भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा जारी 23 राज्यों के मासिक खातों के विश्लेषण के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 10 महीनों (अप्रैल-जनवरी) में राज्यों ने साल के बजट में निर्धारित 10.37 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय में से केवल आधे से थोड़ा अधिक 5.38 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह पूंजीगत व्यय के कुल सालाना बजट का 51.84 प्रतिशत है।
जिन 23 राज्यों के आंकड़े उपलब्ध है, उनमें से 12 राज्यों ने अप्रैल-जनवरी के दौरान कैपेक्स पर अपने बजट अनुमान (बीई) के आधे से भी कम खर्च किया, जिनमें कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। तेलंगाना एक ऐसा राज्य बनकर उभरा है, जिसने अपने निर्धारित पूंजीगत व्यय से अधिक, बजट का 121.56 प्रतिशत खर्च किया है। वहीं हरियाणा ने 92.75 प्रतिशत, केरल ने 82.09 प्रतिशत और बिहार ने 80.19 प्रतिशत खर्च किया है।
वहीं 7 राज्यों का प्रदर्शन बेहत खराब रहा है। पश्चिम बंगाल ने इस अवधि के दौरान अपने बजट में निर्धारित पूंजीगत व्यय का 29.06 प्रतिशत खर्च किया, जबकि त्रिपुरा ने 29.46 प्रतिशत उपयोग किया। छत्तीसगढ़ (31.01 प्रतिशत), मेघालय (34 प्रतिशत), उत्तर प्रदेश (36.53 प्रतिशत) और राजस्थान (38.47 प्रतिशत) जैसे राज्यों ने अपने वार्षिक आवंटन का 40 प्रतिशत से भी कम खर्च किया।
राज्यों द्वारा पूंजीगत व्यय की सुस्त गति उसी अवधि के दौरान केंद्र के प्रदर्शन के विपरीत है। लेखा महानियंत्रक (सीजीए) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में अप्रैल से जनवरी तक शुरुआती 10 महीनों में केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय उसके संशोधित अनुमान (आरई) का 76.9 प्रतिशत तक पहुंच गया।
इसकी तुलना में पिछले वित्त वर्ष में 25 राज्यों में पूंजीगत व्यय का बड़ा हिस्सा खर्च कर दिया गया था। वित्त वर्ष 2025 में राज्यों ने कुल मिलाकर अपने बजट में आवंटित पूंजीगत व्यय का 80.2 प्रतिशत खर्च किया, जो 9.7 लाख करोड़ रुपये के कुल आवंटन में से 7.8 लाख करोड़ रुपये था।
राजस्व व्यय में तेज प्रगति हुई। अप्रैल-जनवरी के दौरान 23 राज्यों ने अपने बजट में आवंटित कुल राजस्व व्यय 51 लाख करोड़ रुपये का 68.22 प्रतिशत खर्च कर दिया। बिहार ने 82.9 प्रतिशत के साथ उच्चतम उपयोग दर्ज किया, इसके बाद हिमाचल प्रदेश 81.8 प्रतिशत, तमिलनाडु 77.1 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश 76.95 प्रतिशत पर रहे। झारखंड (56.74 प्रतिशत), महाराष्ट्र (57.25 प्रतिशत) और त्रिपुरा (57.69 प्रतिशत) सबसे कम खर्च करने वालों में से थे।
अगर राजस्व प्राप्ति की स्थिति देखें तो इस अवधि के दौरान राज्यों ने अपने बजट में अनुमानित कर राजस्व 38.1 लाख करोड़ रुपये का 73 प्रतिशत एकत्र कर लिया। हरियाणा ने 80.8 प्रतिशत के साथ अपने वार्षिक लक्ष्य के बराबर कर संग्रह किया, जो सर्वाधिक है। इसके बाद असम 80.1 प्रतिशत और गुजरात 79 प्रतिशत पर रहे। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और नगालैंड कर राजस्व संग्रह के मामले में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वालों में से थे।
उधारी और अन्य देनदारियां आराम से आधे से अधिक हो गईं। राज्यों ने अपने बजट उधारी का 61.2 प्रतिशत उपयोग कर लिया। राज्यों ने वित्त वर्ष 2026 के 13.1 लाख करोड़ रुपये उधारी के लक्ष्य के मुकाबले 8 लाख करोड़ रुपये जुटाए।
इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च की निदेशक अनुराधा बसुमतारी ने कहा कि राज्य जीडीपी का 2.7 प्रतिशत पूंजीगत व्यय का लक्ष्य हासिल कर लेंगे, जो वित्त वर्ष 2027 में बढ़कर 2.9 प्रतिशत हो जाएगा।