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नई परियोजनाओं में घटा पूंजीगत व्यय

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Last Updated- December 11, 2022 | 2:25 PM IST

 वैश्विक स्तर पर अनिश्चित माहौल और उच्च उधारी लागत के बीच दूसरी तिमाही में भी नई परियोजनाओं की रफ्तार धीमी पड़ी है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई-सितंबर तिमाही में कुल 3.26 लाख करोड़ रुपये मूल्य की नई परियोजनाएं आईं, जो जून तिमाही की 4.39 लाख करोड़ रुपये मूल्य की परियोजनाओं से कम हैं। मार्च 2022 तिमाही में 8.46 लाख करोड़ रुपये मूल्य की नई परियोजनाएं शुरू की गई थीं।
नई परियोजनाओं में कंपनियों या सरकार की ओर से अतिरिक्त कारखाने या नए पुलों का निर्माण शामिल है। दीर्घावधि की संपत्तियों पर होने वाले खर्च को पूंजीगत व्यय कहा जाता है। पूंजीगत व्यय आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण हो सकता है। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में भी नई परियोजनाओं में 4.4 फीसदी की कमी आई है। पूर्ण हुई परियोजनाओं में भी पिछले साल के मुकाबले 14.7 फीसदी की कमी दर्ज की गई। लंबित परियोजनाओं का मूल्य भी घटा है।
लार्सन ऐंड टुब्रो के वाइस प्रेसिडेंट पी रामकृष्ण ने जुलाई में निवेशकों से बातचीत के दौरान कहा कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही पहली छमाही की तुलना में बेहतर रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा था, ‘हमें उम्मीद है कि केंद्र, राज्यों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों का सार्वजनिक पूंजीगत व्यय चालू वित्त वर्ष में पिछले साल की तुलना में बेहतर रहेगा। दूसरी छमाही में निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय में भी सुधार आने की उम्मीद है।’
रामकृष्ण ने कहा, ‘निजी क्षेत्र में पूंजीगत व्यय, मुख्य रूप से खनिज और धातु क्षेत्रों तक सीमित रहेगा और कुछ हद तक इमारतों और कारखानों के विकास पर निवेश किया जा सकता है। स्टील और अलौह धातु उत्पादक अपनी मौजूदा उत्पादन क्षमता बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।’
स्टैनली समूह के भारत में मुख्य अर्थशास्त्री उपासना छाचरा इक्विटी विश्लेषक गिरीश अछिपलाई और रिदम देसाई में इक्विटी स्ट्रैटजिस्ट सुमित करीवाला की 6 सितंबर को एशिया इनसाइट रिपोर्ट  के अनुसार अगले पांच साल में निवेश दर जीडीपी का 36 फीसदी तक बढ़ सकता है, जो वर्तमान में 31 फीसदी है।  
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘आपूर्ति पक्ष को मांग में सुधार की स्थिति के अनुरूप बनाया जाएगा, जिससे जीडीपी में निवेश की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी। निश्चित तौर पर क्षमता उपयोग दर बढ़ने से घरेलू मांग की स्थिति में तेज सुधार का संकेत मिलता है।’ 
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तिमाही ऑर्डर बुक, इन्वेंट्री और क्षमता उपयोग सर्वेक्षण के अनुसार क्षमता उपयोग स्तर में सुधार हो रहा है। आम तौर पर कंपनियां ऐसे समय में नए कारखानों और उत्पादन क्षमता पर निवेश करती है जब उन्हें लगता है कि मौजूदा क्षमता मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं हो पा रही हैं।
 

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First Published - October 2, 2022 | 9:58 PM IST

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