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कीमत में स्थिरता के प्राथमिक मकसद से समझौता नहीं : दास

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Last Updated- December 11, 2022 | 8:54 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भारत में नीतिगत दरों को तय करने वाले निकाय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने समावेशी रुख बनाए रखते हुए कीमत में स्थिरता के अपने प्राथमिक मकसद के साथ समझौता नहीं किया जबकि विकसित देशों के केंद्रीय बैंकों ने लंबे समय से अत्यंत शिथिल मौद्रिक नीति के बाद ज्यादा महंगाई दर को देखते हुए सख्त मौद्रिक नीति का रुख अपना लिया है। दास एमपीसी की अध्यक्षता करते हैं।
नैशनल डिफेंस कॉलेज में बोलते हुए गवर्नर दास ने कहा, ‘हमने अपनी घरेलू वृद्धि-महंगाई की गणित के मुताबिक समावेशी रुख जारी रखा है, जो दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही मौजूदा नीतिगत कार्रवाई के विपरीत है। इस तरह से हमने फ्लैक्सिबल इन्फ्लेशन टार्गेटिंग (एफआईटी) ढांचे का इस्तेमाल किया है और अपनी मौद्रिक नीति लागू की है। मूल्य स्थिरता के प्राथमिक मकसद से समझौता किए बगैर ऐसा किया गया है।’
हाल में हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक में 6 सदस्यों वाली समिति ने मानक नीतिगत दरों में बदलाव न करने और समावेशी रुख बरकरार रखने के पक्ष में मतदान किया था। असमान आर्थिक रिकवरी और महंगाई दर के अनुमानों को देखते हुए यह बाजार की आशाओं के विपरीत था।
बहरहाल समावेशी रुख जारी रखने की एमपीसी के एक सदस्य जयंत वर्मा ने आलोचना की थी, जो भारतीय प्रबंध संस्थान अहमदाबाद में प्रोफेसर हैं। वर्मा के मुताबिक तटस्थ रुख लंबे समय से प्रतीक्षित है।
कोविड-19 महामारी के जोखिमों से बचने के लिए विश्व के अन्य प्रमुख बैंकों की ओर से उठाए गए कदमों विपरीत रिजर्व बैंक के कदमों का उल्लेख करते हुए दास ने कहा कि रिजर्व बैंक ने गैर-परंपरागत कदम उठाए, यहां तक कि यह तब भी किया गया, जब परंपरागत नीतिगत कदमों की संभावनाएं खत्म नहीं हुई थीं।
दास ने कहा कि एफआईटी में लचीलापन आपूर्ति की ओर से लगने वाले झटकों का महंगाई दर पर पडऩे वाले असर को समावेशित कर लेता है। इससे मौद्रिक नीति में दरों में अनावश्यक उतार-चढ़ाव बचने में मदद मिली है, जिससे वृद्धि पर बुरा असर पड़ सकता था।

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First Published - March 5, 2022 | 10:20 PM IST

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