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फेडरल रिजर्व की सख्ती का पड़ेगा असर

Last Updated- December 11, 2022 | 8:06 PM IST

फेडरल रिजर्व ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की तरफ से बुधवार रात जारी मिनट्स से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की और मौद्रिक सख्ती का संकेत मिलता है। बैठक के मिनट्स से पता चलता है कि फेडरल रिजर्व अपनी 9 लाख करोड़ डॉलर की बैलेंस शीट में साल में एक लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा की कमी लाएगा। उसकी योजना महंगाई में नरमी के लिए एक महीने में बॉन्ड होल्डिंग में 95 डॉलर तक की कमी लाने की है क्योंंकि महंगाई चार दशक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई है। 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी का प्रतिफल पिछले एक महीने में 7 मार्च के 1.77 फीसदी से 2.6 फीसदी पर पहुंच गया। विगत में अमेरिका में बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी देसी बाजार पर बड़ा असर डाल चुकी है। बेंचमार्क सूचकांक पिछले तीन कारोबारी सत्र में 2.5 फीसदी से नीचे आए हैं लेकिन अभी भी मार्च के निचले स्तर के मुकाबले 12 फीसदी ऊपर है।
वरिष्ठ बाजार विश्लेषक जेफरी हैले ने कहा, इक्विटी बाजार सख्त मौद्रिक नीति व शून्य ब्याज दर के खात्मे से जुड़ी वास्तविकता को तेजी से दरकिनार करता रहा है। आगामी महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नीतिगत सामान्यीकरण पर हाउसिंग मार्केट अमेरिका व दूसरी जगहों पर किस तरह की प्रतिक्रिया जताता है। उभरते बाजारों खास तौर से भारत को फेड की बैलेंस शीट के विस्तार का फायदा मिला है। मार्च 2020 में बैलेंस शीट का आकार करीब 4.2 अरब डॉलर का था, जो तब से दोगुना हो चुका है। देसी बाजार इस अवधि में दोगुने से भी ज्यादा हो गए।
क्या फेड की तरफ से मात्रात्मक सहजता को त्यागने और मात्रात्मक सख्ती अपनाने से बाजार अपनी कुछ बढ़त गंवा देगा? एवेंडस कैपिटल ऑल्टरनेट स्ट्रैटिजीज के सीईओ एंड्र्यू हॉलैंड ने कहा, यह फेड के अगले कदम पर निर्भर करेगा और ज्यादा संभावना यह है कि ब्याज में 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी होगी।

First Published - April 7, 2022 | 11:37 PM IST

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