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IDFC First Bank ने हरियाणा सरकार को लौटाए ₹583 करोड़, धोखाधड़ी के बाद ब्याज सहित किया भुगतान

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बैंक के अनुसार, शुरुआती जांच से पता चलता है कि शाखा के कुछ कर्मचारियों ने कुछ बाहरी लोगों के साथ सांठगांठ कर भुगतान में धोखाधड़ी की

Last Updated- February 24, 2026 | 10:34 PM IST
IDFC First Bank
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने धोखाधड़ी उजागर होने पर हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों को ब्याज सहित पूरी रकम यानी 583 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है। बैंक ने मंगलवार को कहा कि धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने और बकाया राशि वसूलने के लिए वह राज्य सरकार के अधिकारियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

बैंक के अनुसार, शुरुआती जांच से पता चलता है कि शाखा के कुछ कर्मचारियों ने कुछ बाहरी लोगों के साथ सांठगांठ कर भुगतान में धोखाधड़ी की।

रिफंड की घोषणा किए जाने से बैंक के शेयर को सहारा मिला, जबकि सोमवार को उसमें 16 फीसदी से अधिक की गिरावट आई थी। बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का आज 1.33 फीसदी बढ़त के साथ 70.97 रुपये पर बंद हुआ। बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में कहा, ‘भले ही मामले की जांच चल रही है, लेकिन हमने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों को उनके दावे के अनुसार ब्याज सहित मूल रकम का शत प्रतिशत भुगतान कर दिया है जो शुद्ध रूप से 583 करोड़ रुपये है।’

उसने कहा, ‘हम भारत में दमदार प्रशासन एवं नैतिकता के साथ एक विश्वस्तरीय बैंक तैयार कर रहे हैं और इस घटना के बाद अधिक मजबूती के साथ उभरेंगे।’

पिछले दिनों बैंक ने चंडीगढ़ शाखा में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की सूचना दी थी। वह शाखा हरियाणा सरकार के खातों का प्रबंधन करती है। धोखाधड़ी का पता उस समय चला जब एक सरकारी विभाग ने बैंक में अपना खाता बंद करने और खाते में मौजूद रकम को किसी अन्य ऋणदाता को हस्तांतरित करने का आग्रह किया था। मगर विभाग द्वारा बताई गई रकम खाते की शेष राशि के अनुरूप नहीं थी।

आईडीएफसी फर्स्ट के प्रबंधन ने इसे अपने कर्मचारियों और बाहरी पक्षों के बीच कथित मिलीभगत के जरिये अंजाम दी गई एक घटना करार दिया जिसके तहत बैंक के बाहर रकम का हस्तांतरण किया गया। इससे संबंधित कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है और बैंक ने मामले की फोरेंसिक जांच के लिए केपीएमजी को नियुक्त किया है। केपीएमजी की रिपोर्ट अगले 4-5 सप्ताह में आने की उम्मीद है।

बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में कहा है, ‘हमारा बैंक हमेशा उच्चतम सिद्धांतों और मानकों का अनुपालन करता है। हम अपनी नीतियों और खुलासे में खुद को ग्राहक-प्रथम बैंक कहते हैं। हम राय में अंतर होने पर ग्राहकों को फायदा देते हैं।’

ऋणदाता ने कहा, ‘हम सिद्धांत पर चलने वाले बैंक हैं। इसलिए हमने मामले की जांच होने तक भुगतान को नहीं रोका। यही आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का डीएनए है।’

मोतीलाल ओसवाल की एक रिपोर्ट के अनुसार, बैंक पर इस घटना का वित्तीय प्रभाव फोरेंसिक जांच और उसके बाद कानूनी वसूली प्रक्रिया के नतीजों और समय पर निर्भर करेगा। ब्रोकरेज ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘हमारा मानना है कि सबसे खराब स्थिति में अगर वसूली की रकम शून्य मान लेते हैं तो प्रावधान की आवश्यकता वित्त वर्ष 2026 के कर पूर्व लाभ को 56 फीसदी तक प्रभावित करेगी।’

एमके ने धोखाधड़ी के लिए प्रावधान के मद्देनजर वित्त वर्ष 2026, वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष के लिए वृद्धि अनुमान में कटौती की है। ब्रोकरेज ने एक नोट में कहा, ‘हालांकि यह इंडसइंड बैंक की तरह ढांचागत प्रशासन का मामला (जिसके कारण शीर्ष प्रबंधन में बदलाव हुआ) नहीं है। परिचालन संबंधी समस्या के कारण आईडीएफसी बैंक की रेटिंग में सुधार होने में देरी हो सकती है, लेकिन यह उसे पटरी से नहीं उतारेगी।’

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First Published - February 24, 2026 | 10:34 PM IST

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