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रीपो दर में वृद्घि, महंगा होगा कर्ज

Last Updated- December 11, 2022 | 7:17 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बढ़ती मुद्रास्फीति की चिंता के मद्देनजर आज मौद्रिक नीति समिति की तय बैठक के बिना अचानक रीपो दर में 40 आधार अंक की बढ़ोतरी कर दी। केंद्रीय बैंक ने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) भी 50 आधार अंक बढ़ाकर 4.5 फीसदी कर दिया। इससे बैंकिंग तंत्र से करीब 87,000 करोड़ रुपये निकल जाएंगे।

रीपो दर बढऩे से वाणिज्यिक बैंक भी उधारी दरों में 40 आधार अंक का इजाफा कर सकते हैं। रीपो दर में अचानक वृद्घि से बॉन्ड बाजार भी हैरत में पड़ गया और 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल 26 आधार अंक चढ़ गया। बाजार को अंदेशा है कि जून की मौद्रिक समिति की बैठक में भी रीपो दर बढ़ाने का निर्णय हो सकता है। रीपो दर में बढ़ोतरी से स्थायी जमा सुविधा दर अब 4.15 फीसदी और सीमांत स्थायी सुविधा दर तथा बैंक दर 4.65 फीसदी हो जाएगी। अगस्त, 2018 के बाद यह पहला मौका है जब नीतिगत दर बढ़ाई गई है। साथ ही यह पहला मामला है जब आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने प्रमुख ब्याज दर बढ़ाने के लिए बिना तय कार्यक्रम के बैठक की।
आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि मुद्रास्फीति खासकर खाद्य वस्तुओं की महंगाई को लेकर दबाव बना हुआ है। ऊंची कीमतें लंबे समय तक बने रहने का जोखिम है। उन्होंने कहा, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था की सतत और समावेशी वृद्धि के लिए मुद्रास्फीति को काबू में करना जरूरी है।’ रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण ईंधन और खाद्य वस्तुओं के दाम में तेजी तथा महामारी से जुड़ी आपूर्ति संबंधी बाधाओं के कारण मुद्रास्फीति लगातार तीसरे महीने आरबीआई के संतोषजनक स्तर से ऊपर बनी हुई है। मुद्रास्फीति मार्च में बढ़कर 17 महीने के उच्चस्तर 6.95 फीसदी पर पहुंच गई और अप्रैल में भी इसके लक्ष्य से ऊ पर बने रहने की आशंका है। दास ने कहा कि दरों में बढ़ोतरी को मई 2020 में दरें घटाए जाने की वापसी के तौर पर देखा जा सकता है। मई 2020 में कोविड महामारी के समय भी मौद्रिक नीति समिति की तय बैठक के बिना रीपो दर में 40 आधार अंक की कटौती की गई थी।
दास ने कहा कि एमपीसी ने यह फैसला किया कि मुद्रास्फीति परिदृश्य को देखते हुए समय पर सूझ-बूझ के साथ कदम उठाना जरूरी है ताकि दूसरे चरण में अर्थव्यवस्था पर आपूर्ति संबंधी झटकों के असर को काबू में रखा जाए।

नोमुरा ने एक नोट में कहा, ‘हमारा मानना है कि दर में बढ़ोतरी मुद्रास्फीति के जोखिम को कम करने का प्रयास है।’ बाजार के भागीदारों का कहना है कि मुद्रास्फीति को काबू में करने के लिए आरबीआई दरों में और इजाफा कर सकता है। बार्कलेज  के भारत में मुख्य अर्थशास्त्री और प्रबंध निदेशक राहुल बाजोरिया ने कहा कि एमपीसी जून में रीपो दर में 50 आधार अंक की और वृद्धि कर सकती है। निकट अवधि में रीपो दर 5.15 फीसदी हो सकती है।

 

First Published - May 5, 2022 | 12:51 AM IST

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