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5000 करोड़ रुपये कर्ज देगा आईडीबीआई

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Last Updated- December 12, 2022 | 5:00 AM IST

त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) तंत्र से बाहर आने के साथ ही आईडीबीआई बैंक चालू वित्त वर्ष में कॉर्पोरेटों को करीब 4,500 करोड़ रुपये से 5,000 करोड़ रुपये का ऋण देने पर विचार कर रहा है। मुख्य तौर पर ऋण मध्य आकार की विनिर्माण इकाइयों को दी जाएगी।
बैंक का जोर इस्पात, सीमेंट, फार्मा और रसायन जैसे क्षेत्रों को ऋण मुहैया कराने पर रहेगा।
बैंक एक कंपनी को दी जाने वाली ऋण की सीमा करीब 500 करोड़ रुपये तक रखेगा ताकि किसी एक कंपनी पर अधिक बकाया न रहे। हालांकि, बैंक के कार्यकारी ने कहा कि उच्च रेटिंग वाली सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को इससे अधिक ऋण देने पर विचार किया जा सकता है।
आईडीबीआई बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी राकेश शर्मा ने कहा कि बैंक को वित्त वर्ष 2022 में अपने लोन बुक में 10 फीसदी की वृद्घि होने की उम्मीद है जिसमें कॉर्पोरेट खातों को एक सीमा से अधिक ऋण नहीं दिया जाएगा और हमारा जोर खुदरा क्षेत्र पर रहेगा।
बैंक अपने 45,000 करोड़ रुपये के कॉर्पोरेट बुक में भी करीब 10 फीसदी का इजाफा करने पर विचार कर रहा है।        
पिछले हफ्ते आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) दोनों के लिए आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी घटाने का रास्ता तैयार किया था। बैंक में सरकार की हिस्सेदारी 45.48 फीसदी और एलआईसी की हिस्सेदारी 49.24 फीसदी है।
बैंक को 2017 से मार्च 2021 तक पीसीए के अंतर्गत रखा गया था। मार्च महीने में इसका अग्रिम पिछले वर्ष के 1.29 लाख करोड़ रुपये से मामूली घटकर 1.28 लाख करोड़ रुपये रह गया था। पीसीए के दौरान बड़े आकार वाले ऋण और खर्च पर पाबंदी थी और बैंक को उबारने की योजना लाई गई।
एक ओर जहां लोन बुक में इसके कॉर्पोरेट सेगमेंट की हिस्सेदारी सालाना आधार पर 6 फीसदी घटी वहीं सूक्ष्म, छोटे और मध्यम उद्यमों की हिस्सेदारी 8 फीसदी बढ़ी। विश्लेषकों को समक्ष रखी गई बैंक के प्रस्तुतिकरण के मुताबिक खुदरा हिस्सेदारी 3 फीसदी बढ़कर 42 फीसदी हो गई।
बैंक की प्रमुखता में ईपीसी और बुनियादी ढांचा नीचे रहे। मौजूदा ग्राहकों के लिए बैंक कार्यशील सीमा में वृद्घि करेगा जो जोखिम और वित्तीय प्रोफाइल के आकलन पर निर्भर करेगा।
मार्च महीने में बैंक की पूंजी पर्याप्तता 15.59 फीसदी पर पहुंच गई जो एक वर्ष पहले 13.31 फीसदी और दिसंबर 2020 में 14.77 फीसदी पर थी। 

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First Published - May 9, 2021 | 11:57 PM IST

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