facebookmetapixel
Advertisement
टाटा स्टील का दावा: दूसरी तिमाही में और सुधरेगा प्रदर्शन, एमडी टी. वी. नरेंद्रन ने बताया पूरा प्लान‘भटके हुए बच्चे हैं, सजा नहीं सुधार चाहिए’, जंतर-मंतर पर अभद्र टिप्पणी करने वालों को PM मोदी ने किया माफकमर्शियल LPG सिलेंडर ₹200 से ज्यादा सस्ता, दिल्ली-कोलकाता में घटे दाम; होटल-रेस्तरां को बड़ी राहतब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स में भारत के सरकारी बॉन्ड की एंट्री फिर टली, निवेशकों की बढ़ी चिंतागिफ्ट सिटी में ग्लोबल शेयरों की ट्रेडिंग हुई दोगुनी, पहली तिमाही में ₹1.93 अरब डॉलर पहुंचा ट्रेडभारत का R&D खर्च बढ़ा, लेकिन GDP के मुकाबले हिस्सेदारी सिर्फ 0.84%; चीन और ब्राजील से पीछेइलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार ने बनाया नया रिकॉर्ड, 7 महीनों में 10 लाख से ज्यादा EV बिके; TVS सबसे आगेPM मोदी की पोस्ट ब्लॉक होने पर बढ़ा विवाद, मेटा की ग्लोबल टीम से एल्गोरिदम पर होगी सख्त पूछताछकैबिनेट के बड़े फैसले: ‘पीएम सूर्य सरोवर’ योजना मंजूर, पीएम-किसान और खेलो इंडिया को 5 साल का विस्तारसरकार ने ‘समुद्र मंथन’ योजना को दी हरी झंडी, गहरे सागर में तेल-गैस खोज के लिए ₹84,084 करोड़ मंजूर

फर्जी बिल से कर चोरी पर सख्ती

Advertisement
Last Updated- December 12, 2022 | 10:33 AM IST

सरकार ने एक नया कानून पेश किया है, जिससे वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट लेना कठिन हो जाएगा। जिन कारोबारियों का मासिक कारोबार 50 लाख रुपये से ज्यादा है, उन्हें अब अपनी जीएसटी देनदारी का कम से कम एक प्रतिशत अनिवार्य रूप से नकद भुगतान करना होगा।
 केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने जीएसटी नियमों में नियम 86-बी पेश किया है। यह नियम इनपुट कर क्रेडिट (आईटीसी) का अधिकतम 99 प्रतिशत तक ही इस्तेमाल जीएसटी देनदारी निपटाने की अनुमति देता है।
सीबीआईसी ने आज कहा, ‘किसी महीने में कर योग्य आपूर्ति का मूल्य 50 लाख रुपये से अधिक होने पर कोई भी पंजीकृत व्यक्ति इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में उपलब्ध राशि का इस्तेमाल 99 प्रतिशत से अधिक कर देनदारी को पूरा करने के लिए नहीं कर सकता।’
कारोबार की सीमा की गणना करते समय जीएसटी छूट वाले उत्पादों या शून्य दरों वाली आपूर्ति को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।
हालांकि, कंपनी के प्रबंध निदेशक या किसी भागीदार ने यदि एक लाख रुपये से अधिक का आयकर दिया है अथवा पंजीकृत व्यक्ति को इससे पिछले वित्त वर्ष के दौरान इस्तेमाल न हुए इनपुट कर क्रेडिट पर 1 लाख रुपये से अधिक का रिफंड मिला है, तो यह अंकुश लागू नहीं होगा।
ईवाई के टैक्स पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा, ‘इस कदम का मकसद कंपनियों को जाली बिलों के जरिये आईटीसी का दुरुपयोग करने से रोकना है।’ उन्होंने कहा कि जो लोग फर्जी तरीके से आईटीसी के करोड़ों रुपये दावे कर रहे हैं, वे ऊहापोह में फंस जाएंगे क्योंकि उन्हें एक प्रतिशत नकद जमा करना होगा जो करोड़ों रुपये तक हो सकता है। इसके अलावा सीबीआईसी ने जीएसटी नियमों में संशोधन किया है, जिससे बाहर आपूर्ति का ब्योरा एक अलग फॉर्म में दाखिल करना होता है। बहरहाल अब तक जीएसटीआर 3बी दाखिल न करने की वजह से ईवे बिल रुक जाता था, वहीं अब जीएसटीआर1 से भी इस तरह का व्यवधान आ जाएगा।
एएमआरजी ऐंड एसोसिएट्स के सीनियर पार्टनर रजत मोहन ने कहा, ‘इन बदलावों से संकेत मिलते हैं कि सरकार कम कर संग्रह और ज्यादा कर चोरी के संकट से गुजर रही है और इसका बोझ एक बार फिर ईमानदारी से कर भुगतान करने वालों पर पड़ेगा।’
जीएसटी पंजीकरण के लिए कारोबार परिसर का भौतिक परीक्षण या आधार नंबर की पुष्टि का नियम भी सीबीआईसी ने अधिसूचित किया है। जैन  ने कहा, ‘संभवत: यह संशोधन फर्जी पंजीकरणों को रोकने के लिए लाया गया है।’ साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वे बिल प्रवाधानों की वैधता में भी सीबीआईसी ने संशोधन किया है, जिसके मुताबिक ई-वे बिल हर 200 किलोमीटर यात्रा पर 1 दिन के लिए वैध होगा, जबकि पहले यह नियम 100 किलोमीटर के लिए था।

Advertisement
First Published - December 23, 2020 | 11:57 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement