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लीमन संकट के बाद रिजर्व बैंक भी आया हरकत में

Last Updated- December 07, 2022 | 9:07 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) बैंकों और फिक्स्ड इनकम ऐंड मनी मार्केट डीलर एसोसिएशन (फिमडा)के साथ इंट्रेस्ट रेट स्वैप्स और लीमन ब्रदर्स के प्राथमिक डीलर कारोबार पर बातचीत की प्रकिया में है।


लीमन ब्रदर्स ने दिवालिया कानून के चैप्टर 11 के अंतर्गत फाइलिंग की है और इसकी वैश्विक अनुषंगी कंपनियों द्वारा भी इसका अनुसरण किए जाने की संभावना है। लीमन ब्रदर्स भारत में निवेश बैंक के रूप में परिचालन करती है और यह भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड के अधीन पंजीकृत है। जबकि एक नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी और प्राथमिक डीलर के रूप में आरबीआई के अधीन पंजीकृत है।

आरबीआई पहले इन डेरिवेटिव्स में बैंकों के एक्सपोजर के बारे में जानकारी करेगी विशेषकर इंट्रेस्ट रेट स्वैप्स पर। बैंकिंग सूत्रों का अनुमान है कि इस तरह के सौदों का आकार सभी बैंकों को मिलाकर 2,000-3,000 करोड़ होती है। इससे जुड़े बैंकरों ने कहा कि इस तरह के सौदों को आदर्श रूप में दिवालिया घोषित होने की तारीख तक इंटरनेशनल स्वैप डीलर एग्रीमेंट (इस्डा) के अधीन निपटा देना चाहिए।

हालांकि यदि लीमन ब्रदर्स अपने भारतीय परिचालन अकेले या विलय के जरिए जारी रखता है तो इस तरह केसौदों का उसके काउंटर पार्ट को स्थानांतरण हो जाएगा। सूत्रों का कहना है कि यदि एक्सपोजर कम है, तब आरबीआई बैंकों को नुकसान झेलने के लिए कह सकता है यदि सितंबर की तिमाही की बैंकों की बैलेंस सीट पर इन सौदों का आंकड़ा कम होता है।

सूत्रों का यह भी कहना है कि कंपनी का प्राथमिक डीलर कारोबार का दूसरी पार्टी के साथ विलय हो सकता है जबकि एनबीएफसी लाइसेंस समाप्त हो सकता है। हालांकि लीमन का भारत में रियल एस्टेट में सबसे ज्यादा एक्सपोजर था और इस कारोबार का भी किसी दूसरी इकाई द्वारा अधिग्रहण किया जा सकता है। आरबीआई द्वारा जल्द ही कोई निर्णय लिए जाने की संभावना है।

First Published - September 16, 2008 | 11:00 PM IST

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