facebookmetapixel
Advertisement
BS Ubharta Purvanchal: बढ़ते उत्तर प्रदेश में बैंकिंग क्षेत्र के लिए हैं असीमित अवसरBS Ubharta Purvanchal: धार्मिक पर्यटन से चमकी काशी पूर्वांचल का चमकना बाकीरियल एस्टेट में लखनऊ-नोएडा को पीछे छोड़ UP का सबसे महंगा शहर बना वाराणसी, VDA ला रहा नया टाउनशिप प्लानBS Ubharta Purvanchal: हस्तशिल्प, MSME और पर्यटन से चमकेगी वाराणसी की अर्थव्यवस्थाEditorial: विक्रम-1 की ऐतिहासिक उड़ान ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में खोले निजी भागीदारी के दरवाजे भारत के बड़े शहरों की हकीकत: एक जैसे नहीं रोजगार, वेतन और महिलाओं के अवसरसुधारों में देरी यानी सुधारों से इनकार, अब रोजमर्रा का हिस्सा बनें सुधारFIFA World Cup 2026: रिकॉर्ड कमाई के बीच कौन बना सबसे बड़ा विजेता और किसे हुआ नुकसान?संसद के मानसून सत्र का पहला दिन हंगामे की भेंट चढ़ा, नीट पेपर लीक-राम मंदिर मुद्दे पर विपक्ष का जोरदार हंगामाभारत को मिला पहला डेंगी वैक्सीन: DCGI ने Takeda के QDENGA को दी मंजूरी

नए डिप्टी गवर्नर के लिए बहस हुई तेज

Advertisement
Last Updated- December 08, 2022 | 12:04 AM IST

ऐसे समय में जब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर के उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया अपने अंतिम दौर में पहुंच रही है, यह बहस जोर पकड़ रही है कि क्या किसी बैंकर को ही इस पद के लिए चुनने की चली आ रही प्रथा उचित है। 


इस पूरे मामले में करीब से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इस बहस ने कुछ बैंक यूनियनों के वित्त मंत्रालय जाने के बाद जोर पकड़ा है। उन्होंने तर्क दिया कि किसी व्यवसायिक बैंकर को डिप्टी गवर्नर बनने से हितों में टकराव बढ़ जाता है।  सूत्रों ने बताया कि पीएमओ आरबीआई और वित्त मंत्रालय के सहयोग से लीलाधार का उत्तराधिकारी खोजने के लिए एक पैनल बनाएगा जो दिसंबर 2008 को यह पद छोड़ रहे हैं।

Advertisement
First Published - October 15, 2008 | 10:47 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement