facebookmetapixel
किसान पहचान पत्र से ही मिलेगा यूरिया, सरकार चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी नई व्यवस्था₹60 हजार से ₹3.20 लाख तक पहुंची चांदी, अब आगे क्या? मोतीलाल ओसवाल की चेतावनीStocks to watch, Jan 23: IndiGo से लेकर JSW Steel और DLF तक, शुक्रवार को इन स्टॉक्स पर रखें फोकसStock Market Today: गिफ्ट निफ्टी से सुस्त संकेत, हफ्ते के आखिरी दिन कैसी रहेगी बाजार की चाल ?₹8,250 लगाइए, ₹19,250 कमाइए? टाटा स्टील पर एनालिस्ट की खास ऑप्शन स्ट्रैटेजीQ3 Results: DLF का मुनाफा 13.6% बढ़ा, जानें Zee और वारी एनर्जीज समेत अन्य कंपनियों का कैसा रहा रिजल्ट कैंसर का इलाज अब होगा सस्ता! Zydus ने भारत में लॉन्च किया दुनिया का पहला निवोलुमैब बायोसिमिलरबालाजी वेफर्स में हिस्से के लिए जनरल अटलांटिक का करार, सौदा की रकम ₹2,050 करोड़ होने का अनुमानफ्लाइट्स कैंसिलेशन मामले में इंडिगो पर ₹22 करोड़ का जुर्माना, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हटाए गएIndiGo Q3 Results: नई श्रम संहिता और उड़ान रद्द होने का असर: इंडिगो का मुनाफा 78% घटकर 549 करोड़ रुपये 

रुपया गिरा, तो देसी बैंकों की किस्मत चमकी, होगा मोटा मुनाफा, चमकेंगे शेयर

एक सरकारी बैंक के वरिष्ठ ट्रेजरी अधिकारी ने कहा कि आगे विदेशी मुद्रा में कर्ज जुटाना और भी महंगा हो सकता है।

Last Updated- January 15, 2025 | 10:02 PM IST
Eternal Share price, Zomato Share price

भारतीय कंपनियों ने पिछले साल विदेश से 23.33 अरब डॉलर कर्ज जुटाया, जो 2023 के विदेशी कर्ज की तुलना में 20.2 फीसदी रहा। उस साल कंपनियों ने विदेश से 29.22 अरब डॉलर उधार लिए थे। पूरे दशक में इतना अधिक विदेशी कर्ज पहले नहीं लिया गया था। 2022 के 14.38 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज की तुलना में यह दोगुने से भी ज्यादा रकम थी। डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार गिरावट आ रही है, जिसका असर विदेशी उधारी पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस वजह से देसी कंपनी जगत कर्ज के लिए विदेशी बाजार का रुख और भी कम करेगा क्योंकि रुपया गिरने के कारण कर्ज चुकाना महंगा पड़ रहा है।

शीर्ष कंपनियों के वित्तीय सलाहकार प्रवाल बनर्जी ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि जिन कंपनियों के पास नैचुरल हेजिंग (रुपये में गिरावट से होने वाले नुकसान की भरपाई करने वाले सौदे या इंतजाम) नहीं है यानी रुपये की गिरावट से बचने का साधन नहीं है, उनमें से ज्यादातर कंपनियां 2025 में विदेशी बाजार से कर्ज जुटाएंगी क्योंकि रुपये की लुढ़कन के कारण कर्ज काफी महंगा पड़ रहा है।

वित्तीय सलाहकार प्रवाल बनर्जी ने कहा कि कई कंपनियां कर्ज के लिए देसी बैंकों का रुख कर सकती हैं। अच्छी रेटिंग वाली कंपनियों के लिए रुपये और विदेशी मुद्राओं में कर्ज की लागत के बीच अंतर घटकर केवल 200-250 आधार अंक रह गया है।’विशेषज्ञों के मुताबिक रुपये में गिरावट उन कंपनियों के लिए भी बुरी खबर है, जिन्होंने कर्ज को आगे मुद्रा में आने वाली गिरावट से बचाने के इंतजाम नहीं किए हैं। मगर बैंकरों का कहना है कि निर्यात से तगड़ी कमाई करने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां विदेशी बैंकों से उधार ले सकती हैं क्योंकि रुपये में नरमी से उन पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। रुपया सितंबर में 83.48 प्रति डॉलर पर था, जहां से 31 दिसंबर 2024 तक यह 2.5 फीसदी नरम फिसल चुका है। 14 जनवरी को खत्म 12 महीने की अवधि में रुपया 4.4 फीसदी गिर चुका है।

एक सरकारी बैंक के वरिष्ठ ट्रेजरी अधिकारी ने कहा कि आगे विदेशी मुद्रा में कर्ज जुटाना और भी महंगा हो सकता है। उन कंपनियों के लिए यह खास तौर पर महंगा हो सकता है, जिन्होंने थोड़ी बहुत नैचुरल हेजिंग ही की है। उन्होंने कहा कि कंपनियों को कर्ज डॉलर में ही चुकाना पड़ता है और उस समय रुपया ज्यादा गिर गया तो डॉलर खरीदना बहुत महंगा पड़ जाएगा। इसलिए डॉलर में कर्ज लेने की योजना बनाते समय इस बात का बहुत ध्यान रखा जाएगा।

बैंकरों ने कहा कि अभी वैश्विक बाजारों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव आ रहा है, जिससे कंपनियां सतर्कता बरत रही हैं। इसी वजह से विदेश से उधारी की रफ्तार भी कम हो गई है। कंपनियां इस बात का इंतजार कर रही हैं कि नए राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के कुर्सी संभालने के बाद अमेरिका किस तरह की नीतियां अपनाता है। हालांकि रुपये में नरमी उन कंपनियों के लिए फायदे की बात हो सकती है, जिनकी आय डॉलर में होती है। आईटी, फार्मा, कपड़ा और परिधान आदि क्षेत्र की कंपनियों को कमजोर रुपये का लाभ मिल सकता है।

बायोकॉन और बायोकॉन बायोलॉजिक्स की चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ ने पिछले हफ्ते बातचीत में बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘रुपये में नरमी से निर्यात करने वाली देसी दवा कंपनियों को फायदा होगा। उम्मीद है कि कंपनियां रुपये में नरमी का इस्तेमाल देसी कंपनियों के साथ होड़ करने के बजाय मुनाफा बढ़ाने में करेंगी। कई भारतीय कंपनियां बाजार हिस्सेदारी हासिल करने के लिए लागत से कम कीमत पर दवा बेचती हैं, जो सही तरीका नहीं है।’

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार रिलायंस इंडस्ट्रीज ने विभिन्न मुद्राओं में 3 अरब डॉलर का कर्ज जुटाने का अभियान शुरू किया है। कंपनी ने इस सौदे पर दिसंबर में हस्ताक्षर किया था। एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि कर्ज 54, 60 और 66 महीने में तीन किस्तों में चुकाया जाएगा। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।

 

 

First Published - January 15, 2025 | 9:56 PM IST

संबंधित पोस्ट