facebookmetapixel
Advertisement
Gold, Silver Price Today: फेड के फैसले के बाद सोना हुआ मज​बूत, चांदी के भाव गिरेबाजार में सब ठीक दिख रहा, लेकिन अंदर से बढ़ रहा खतरा! ब्रोकरेज ने दी डिफेंसिव शेयरों में निवेश की सलाहUS Fed Rate: अमेरिकी फेड का बड़ा फैसला! ब्याज दरें रहीं स्थिर, लेकिन महंगाई को लेकर सख्त रुख बरकरारOpening Bell: सेंसेक्स 100 अंक फिसला, निफ्टी 24,200 के नीचे; रियल्टी शेयरों में 1% की गिरावटRBI अगस्त में ब्याज दर बदलेगा या नहीं? जानें 72 अर्थशास्त्रियों के सर्वे में क्या निकलाअगस्त में किन सेक्टरों में बनेगा पैसा? Realty और Auto पर बुलिश, IT पर ब्रोकरेज ने क्यों किया सावधान?Crude Oil: तेल की कीमतों में फिर गिरावट, राहत की उम्मीद से सस्ता हुआ कच्चा तेलStocks To Watch Today: PNB, BHEL, NBCC समेत इन शेयरों पर रखें नजर, कई कंपनियों ने किए बड़े ऐलानविदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स 889 अंक उछला, निफ्टी में 265 अंकों की बढ़तपश्चिम एशिया में हवाई हमलों से कच्चा तेल 7% उछला, ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के करीब पहुंचा

बैंकों के निजीकरण की प्रक्रिया शुरू

Advertisement
Last Updated- December 15, 2022 | 3:16 AM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय ने अधिकारियों से चालू वित्त वर्ष के दौरान कम से कम 4 सरकारी बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी कम करने की प्रक्रिया को तेज करने को कहा है। इस चर्चा से जुड़े दो अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।
सूत्रों ने कहा कि इन चार बैंकों में पंजाब ऐंड सिंध बैंक, बैंक आफ महाराष्ट्र, यूको बैंक और आईडीबीआई बैंक शामिल हैं, जिनमें प्रत्यक्ष व परोक्ष होल्डिंग के माध्यम से सरकार की बहुलांश हिस्सेदारी है।
सरकार बैंकिंग क्षेत्र में सुधार चाहती है और बैंकों तथा अन्य सरकारी बैंकों के निजीकरण पर जोर दे रही है। साथ ही सरकार का मकसद है कि महामारी के कारण आई मंदी और कर संग्रह में गिरावट को देखते हुए इन्हें बेचकर धन जुटाया जा सके।
इस मामले से सीधे जुड़े एक सरकारी सूत्र ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने भारत के वित्त मंत्रालय को इस महीने की शुरुआत में पत्र लिखकर कहा था कि इन बैंकों के निजीकरण में चालू वित्त वर्ष के दौरान तेजी लाई जाए, जो मार्च 2021 में समाप्त होगा। उन्होंने कहा, ‘बैंकों के निजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है।’ उन्होंने ेकहा कि इस  सिलसिले में कुछ परामर्श पहले ही हो चुका है।
इस मसले पर प्रधानमंत्री कार्यालय व बैंकों ने तत्काल प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया, जबकि वित्त मंत्रालय ने इस पर कुछ भी कहने से इनकार किया है।
इस चर्चा को निजी कहकर सूत्रों ने नाम सार्वजनिक करने से इनकार करते हुए कहा कि सरकार का खाका आक्रामक है और यह बाजार की मौजूदा स्थितियों को देखते हुए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।  पिछले महीने रॉयटर्स ने खबर दी थी कि भारत आधा दर्जन से ज्यादा सरकारी बैंकों के निजीकरण पर विचार कर रहा है, जिससे सरकारी बैंकों की संख्या घटाकर 5 की जा सके।
भारत में इस समय एक दर्जन सरकारी बैंक हैं। आइडीबीआई में सरकार की हिस्सेदारी 47.11 प्रतिशत है, जबकि सरकार की जीवन बीमा निकम की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत है।
बैंकों के निजीकरण का कदम इस अनुमान के बीच उठाया जा रहा है कि उनके खराब कर्ज बढ़ेंगे, जिससे सरकारी बैंकों को बचाने के लिए सरकार को नए सिरे से धन डालने को मजबूर होना पड़ सकता है।
हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया में शामिल एक अन्य सरकारी अधिकारी ने कहा कि प्रक्रिया आगे बढ़ाने के पहले और परामर्श किए जाएंगे।

Advertisement
First Published - August 19, 2020 | 12:59 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement