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बिहार माइक्रोफाइनैंस कानून का सीमित असर: RBI-नियंत्रित संस्थाओं को राहत, रजिस्ट्रेशन से छूट

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माइक्रोफाइनैंस उद्योग में सबसे बड़ा हिस्सा बिहार का है, जो करीब 15 फीसदी है। इसके बाद कर्नाटक और तमिलनाडु का स्थान आता है

Last Updated- February 27, 2026 | 9:39 PM IST
Banks

हाल ही में पारित बिहार माइक्रोफाइनैंस संस्थान विधेयक, 2026 का भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विनियमित लेनदारों पर कोई खास प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसी संस्थाओं को राज्य स्तर पर पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी। माइक्रोफाइनैंस संस्थानों के नेटवर्क (एमएफआईएन, जो सूक्ष्म वित्त ऋणदाताओं के लिए स्व-नियामक संगठन यानी एसआरओ है) ने कहा कि यह कानून आरबीआई द्वारा विनियमित संस्थाओं पर लागू नहीं होता है और लाइसेंस प्राप्त संस्थाओं को राज्य कानून के तहत पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी।

उद्योग निकाय ने एक बयान में कहा, …आरबीआई द्वारा विनियमित संस्थान पहले से ही वित्तीय क्षेत्र में सबसे सख्त लेनदार संरक्षण ढांचों में से एक के तहत काम करते हैं, जो आरबीआई के जिम्मेदार कारोबारी आचरण दिशानिर्देशों, एमएफआईएन की उद्योग आचार संहिता और एमएफआईएन सुरक्षा उपायों के हिसाब से हैं। ये चीजें मिलकर निष्पक्ष आचरण, ऋण देने की पारदर्शी प्रथाओं और जिम्मेदार, गैर-दबावपूर्ण वसूली तंत्र को अनिवार्य बनाते हैं।

माइक्रोफाइनैंस उद्योग में सबसे बड़ा हिस्सा बिहार का है, जो करीब 15 फीसदी है। इसके बाद कर्नाटक और तमिलनाडु का स्थान आता है। उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि राज्य में वसूली दक्षता मजबूत बनी हुई है।

विधेयक में कहा गया है कि इसके प्रावधान बिहार में सूक्ष्म या लघु ऋण देने वाली संस्थाओं की एक विस्तृत श्रृंखला पर लागू होंगे, चाहे उनका निगमन, पंजीकरण या डोमिसाइल कहीं भी हो। इनमें व्यक्ति, साझेदारी फर्म, सीमित देनदारी वाली साझेदारी वाली कंपनियां, समितियां, ट्रस्ट, डिजिटल ऋण मंच, मोबाइल ऐप्लिकेशन और राज्य की सीमा के भीतर कार्यरत अन्य संस्थाएं शामिल हैं। विधेयक पारित होने के बाद सूक्ष्म वित्त पर केंद्रित कई बैंकों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।

फ्यूजन फाइनैंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय गैरीअली ने कहा, धारा 2 को देखें तो कानून में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि परिचालन नियम विनियमित संस्थाओं पर लागू नहीं होते हैं। उन पर केवल जबरदस्ती वाली प्रथाओं पर रोक लागू होती है, जो पहले से ही लागू है। विनियमित संस्थाओं के लिए इसमें केवल इतना कहा गया है कि उन्हें जबरदस्ती वाली प्रथाओं पर अंकुश लगाना होगा, जो वे पहले से ही कर रहे हैं। इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

बिहार का यह कानून कर्नाटक और तमिलनाडु सरकारों द्वारा 2025 में जबरन वसूली वाली प्रथाओं और अत्यधिक ब्याज दरों पर अंकुश लगाने के लिए शुरू किए गए उपायों के समान माना जा रहा है। हालांकि आरबीआई द्वारा विनियमित संस्थाओं को पंजीकरण और कुछ परिचालन प्रावधानों से छूट दी गई है, फिर भी वे जबरन वसूली विधियों पर रोक और उधारकर्ता संरक्षण उपायों से संबंधित प्रावधानों के अधीन रहेंगी।

गैरीअली ने कहा, दरअसल चुनावों और बाढ़ जैसी अन्य चुनौतियों के बावजूद बिहार ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। यह हमारे लिए और पूरे माइक्रोफाइनैंस क्षेत्र के लिए सबसे अनुशासित बाजारों में से एक है। वसूली दक्षता के मामले में बिहार तीन अग्रणी राज्यों में शामिल है, जो पूरे खाते पर 99.5 फीसदी से अधिक है। न केवल हमारे लिए बल्कि राज्य के सभी प्रमुख कंपनियों के लिए पिछले तीन से चार महीनों में वसूली दक्षता बहुत मजबूत हुई है। चुनावों के बाद और यहां तक ​​कि चुनाव अवधि के दौरान भी बिहार एक बहुत ही अनुशासित राज्य के रूप में उभरा है।

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First Published - February 27, 2026 | 9:31 PM IST

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