facebookmetapixel
Advertisement
डिजिटल पेमेंट नियमों में बदलाव,UPI पर MDR से 10,000 करोड़ रुपये तक सरकार को मिल सकता है बड़ा राजस्वNDA सांसदों की बैठक में खेल और रोजगार पर फोकस, युवाओं के लिए बढ़ते अवसरों का दिया गया ब्यौरा1991 के आर्थिक सुधारों ने बदली भारत की दशा, उसके बाद भारतीय अर्थव्यवस्था को मिली रफ्तार: जयराम रमेशखनिज ब्लॉकों की नीलामी के बाद भी धीमी रफ्तार, 720 में केवल 105 खदानें शुरूREIT और InvIT निवेशकों को बड़ी राहत, नई टैक्स व्यवस्था में भी डिविडेंड रहेगा पूरी तरह टैक्स फ्रीडिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, RBI को 4 हफ्ते में SOP बनाने का दिया निर्देशFuel Prices: पेट्रोल-डीजल कीमतों पर सरकार रखेगी नजर, जरूरत पड़ने पर उठाएगी कदमTax Amendment Bill 2026: विदेशी निवेशकों के लिए आसान होंगे टैक्स नियम, लोकसभा में विधेयक पेशNSE क्लोजिंग प्राइस विवाद से बदला म्युचुअल फंड NAV, निवेशकों पर दिखा अलग-अलग असरMeta के अधिकारियों से आज सरकार की बैठक, WhatsApp और कंटेंट मॉडरेशन पर होंगे सवाल

बैंकिंग में भी मंदी के खिलाफ जंग

Advertisement
Last Updated- December 08, 2022 | 1:46 AM IST

वैश्विक मंदी के डंक को कुंद करने के लिए दुनिया भर के बैंक जंग में शामिल हो चुके हैं।


अमेरिका में जहां बैंकों से पैसे जमा करने के बजाय ऋण देने की गुहार की जा रही है, वहीं स्वीडन और बेल्जियम में बैंकों को दिवालिया होने से बचाने की जुगत भिड़ाई जा रही है।

अमेरिका में व्हाइट हाउस ने मंदी को पछाड़ने के लिए बैंकों से ऋण देने की बात कही है। राष्ट्रपति के कार्यालय से कहा गया है कि अरबों रुपये की मदद पाने वाले बैंक और दूसरी वित्तीय कंपनियां रुपये इकट्ठा करने के बजाय लोगों को ऋण देना शुरू करें।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव डेना पेरिनो ने कहा, ‘हम बैंकों से वही करने को कह रहे हैं, जो उन्हें करना चाहिए। बैंकों का काम ही ऋण देना है और उन्हें वही करना भी चाहिए।’ व्हाइट हाउस ने कहा कि बैंक ऋण के जरिये ही पैसे कमाते हैं। उन्हें आगे बढ़ने और धन का उपयोग करने के लिए ढेर सारे मौके मिलते हैं और उन्हें ऋण देकर इन मौकों का इस्तेमाल भी करना चाहिए।

स्वीडन ने भी अमेरिका और यूरोपीय देशों की तर्ज पर अपने यहां बैंकों को मदद देना शुरू कर दिया है। स्वीडन सरकार ने दिवालिया होने के कगार पर पहुंचे बैंक कार्नेजी एबी को 63 करोड़ डॉलर का ऋण देने का ऐलान किया है। सरकार ने पहले 12.6 करोड़ डॉलर देने की बात कही थी, लेकिन अब इस रकम को बढ़ाकर पांच गुना कर दिया गया है।

दरअसल निवेश बैंक कार्नेजी नकदी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है और उसकी वित्तीय सेहत बिल्कुल खराब हो गई है। सोमवार को बैंक के शेयरों में तकरीबन 50 फीसद की गिरावट दर्ज की गई थी और 12.6 करोड़ डॉलर मिलने की घोषणा के बाद भी गिरावट जारी रही। इसीलिए सरकार को मजबूरन यह रकम बढ़ानी पड़ी।

स्वीडन की ही तर्ज पर बेल्जियम सरकार भी अपने बैंकों को उबारने में जुटी हुई है। उसने केबीसी बैंक को भी धन देने का ऐलान किया है। सरकार बैंक के शेयर गिरने के बाद उसमें 350 करोड़ यूरो डालेगी।

केबीसी के मुख्य कार्यकारी आंद्रे बर्जेन ने कहा, ‘वित्तीय संकट को देखते हुए अतिरिक्त पूंजी भंडार को बढ़ाने में ही समझदारी है। हम इसके बल पर ही दूसरे बैंकों को टक्कर दे पाएंगे।’ इस साल की शुरुआत से अब तक केबीसी के शेयरों में 76 फीसद की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।

Advertisement
First Published - October 29, 2008 | 10:01 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement