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स्काईमेट ने घटाया बारिश का अनुमान

Last Updated- December 12, 2022 | 1:38 AM IST

जून से शुरू दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के चार महीने के सीजन का आखिरी महीना शुरू होने जा रहा है। ऐसे में मौसम पूर्वानुमान जारी करने वाली निजी कंपनी स्काईमेट ने आज अपना 2021 का पूर्वानुमान घटाकर ‘सामान्य से कम’ कर दिया। इसने अप्रैल में इस साल मॉनसून लंबी अवधि के औसत का 103 फीसदी यानी ‘सामान्य’ रहने का पूर्वानुमान जताया था। 
स्काईमेट ने यह भी कहा कि गुजरात और पश्चिमी राजस्थान में सूखे के आसार हैं। इससे गुजरात में मूंगफली और कपास की फसल पर बुरा असर पड़ सकता है। स्काईमेट ने अपने ताजा अपडेट में कहा कि अब 2021 में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून लंबी अवधि के औसत (एलपीए) का 94 फीसदी रहने का अनुमान है, जिसमें चार फीसदी घट-बढ़ हो सकती है। जून से सिंतबर तक का लंबी अवधि का औसत 880.6 मिलीमीटर है।
स्काईमेट ने कहा, ‘कमजोर मॉनसून के कारण पूरे भारत में सीजन के दौरान बारिश की कमी अगस्त के मध्य तक 9 फीसदी थी। सामान्य से कमजोर मॉनसून की दशाओं में अभी तक कोई सुधार नहीं हुआ है।’ इसने कहा कि 2021 के पूरे सीजन के दौरान गुजरात, राजस्थान, ओडिशा, केरल और उत्तर-पूर्वी हिस्से में कम बारिश के आसार हैं। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अब देश के बहुत से हिस्सों में खरीफ फसलों की बुआई लगभग पूरी हो चुकी है और ज्यादातर फसलों का रकबा अपने 2020 के स्तर के नजदीक है, इसलिए मॉनसून में कमी से तिलहन को छोड़कर अन्य फसलों की उपज पर बड़ा असर पडऩे के आसार नहीं हैं।

केयर रेटिंग्स में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘मेरा मानना है कि अब आगे जलाशयों के स्तर को देखा जाना चाहिए क्योंकि पानी के स्तर में चिंताजनक गिरावट आई तो इसका आगामी रबी सीजन की फसलों पर असर पड़ सकता है। लेकिन मेरा मानना है कि सभी फसलों में तिलहन को लेकर ज्यादा चिंता है क्योंकि रकबे में बड़ी गिरावट से इसकी कीमतों में तगड़ा इजाफा होगा।’
उन्होंने कहा कि बुआई के ताजा आंकड़े दर्शाते हैं कि इस साल अनियमित बारिश का सबसे ज्यादा असर कपास और तिलहन के रकबे पर पड़ा है। सबनवीस ही नहीं भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी अपनी पिछली नीतिगत घोषणा में खाद्य कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए मॉनसून में सुधार की जरूरत बताई थी। आरबीआई गवर्नर ने अपने बयान में कहा, ‘दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में सुधार और खरीफ की बुआई में तेजी तथा खाद्यान्न के पर्याप्त भंडारों से आगामी महीनों में खाद्य कीमतों के दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।’

First Published - August 24, 2021 | 1:41 AM IST

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