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आयकर रिटर्न में बड़े लेनदेन की जानकारी देने की जरूरत नहीं

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Last Updated- December 15, 2022 | 3:21 AM IST

करदाताओं को अपने आयकर रिटर्न फार्म में बड़े मूल्य के लेनदेन के बारे में जानकारी नहीं देनी होगी। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। मामले से जुड़े अधिकारिक सूत्रों ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘आयकर रिटर्न फॉर्म में बदलाव का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।’
अधिकारियों से इस संबंध में आई कुछ रिपोर्टों के बारे में पूछा गया था। इन रिपोर्टों के मुताबिक 20,000 रुपये से अधिक के होटल भुगतान, 50,000 रुपये से अधिक के जीवन बीमा प्रीमियम भुगतान, 20,000 रुपये से अधिक स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम भुगतान, स्कूल या कॉलेज को साल में एक लाख रुपये से अधिक का अनुदान इत्यादि जैसे वित्तीय लेनदेन की जानकारी देने के लिए रिटर्न फार्म का विस्तार किए जाने का प्रस्ताव है।
सूत्रों ने कहा कि वित्तीय लेनदेन के बारे में जानकारी का विस्तार किए जाने का मतलब होगा कि आयकर विभाग को इस प्रकार के ऊंचे मूल्य वाले लेनदेन की जानकारी वित्तीय संस्थान देंगे। आयकर कानून के हिसाब से केवल तीसरा पक्ष ही इस तरह के लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को देता है। आयकर विभाग उस जानकारी के आधार पर यह जांच करता है कि अमुक व्यक्ति ने अपना कर सही से चुकाया है या नहीं। इस जानकारी का उपयोग ईमानदार करदाताओं की जांच के लिए नहीं होता।
अधिकारी ने कहा, ‘आयकर रिटर्न फॉर्म में किसी तरह के बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं है। करदाता को आयकर रिटर्न फार्म में उसके ऊंचे मूल्य के लेनदेन की जानकारी देने की आवश्यकता नहीं है।’
अधिकारियों ने कहा कि अधिक मूल्य के लेनदेन के माध्यम से करदाताओं की पहचान करना एक बिना दखल वाली प्रक्रिया है। इसके तहत ऐसे लोगों की पहचान की जाती है जो कई तरह का सामान खरीदने में बड़ा धन खर्च करते हैं और उसके बावजूद आयकर रिटर्न दाखिल नहीं करते या फिर अपनी सालाना आय 2.5 लाख रुपए से कम दिखाते हैं।

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First Published - August 18, 2020 | 12:12 AM IST

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