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विदेशी मुद्रा समायोजित किए बगैर निर्यात प्रतिस्पर्धा को खतरा

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Last Updated- December 12, 2022 | 9:26 AM IST

भारतीय रिजर्व बैंक के एक अध्ययन के मुताबिक चालू खाते के घाटे के माध्यम से बड़े पूंजी प्रवाह को समायोजित किए बगैर भारत के निर्यात की प्रतिस्पर्धा कमजोर पडऩे डर है, क्योंकि विदेशी मुद्रा भंडार बढऩे से रुपये में मजबूती आ सकती है।
2020 के दौरान भारत में बड़ी मात्रा में विदेशी पूंजी आई है। खासकर यह बाजारों में भारी नकदी के माध्यम से हुआ है।  कोविड-19 महामारी के कारण हुए आर्थिक व्यवधान से निपटने के लिए केंद्रीय बैंक ने बहुत सहज मौद्रिक नीतियां अपनाई हैं। रिजर्व बैंक के पूंजी अवशोषित करने की गतिविधि बढ़ी है और 2020 में देश के विदेशी मुद्रा भंडा में 124 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है।
भारत और इसके बड़े कारोबारी साझेदारों के बीच महंगाई का अंतर घटा है और फ्लैक्सिबल इनफ्लेसन टार्गेटिंग (एफआईटी) ढांचे के बाद यह स्थिर हुई है। यह निकाय भारत की बाहरी प्रतिस्पर्धा के हिसाब से बेहतर हैं। भारत ने 2016 में एफआईटी को स्वीकार किया था।
रिजर्व बैंक के अध्ययन में कहा गया है कि औसत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर 2017-18 से 2019-20 के दौरान घटकर 4 प्रतिशत से नीचे रही है, जो 2009-10 से 2015-16 के बीच 8 प्रतिशत से ऊपर थी।
रिजर्व बैंंक ने प्रभावी विनिमय दर (ईईआर) सूचकांक में बदलाव किया है, जिससे अर्थव्यवस्था की बाहरी प्रतिस्पर्धात्मकता का मापन होता है।  इसमें मुद्राओं का बास्केट 36 से बढ़ाकर 40 कर दिया गया है और 4 मुद्राओं को बदला गया है। वैश्विक व्यापार का माहौल बदल रहा है, ऐसे में यह जरूरी है कि रुपये के नॉमिनल ईईआर/ वास्तविक ईईआर बॉस्केट की नियमित रूप से समीक्षा की जाए। नीति निर्माताओं के लिए आरईईआर की गति घरेलू मुद्रा की विनिमय दर के कुल मिलाकर संरेखण बिगडऩे की स्थिति जानने के लिए अहम होती है। दरअसल मुद्राओं का कम और ज्यादा मूल्यांकन से जुड़ा मसला कुछ वैश्विक व्यापारों में अहम रहा है।
भारत के मामले में 2004-05 से उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के साथ कारोबार की साझेदारी का महत्त्व तुलनात्मक रूप से बढ़ रहा है। इन तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए एनईईआर/आरईईआर का विस्तार 36 से 40 मुद्राओं तक किया गया है। भारत के कुल कारोबार में एनईईआर/आरईईआर बास्केट का 88 प्रतिशत प्रतिनिधित्व है, जो 36 मुद्राओं का बास्केट होने पर 84 प्रतिशत था।

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First Published - January 21, 2021 | 11:45 PM IST

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