facebookmetapixel
Health Insurance: हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय अधिकतर लोग क्या गलती करते हैं?दिल्ली की हवा इतनी खराब कैसे हुई? स्टडी में दावा: राजधानी के 65% प्रदूषण के लिए NCR व दूसरे राज्य जिम्मेदारExplainer: 50 शहरों में हिंसा, खामेनेई की धमकी और ट्रंप की चेतावनी…ईरान में आखिर हो क्या रहा है?Credit Card Tips: बिल टाइम पर चुकाया, फिर भी गिरा CIBIL? ये है चुपचाप स्कोर घटाने वाला नंबर!आस्था का महासैलाब: पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ शुरू हुआ माघ मेला, 19 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी2026 में हिल सकती है वैश्विक अर्थव्यवस्था, एक झटका बदल देगा सब कुछ…रॉबर्ट कियोसाकी ने फिर चेतायाKotak Mahindra Bank का निवेशकों को जबरदस्त तोहफा: 1:5 में होगा स्टॉक स्प्लिट, रिकॉर्ड डेट फिक्सकनाडा ने एयर इंडिया को दी कड़ी चेतावनी, नियम तोड़ने पर उड़ान दस्तावेज रद्द हो सकते हैंट्रंप का दावा: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी गिरफ्त में; हवाई हमलों की भी पुष्टि कीHome Loan: होम लोन लेने से पहले ये गलतियां न करें, वरना एप्लीकेशन हो सकती है रिजेक्ट

बंद रहेगी बैंकों की मुट्ठी

Last Updated- December 10, 2022 | 11:42 PM IST

अगर आप कर्ज लेने की फिराक में हैं और ब्याज की दरें और कम होने की आपको उम्मीद है, तो इंतजार मत कीजिए क्योंकि बैंकों ने अगले कुछ महीनों में दरों में कटौती से साफ इनकार कर दिया है।
बैंकों का कहना है कि फंड की लागत अभी काफी ज्यादा है, इसलिए ब्याज दर घटाने की गुंजाइश नहीं है। हालांकि भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के चेयरमैन टी एस नारायणस्वामी ने कहा कि ब्याज दर कम करना बैंकों के हित में ही है।
उन्होंने कहा, ‘ब्याज दरों में गिरावट करने से हमें ही फायदा होगा क्योंकि इससे हमारा संपत्ति पोर्टफोलियो अच्छा रहेगा। हम फंड की लागत कम करने के लिए हरमुमकिन कोशिश कर रहे हैं।’ नारायणस्वामी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मुखिया डी सुब्बाराव और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। यह बैठक आरबीआई की वार्षिक मौद्रिक नीति समीक्षा से पहले हुई थी। समीक्षा 21 अप्रैल को आनी है।
अलबत्ता उन्होंने दूसरा झटका देते हुए जमा पर ब्याज की दर कम करने के संकेत जरूर दिए। नारायणस्वामी ने इस बारे में कहा, ‘आने वाले पखवाड़े में कुछ और बैंक जमा पर ब्याज की दर कम करेंगे, ताकि उनकी लागत कुछ काबू में आ सके। बैंक 2-3 सप्ताह में जमा दरों में 0.5-0.75 फीसदी की कमी पर विचार कर सकते हैं। इससे ऋण दरों में 0.5 फीसदी की कमी आएगी।’
एनपीए का बोझ
देश के प्रमुख बैंकों ने आशंका जताई है कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंदी के कारण चालू वित्त वर्ष में उनकी गैर निष्पादित संपत्तियां (एनपीए) बढ़ सकती हैं जबकि ऋण बढ़ोतरी में कमी आएगी।
नारायणस्वामी ने भी साफ तौर पर कहा कि कर्ज के मामले में बैंकों को इस साल बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर मंदी और गहराती है तो इसका असर संपत्तियों की कीमत पर भी पड़ सकता है। बैंकों को इस साल ऋण वृध्दि दर कम रहने का अनुमान है।’
बैंकों ने आरबीआई को सूचित किया कि खुदरा तथा बढी ज़मा दरों में कमी नहीं होने तक उनके लिए ऋण दरों में कमी करना मुश्किल होगा। नारायणस्वामी ने कहा, ‘जमा करने की लागत अब भी ऊंची है। पहले इसे घटाना होगा। इसके बाद ही ऋण दरों में नरमी आ पाएगी। रिजर्व बैंक की ओर से मुख्य दरों में कटौती किए जाने के बाद से बैंकों के पास अब पर्याप्त नकदी है।’
सरकारी ऋण के मसले पर बात करते हुए पर नारायणस्वामी ने कहा, ‘भारतीय रिजर्व बैंक सरकार के ऋण कार्यक्रम को बेहतर और सक्षम तरीके से चला रहा है।’
कैसे घटाएं दरें
बैंकरों के लिए फंड की लागत नहीं हुई कम, इसलिए दरें भी नहीं होंगी कम
जमा पर ब्याज दर कम करने के लिए तैयारी कर रहे हैं कई सरकारी बैंक

First Published - April 9, 2009 | 1:14 PM IST

संबंधित पोस्ट