अमेरिका ने भारत को 30 दिन तक रूस से कच्चा तेल खरीदने की छूट दे दी है। इससे देश की तेल शोधक कंपनियां समुद्र में अटके रूसी कच्चे तेल को खरीद सकेंगी। यह ईरान युद्ध की वजह से हो रही दिक्कतों के बीच आपूर्ति बनाए रखने के लिए अल्पावधि उपाय है।
अमेरिका से छूट अब मिली है मगर मार्च के पहले छह दिनों में ही भारत का रशियन-ग्रेड कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़कर 13.7 लाख बैरल प्रतिदिन हो चुका है, जो पूरे फरवरी महीने में रूस से आयात किए गए 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन से करीब 30 फीसदी अधिक है। यह जानकारी ट्रेड डेटा इंटेलिजेंस फर्म कैपलर के ताजा आंकड़ों से मिली है। अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण के एक आदेश के मुताबिक भारत को यह छूट 4 अप्रैल तक के लिए दी गई है।
अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा, ‘वैश्विक बाजार में तेल का प्रवाह जारी रखने के लिए विभाग भारतीय तेल शोधकों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दे रहा है।’
घटनाक्रम से जुड़े दो लोगों ने बताया कि भारतीय तेलशोधक कंपनियों ने अब तक रूसी तेल में वही कार्गो उठाए हैं जिस पर प्रतिबंध नहीं है क्योंकि अमेरिकी आदेश में यह साफ नहीं है कि किस तरह के तेल के आयात की इजाजत मिली है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘तेल कंपनियों की कानूनी टीमें अभी इस मामले को बेहतर ढंग से समझने के लिए आदेश का अध्ययन कर रही हैं।’
नवंबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रूस की दो बड़ी तेल उत्पादकों रोसनेफ्ट और लुकऑयल पर प्रतिबंध लगा दिया था जबकि भारत को रूस से होने वाले कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग 60 फीसदी हिस्सा इन्हीं के जरिये आता था। इसके बाद से कंपनियों ने प्रतिबंधित फर्मों से कच्चा तेल नहीं खरीदा है।
अधिकारी ने कहा कि पश्चिम एशिया में संकट से पहले रूसी तेल लगभग 10 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिल रहा था मगर अब यह अंतर पूरी तरह खत्म हो गया है और भारतीय तेल शोधकों को अब ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। पश्चिम के दबाव के बावजूद फरवरी में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा और भारत के तेलशोधकों ने 10.4 लाख बैरल तेल प्रतिदिन खरीदा।
बेसंट ने कहा कि अमेरिका के इस अल्पावधि उपाय से रूस सरकार को खास वित्तीय लाभ नहीं होगा क्योंकि इसके तहत समुद्र में पहले से फंसा तेल ही खरीदा जा सकता है। बेसंट ने कहा, ‘भारत अमेरिका का महत्त्वपूर्ण साझेदार है और हमें पूरी उम्मीद है कि भारत अमेरिका से तेल की खरीद बढ़ाएगा। यह कामचलाऊ उपाय वैश्विक ऊर्जा को बंधक बनाने के ईरान के प्रयास से पैदा हुए दबाव को कम करेगा।’
विशेषज्ञों का मानना है कि इस छूट के साथ-साथ समुद्र में फंसे तेल के कार्गो को हटाने का काम भी चल रहा है जिससे रूस से भारत का तेल आयात जल्द ही 20 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है।
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कैपलर के लीड विश्लेषक सुमित रिटोलिया ने कहा, ‘छूट मिलने के बाद भारतीय तेल कंपनियां जल्द खरीद शुरू कर सकती हैं। इससे रूस से आने वाला तेल लगभग 16 से 20 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है। मगर यह अल्पावधि उपाय हैं और इससे पश्चिम एशियाई कच्चे तेल की भरपाई नहीं हो सकती।’
मार्च की शुरुआत में लगभग 13 करोड़ बैरल रूसी तेल पानी में तैर रहा है जिसमें से काफी तेल हिंद महासागर, लाल सागर, स्वेज नहर और सिंगापुर के आसपास है। इसे सौदा तय होने पर भारत के बंदरगाहों की ओर भेजा जा सकता है।