facebookmetapixel
Advertisement
सीमेंट कंपनियों की बिक्री में 7-8% उछाल, बढ़ती लागत ने मुनाफे पर डाला दबावमॉनसून सत्र में महज चार दिन शेष, शाह के बयान से पीछे हटने को तैयार नहीं विपक्षप्रधानमंत्री मोदी ने खिलाड़ियों को दी बधाई, ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ को किया याद; हर घर तिरंगा की अपीलISRO 6 साल में भेजेगा 300 उपग्रह! 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन बनाने का लक्ष्यरिटर्न में पिछड़कर भी रहे एसआईपी की पसंद निवेश के लिए कितने सही हैं लार्ज कैप फंड?FPI की खरीदारी वाले शेयरों ने दिया बेहतर रिटर्न, फिर भी हिस्सेदारी 14 साल के निचले स्तर परमदरसन इंटरनैशनल में 9% उछाल, मजबूत नतीजों और नए कारोबार से बढ़ी ग्रोथ की उम्मीदNSE-BSE के दबदबे में क्षेत्रीय एक्सचेंजों का सफर, क्या लौटेगा कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज?हीरो मोटोकॉर्प की रफ्तार बरकरार, मजबूत वॉल्यूम और प्रीमियम मिक्स से बढ़ी उम्मीदउदारीकरण के 35 साल: ‘सनसेट इंडस्ट्री’ जिसने आर्थिक सुधारों के बाद लिख दी विकास की नई इबारत

सरकार के पूंजीगत व्यय की गति पर्याप्त तेज नहीं

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 8:53 PM IST

महामारी और वैश्विक वृहद आर्थिक वजहों सहित कई कारणों से सरकार के पूंजीगत व्यय की गति उतनी तेज नहीं हो पा रही है, जितनी नीति निर्माता चाहते थे। उपलब्ध आंकड़ों व अधिकारियों की राय से यह सामने आया है।
महामारी के पांव पसारने के बाद अप्रैल-जून 2020 में अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ गई और केंद्र सरकार ने बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक निवेश को आर्थिक रिकवरी का आधार बनाया। वित्त वर्ष 21 वित्त वर्ष 22 के व्यय और और वित्त वर्ष 23 के केंद्र के पूंजीगत आवंटन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इस पूंजीगत व्यय को 111 लाख करोड़ रुपये के नैशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (एनआईपी) से आधार मिला।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘बुनियादी ढांचे पर ध्यान बना हुआ है। बहरहाल कुछ मसले भी अवशोषण क्षमता को लेकर हैं, जब आप मूल्य शृंखला में जाते हैं।’
अधिकारी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जहां बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए धन तेजी से आवंटित किया जा रहा है, इन परियोजनाओं को लागू करने वाली इकाइयां अब तक उतनी तेजी से नहीं काम कर पाई हैं। अधिकारी ने कहा, ‘यह एक अस्थाई समस्या है। राज्यों, स्थानीय निकायों और निजी ठेकेदारों को इनमें से ज्यादातर परियोजनाओं को लागू करना है और वे इतनी तेजी से खर्च कर पाने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में सुस्ती है। लेकिन अवशोषण क्षमता भी धीरे धीरे तेज होगी।’
अधिकारी ने कहा कि कच्चे माल, बिल्डिंग व निर्माण उपकरणों के आपूर्तिकर्ता भी अपनी क्षमता बढ़ा रहे हैं, जिससे मांग पूरी कर सकें।  राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से जारी जीडीपी के दूसरे अग्रिम अनुमान के आंकड़ों के मुताबिक  वित्त वर्ष 22 के लिए नॉमिनल सकल नियत पूंजी सृजन (जीएफसीए) 66.98 लाख करोड़ रुपये रहने की संभावना है।
भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्यकांति घोष ने कहा, ‘सरकार ने महामारी के बाद से पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। बहरहाल इस तरह के भारी भरकम व्यय का परिणाम आने में वक्त लग सकता है। वहीं निजी निवेश ने अभी गति पकडऩा शुरू किया है। साथ ही राज्य सरकारें भी इस तरह के केंद्र के व्यय का लाभ लेने में भागीदार बन रही हैं।’  
घोष ने कहा कि मौजूदा युद्ध वृद्धि पर नकारात्मक असर डाल सकता है और एलआईसी के विनिवेश पर भी इसका असर पडऩे की पर्याप्त संभावना है।
 

Advertisement
First Published - March 6, 2022 | 11:53 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement