facebookmetapixel
Advertisement
अच्छे दिनों में राजकोषीय गुंजाइश न बनाना भारत की बड़ी भूल, आर्थिक संकट में विकल्प हुए सीमितEditorial: फेड चीफ के सख्त रुख और ब्याज दर बढ़ने के डर से सहमा ग्लोबल मार्केटफार्मा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क के सिस्टम में बड़ी सेंधमारी, हैकर्स ने मांगी 2.5 करोड़ डॉलर की फिरौतीमहंगाई दर को लेकर सतर्क रहना जरूरी, नीतिगत दरों में बदलाव के लिए करना होगा इंतजार: RBIटेलीग्राम बैन पर केंद्र सरकार के फैसले को दिल्ली HC की मंजूरी, कोर्ट ने कहा: यह कदम अनुचित नहींमुकेश अंबानी का बड़ा बयान: आयातित ऊर्जा पर निर्भरता लंबे समय के लिए ठीक नहीं, ग्रीन एनर्जी में निवेश बढ़ाएगी RILईशा अंबानी का मेगा प्लान: ₹1 लाख करोड़ के राजस्व लक्ष्य के साथ देश की सबसे बड़ी FMCG कंपनी बनेगी RCPLमुकेश अंबानी का बड़ा ऐलान: जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा AI कंप्यूट प्लेटफॉर्म बनाएगी रिलायंसGold Price Crash: फेड के सख्त रुख और मजबूत डॉलर से टूटा सोना, लगातार तीसरे सप्ताह आई भारी गिरावटReliance Stocks: JIO IPO से चमकेगी रिलायंस की किस्मत, शेयरों की रेटिंग में बड़े सुधार के संकेत

देरी से परेशान चीन के बैंक

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 8:45 PM IST

चाइना डेवलपमेंट बैंक, एक्सपोर्ट इम्पोर्ट बैंक ऑफ चाइना, और एससी लॉवी ऐसेट मैनेजमेंट का दिवालिया रिलायंस इन्फ्राटेल में संयुक्त रूप से 13,483 करोड़ रुपये का कर्ज है। इन बैंकों ने कंपनी की कर्ज समाधान प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए भारत सरकार को पत्र लिखा है। यह समाधान प्रक्रिया मई 2018 में शुरू हुई थी।
वित्त मंत्रालय और इनसॉल्वेंसी ऐंड बैंगक्रप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया (आईबीबीआई) को भेजे पत्र में ऋणदाताओं ने रिलायंस इन्फ्राटेल के लिए आईबीसी, 2016 में निर्धारित सख्त समय-सीमाओं के बावजूद अपनी चिंताओं से अवगत कराया है। इसमें कहा गया है कि इस फंसे कर्ज की वजह से सभी ऋणदाताओं को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। बैंकों ने कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय से उन बोलीदाताओं पर जुर्माना लगाने को भी कहा है जिनकी वजह से पूरी प्रक्रिया में विलंब हुआ है।
रिलायंस कम्युनिकेशंस की फाइबर एवं टावर इकाई रिलायंस इन्फ्राटेल को 41,055 करोड़ रुपये की कर्ज चूक के बाद ऋण समाधान के लिए दिवालिया अदालत के हवाले किया गया था। रिलायंस कम्युनिकेशंस के लिए अलग प्रक्रिया भी यूवी एआरसी के साथ पूरी की गई थी। यूवीएआरसी के सौदे को लकर मामला अभी भी अदालत में लंबित है। 4,400 करोड़ रुपये की पेशकश के साथ, रिलायंस जियो की सहायक इकाई रिलायंस प्रोजेक्ट्स ऐंड प्रॉपर्टी मैनेजमेंट सर्विसेज (आरपीपीएमएस) भी कंपनी के लिए सफल बोलीदाता के तौर पर उभरी, लेकिन मामला राष्टï्रीय कंपनी विधि पंचाट-मुंबई में विचाराधीन है।
वित्त मंत्रालय को भेजे अपने पत्र में बैंक ने कहा है कि एनसीएलटी ने 3 दिसंबर 2020 को आरपीपीएमएस समाधान योजना स्वीकृत की और 28 दिसंबर को रिलायंस इन्फ्राटेल के पूर्व प्रवतर्क ने धोखाधड़ी के तौर पर एसबीआई द्वारा ठगी के तौर पर आरआईटीएल खाते के वर्गीकरण के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय से रोक का आदेश हासिल किया। रिलायंस इन्फ्राटेल अनिल अंबानी परिवार द्वारा प्रवर्तित थी, जबकि रिलायंस जियो उनके बड़े भाई मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली कंपनी है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने यथास्थिति बनााए रखनेा आदेश दिया, लेकिन भारतीय बैंकों को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के साथ उपयुक्त शिकायतें दर्ज कराने की अनुमति दी। 5 जनवरी, 2021 को, आरपीपीएमएसएल ने एसबीआई से उसकी समाधान योजना पर ‘विपरीत प्रभाव’ पडऩे का हवाला देने वाली फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट की प्रति मांगी। जनवरी में, एसबीआई और भारतीय बैंकों ने आरआईटीएल और उसके पूर्ववर्ती निदेशकों के खिलाफ सीबीआई के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। चाइनीज बैंकों ने कहा है कि जून 2021 के बाद से इस मामले पर कोई बड़ी सुनवाई नहीं हुई है, और आरपीपीएमएस आवेदन अब तक लंबित पड़ा हुआ है।  अपने पत्र में चाइना डेवलपमेंट बैंक ने कहा है कि आरपीपीएमएसएल काफी रियायती कीमत पर आरआईटीएल के टावरों का इस्तेमाल कर रहा है और इस इस्तेमाल को देखते हुए ऋणदाताओं को इन टावरों के रखरखाव पर भारी नुकसान हो रहा है।

Advertisement
First Published - March 14, 2022 | 11:42 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement