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महामारी का दबाव मगर सुधार

Last Updated- December 12, 2022 | 3:07 AM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज कहा कि कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर का देश पर गंभीर असर पड़ा, लेकिन नरम पड़ी आर्थिक गतिविधियों में मई के आखिर से तेजी आने लगी है।
आरबीआई गवर्नर ने आंकड़ों में सेंधमारी और साइबर हमलों को अर्थव्यवस्था के समक्ष जोखिम बताया और वैश्विक स्तर पर जिंसों के दाम में तेजी के प्रति भी आगाह किया। दास ने आरबीआई की छमाही वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट की भूमिका में लिखा है, ‘जो आर्थिक पुनरुद्घार 2020-21 की दूसरी छमाही में शुरू हुआ था, उस पर दूसरी लहर के कारण इस वर्ष अप्रैल और मई में काफी प्रतिकूल असर पड़ा। लेकिन जिस तेजी से संक्रमण की दर बढ़ी, उसमें उतनी ही तीव्रता से कमी आई और इसके साथ मई के आखिर तथा जून की शुरुआत से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आनी शुरू हुई है।’ आरबीआई ने यह रिपोर्ट आज जारी की। केंद्रीय बैंक ने रिपोर्ट में कहा कि बैंकों के बहीखाते पर परिसंपत्तियों की गुणवत्ता का दबाव ज्यादा नहीं बढ़ा है और वह सहज दायरे में रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बैंकों की सकल गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) मार्च, 2021 में छह महीने पहले के स्तर पर ही थीं। लेकिन संभावना है कि मार्च, 2022 में एनपीए का अनुपात (कर्ज के) 9.8 फीसदी तक पहुंच सकता है।
दास ने कहा कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर का वित्तीय संस्थानों के लेखा-जोखा और कामकाज पर उतना प्रतिकूल असर नहीं पड़ा, जितनी आशंका थी। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि नियामकीय स्तर पर दी गई राहतों का प्रभाव सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि वित्तीय संस्थानों में पूंजी और नकदी की स्थिति यथोचित मजबूत बनी हुई है और भविष्य में किसी भी झटके को सहने में सक्षम है। दास ने कहा कि वित्तीय प्रणाली अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद के लिए पूरी तरह तैयार है मगर प्राथमिकता वित्तीय स्थिरता को बनाए और संरक्षित रखने की है।
उन्होंने कहा कि घरेलू वित्तीय बाजारों को महामारी के तेजी से कम होने और टीकाकरण अभियान में गति आने से भी बल मिला है। इससे यह उम्मीद बढ़ी है कि पाबंदियों में ढील के साथ अर्थव्यवस्था पटरी पर तेजी से लौटेगी। दास ने कहा, ‘…हालांकि पुनरुद्घार जारी है मगर नए जोखिम भी उत्पन्न हुए हैं। इसमें भविष्य में आने वाली महामारी की लहर की आशंका से शुरुआती चरण के पुनरुद्घार को जोखिम, अंतरराष्ट्रीय बाजार में जिंसों के दाम और मुद्रास्फीति दबाव, अनिश्चितता के बीच वैश्विक घटनाओं का असर तथा आंकड़ों में सेंधमारी एवं साइबर हमले के बढ़ते मामले शामिल हैं।’ गवर्नर ने कहा कि सतत नीतिगत समर्थन के साथ वित्तीय संस्थानों में पूंजी और नकदी की मजबूत स्थिति जोखिम से निपटने के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रणाली अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए उपयुक्त परिवेश तैयार करने में अगुआ हो सकती हैं। मजबूत पूंजी स्थिति, बेहतर संचालन व्यवस्था और वित्तीय मध्यस्थता में दक्षता इसके लिए जरूरी बुनियाद हैं।

First Published - July 1, 2021 | 11:33 PM IST

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