facebookmetapixel
Advertisement
SEBI का मास्टरस्ट्रोक: AIF योजनाओं के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था शुरू, अब कम समय में लॉन्च होंगे फंडबाजार का मेगा कमबैक: अप्रैल में ₹51 लाख करोड़ बढ़ा निवेशकों का पैसा, मार्केट कैप में रिकॉर्ड उछालQ4 Results: ACC, अदाणी पोर्ट्स, नालको से लेकर वारी एनर्जीज तक; किस कंपनी ने कितना कमाया?करिश्मा कपूर के बच्चों को दिल्ली हाई कोर्ट से मिली राहत, पिता संजय कपूर की संपत्ति पर लगी रोकभारत और इटली मिलकर बनाएंगे घातक हथियार,रक्षा औद्योगिक ढांचे पर बनी सहमति; सुरक्षा होगी और मजबूतसमुद्र में बढ़ी भारत की ताकत: नौसेना और DRDO ने किया स्वदेशी एंटी-शिप मिसाइल का सफल परीक्षणSC का ऐतिहासिक रुख: दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग पर नहीं थोप सकते अनचाहा गर्भ, कानून में बदलाव के संकेतबाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 583 अंक टूटा, क्रूड ऑयल और ईरान-अमेरिका तनाव ने बढ़ाई निवेशकों की टेंशनHindustan Unilever Q4 Results: मुनाफा 21.4% उछला, निवेशकों को मिलेगा ₹22 का बंपर डिविडेंडकॉग्निजेंट में छंटनी का ‘प्रोजेक्ट लीप’: 15,000 कर्मचारियों की जा सकती है नौकरी, भारत में सबसे ज्यादा असर

5 बैंकों में हिस्सा बेचेगी सरकार! सरकारी बैंकों में 20% तक हिस्सेदारी घटाने की योजना को अंतिम रूप देने पर हो रहा है काम

Advertisement

सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी बेचने की योजना पर जानकारी के लिए वित्त मंत्रालय को ईमेल किया गया मगर खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया।

Last Updated- February 25, 2025 | 10:45 PM IST
Bank

केंद्र सरकार अगले चार साल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 20 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचने का खाका तैयार कर रही है। इसके लिए सरकार निवेश और सार्वजनिक संप​त्ति प्रबंधन विभाग (दीपम), सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय सेवाओं के विभाग के साथ परामर्श कर रही है। मामले से अवगत एक वरिष्ठ सरकारी अ​धिकारी ने इसकी जानकारी दी।

अ​धिकारी ने कहा, ‘सरकार भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता मानदंडों का पालन करने के लिए अगले 4 साल में सरकारी बैंकों में 20 फीसदी तक हिस्सेदारी कम करने की रणनीति पर काम कर रही है। बाजार की स्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकार हिस्सेदारी कम करने के लिए बिक्री पेशकश (ओएफएस) और पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) दोनों का उपयोग करने की योजना बना रही है।’

विनिवेश रणनीति के तहत सरकार का इरादा 5 सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 75 फीसदी से कम करना है। बैंक ऑफ महाराष्ट्र में सरकार की हिस्सेदारी 86.46 फीसदी, इंडियन ओवरसीज बैंक में 96.38 फीसदी, यूको बैंक में 95.39 फीसदी, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 93.08 फीसदी और पंजाब ऐंड सिंध बैंक में 98.25 फीसदी है। यह कदम सेबी के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता  मानदंडों के अनुरूप है, जिसके तहत सभी सूचीबद्ध कंपनियों को न्यूनतम 25 फीसदी सार्वजनिक शेयरधारिता बनाए रखना आवश्यक है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सेबी ने विशेष छूट दी है जिससे उन्हें इस न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता की आवश्यकता को पूरा करने के लिए अगस्त 2026 तक का समय मिल गया है। सूत्र ने आगे बताया कि सरकार का प्राथमिक ध्यान ओएफएस के ज​रिये हिस्सेदारी बेचने पर होगा। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी है और ओएफएस के माध्यम से सरकार अन्य जरूरतों के लिए भी पूंजी जुटा सकती है।’

केयरऐज रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक संजय अग्रवाल ने कहा, ‘परिसंप​त्ति गुणवत्ता समीक्षा अव​धि के दौरान सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को ऋण नुकसान में सहायता के काफी इ​क्विटी निवेश किया है। अब बैंकों की संप​​त्तियों में सुधार हुआ है और बैंक अच्छा मुनाफा भी कमा रहे हैं। लेकिन सेबी के नियमों के अनुसार कुछ बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है। इस अ​तिरिक्त हिस्सेदारी का वर्तमान मूल्य 43,000 करोड़ रुपये से भी अ​धिक है। अधिशेष का एक हिस्सा बैंकों द्वारा कारोबार के उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाएगा जबकि सरकार कुछ हिस्से को सेकंडरी मार्केट में बेचने पर विचार कर सकती है।’  

सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी बेचने की योजना पर जानकारी के लिए वित्त मंत्रालय को ईमेल किया गया मगर खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया।

Advertisement
First Published - February 25, 2025 | 10:40 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement