प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट के बाद शुक्रवार की सुबह आयोजित एक वेबिनार को संबोधित करते हुए वित्तीय संस्थानों और विश्लेषकों से व्यावहारिक समाधान तैयार करने और बाजार के विश्वास को मजबूत करने में सहयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और अकादमिक जगत के बीच सहयोग को औपचारिक रूप देने के लिए एक ‘सुधार साझेदारी चार्टर’ तैयार करने का सुझाव दिया, जो 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने का हिस्सा होगा।
वर्ष 2026-27 के बजट के बाद पहला वेबिनार ‘विकसित भारत के लिए तकनीकी सुधार और वित्त’ विषय पर केंद्रित था और इसमें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार विदेशी निवेश ढांचे को और अधिक सरल बना रही है ताकि व्यवस्था को और अधिक अनुमानयोग्य तथा निवेशकों के अनुकूल बनाया जा सके। उन्होंने बॉन्ड बाजार को और अधिक सक्रिय बनाने तथा बॉन्ड की खरीद बिक्री को सरल बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों को रेखांकित किया।
मोदी ने अनुमान सुनिश्चित करने, नकदी का स्तर बढ़ाने, नए उपाय पेश करने और विदेशी पूंजी जुटाने से जुड़े जोखिमों का प्रबंधन करने के लिए सुझाव मांगे। उन्होंने कहा कि बॉन्ड बाजार सुधार दीर्घकालिक वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘अनुमान सुनिश्चित करने, नकदी बढ़ाने और नए उपाय पेश करने की जरूरत है ताकि जोखिम का प्रभावी प्रबंधन हो सके और विदेशी पूंजी की निरंतर आवक सुनिश्चित की जा सके।’
मोदी ने अंशधारकों, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों से कहा कि वे वैश्विक स्तर पर अपनाए जा रहे श्रेष्ठ व्यवहार से सीख लेकर बॉन्ड बाजार और विदेशी निवेश ढांचे को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि सरकार और अधिक सक्रिय बॉन्ड बाजार तैयार करने की कोशिश कर रही है, बॉन्ड बाजार कारोबार प्रक्रियाओं को सरल बना रही है और परियोजनाओं की मंजूरी के तौर तरीकों को मजबूत कर रही है। इसके लिए विभिन्न लागत लाभ विश्लेषण और जीवन चक्र लागत विश्लेषण की मदद ली जा रही है। मोदी ने कहा, ‘इन कदमों का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि व्यवस्था अधिक अनुमान लायक तथा निवेशकों के अनुकूल हो और साथ ही जोखिम का बेहतर प्रबंधन किया जा सके।’
प्रधानमंत्री ने उद्योग जगत से नया निवेश और नवाचार लाने को कहा। उन्होंने वित्तीय संस्थानों और विश्लेषकों से व्यावहारिक समाधान तैयार करने में सहायता करने और बाजार का भरोसा मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि उद्योग और वित्तीय संस्थानों के लिए नई ऊर्जा लाने का वक्त आ गया है क्योंकि देश को अधोसंरचना क्षेत्र उनकी अधिक भागीदारी, वित्तीय मॉडल में अधिक नवाचार और उभरते क्षेत्र मजबूत सहयोग की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि परियोजना मंजूरी प्रणाली और आकलन गुणवत्ता को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने जीवन चक्र लागत को सबसे ऊपर रखते हुए परियोजना का लागत-लाभ विश्लेषण करके बरबादी को रोकने की जरूरत पर बल दिया। निवेश और नवाचार को लेकर प्रधानमंत्री की यह अपील ऐसे समय पर आई है जबकि भारत यूरोपीय संघ, अमेरिका और इजरायल के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर रहा है या करने जा रहा है।
मोदी ने सरकार के बढ़े हुए पूंजीगत व्यय और एक के बाद एक बजट में एक अच्छा नीतिगत माहौल बनाने पर जोर देते हुए कहा कि अब निजी क्षेत्र के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धी वृद्धि को अगले चरण में ले जाने का समय आ गया है। भारत के छोटे और मझोले उपक्रमों के साथ नवाचार पर सहयोग, भारत यूरोपीय संघ व्यापार समझज्ञैते का एक अहम हिस्सा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक पूंजीगत व्यय 11 साल पहले के 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 के केंद्रीय बजट में 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा, ‘हमें अधोसंरचना में अधिक भागीदारी और वित्तीय मॉडल में नवाचार की आवश्यकता है। हमें परियोजना मंजूरी को मजबूत बनाना होगा और मूल्यांकन की गुणवत्ता सुधारनी होगी।’
मोदी ने कहा कि सुधारों का मूल्यांकन जमीन पर इसके असर के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हमें पारदर्शिता, गति और जवाबदेही को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन और डेटा एनालिटिक्स का बड़े पैमानो पर इस्तेमाल करना चाहिए।’ स्पीड और अकाउंटेबिलिटी को बेहतर बनाने के लिए एआई, ब्लॉकचेन, डेटा एनालिटिक्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करना चाहिए। मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय बजट कोई अल्पकालिक कारोबारी दस्तावेज नहीं है। यह एक नीतिगत खाका है इसलिए बजट के प्रभाव को ठोस और जरूरी मानकों पर आंका जाना चाहिए।