसी: 95% पुराने यूजर्स लौटे, फ्यूचर्स ट्रेडिंग में 300% उछाल52 वीक हाई पर पहुंचे बजाज ऑटो और टीवीएस के शेयर, हीरो-आयशर में भी तेजीCGHS Pensioner Card: रिटायरमेंट हुआ आसान! भविष्य पोर्टल से तुरंत बनेगा CGHS कार्ड

बॉन्ड प्राइवेट प्लेसमेंट में 23% की वृद्धि, 9.58 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए

Advertisement

इसके साथ ही बैंकिंग व्यवस्था में नकदी की भी कमी बनी रही, जिसके कारण उन्हें पूंजी जुटाने के वैकल्पिक साधन ढूंढ़ने पड़े।

Last Updated- January 15, 2024 | 10:32 PM IST
money

बॉन्ड प्राइवेट प्लेसमेंट के माध्यम से 2023 में 9.58 लाख करोड़ रुपये धन जुटाया गया,जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल की तुलना में इसमें 23 प्रतिशत वृद्धि हुई है। प्राइम डेटाबेस ग्रुप के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया का कहना है कि तेज आर्थिक वृद्धि के बीच कर्ज की मांग में तेजी के कारण ऐसा हुआ है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि इसके साथ ही बैंकिंग व्यवस्था में नकदी की भी कमी बनी रही, जिसके कारण उन्हें पूंजी जुटाने के वैकल्पिक साधन ढूंढ़ने पड़े। साल 2023 में सबसे ज्यादा धन अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों और बैंकों ने जुटाया, जिनके हिस्से 4.71 लाख करोड़ रुपये आए हैं। इसमें एक साल पहले के 3.66 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

निजी क्षेत्र (बैंक व एफआई को छोड़कर) ने 4.45 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं और 2022 के 3.18 लाख करोड़ रुपये की तुलना में इसमें 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

सरकारी इकाइयों ने इसमें अहम भूमिका निभाई और कुल राशि का 41 प्रतिशत जुटाया है। सरकारी इकाइयों द्वारा जुटाई गई राशि 2022 की तुलना में 38 प्रतिशत ज्यादा है। अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों और बैंकों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 89 प्रतिशत है, पीएसयू की हिस्सेदारी 9 प्रतिशत है।

Advertisement
First Published - January 15, 2024 | 10:32 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement