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जमा में तेज वृद्धि से बढ़ेगी बैंकों की चुनौती

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Last Updated- December 14, 2022 | 11:02 PM IST

बैंक जमा में कई महीनों से एकल अंक में वृद्धि हो रही थी लेकिन लॉकडाउन के बाद अर्थव्यवस्था के खुलने के साथ ही उसमें काफी तेजी दिख रही है। मौजूदा परिदृश्य में लोग जोखिम से बचने के लिए बैंकिंग प्रणाली की ओर रुख कर रहे हैं। इससे एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई है। बैंकों की उधारी के मुकाबले जमा में अधिक वृद्धि दिखना शुरू हो गया है।
सितंबर के हालिया आंकड़ों से संकेत मिलता है कि बैंक उधारी में 5.3 फीसदी की वृद्धि हुई है जबकि जमा की वृद्धि दर सालाना आधार पर दोगुना से अधिक बढ़त के साथ 12 फीसदी हो गई। यदि यही स्थिति बरकरार रही तो पिछले दो वर्षों के दौरान बैंकों की लाभप्रदता यानी शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) में हासिल 25 से 50 आधार अंकों का सुधार धूमिल हो सकता है। दूसरे शब्दों में, जमा में तेजी से वृद्धि हुई तो वह बैंकों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।
चूंकि पिछले एक साल के दौरान ब्याज दर हस्तांतरण में तेजी आई है। ऐसे में जमा दरें दशक के निचले स्तर पर होने के बावजूद कोई खास मदद नहीं मिलेगी। इसलिए यदि जमा की आमद में तेजी से वृद्धि हुई तो बैंकों के पास दरों में कटौती करने के लिए कोई गुंजाइश नहीं होगा। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि नकारात्मक वास्तविक ब्याज दर पर जमा दरों में आगे और कटौती करने की गुंजाइश कम होगी और वह लघु बचत योजनाओं एवं इक्विटी जैसे अन्य निवेश विकल्पों के मुकाबले आकर्षक नहीं रह जाएगी। उन्होंने कहा, ‘नए सिरे से मूल्य निर्धारित करने से भी अधिक फायदा नहीं होगा क्योंकि बकाया और ताजा जमा दरों के बीच अंतर लगभग 50 आधार अंकों का है।’
चालू खाता पूल को सीमित करने वाले हालिया दिशानिर्देश संभवत: बैंकों के लिए उपलब्ध होंगे और जो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए अतिरिक्त नकदी प्रवाह का कारण बन सकते हैं। जबकि निजी क्षेत्र के बैंकों के लिए इससे रकम जुटाने का एक सस्ता और आसान विकल्प खत्म हो जाएगा।
बहरहाल, यह सही है कि भारत में दिखने वाली जमा में तेजी वृद्धि वैश्विक रुझानों के बहुत अलग नहीं है। एसऐंडपी ग्लोबल की ओर से 1 अक्टूबर को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में कम आय वाले और अधिक आय वाले दोनों श्रेणियों में जमा की वृद्धि उद्योग के औसत के पार हो चुकी है। इससे पता चलता है कि कोविड-19 वैश्विक महामारी के बाद जमा में परिवारों का भरोसा बढ़ सकता है।
सामान्य तौर पर जमा को रकम जुटाने का सबसे सस्ता स्रोत माना जाता है और बैंकों द्वारा उसका स्वागत किया जाता है। हालांकि भाारत में यह ऐसे समय में दिख रहा है जब ऋण को अभी बेंचमार्क दरों पर वापस आना बाकी है।

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First Published - October 6, 2020 | 11:30 PM IST

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