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निजी निवेश बढ़ाने के लिए और उपायों की दरकार: राजीव कुमार

Last Updated- December 14, 2022 | 8:46 PM IST

बीएस बातचीत

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने इंदिवजल धस्माना को बताया कि जीडीपी वृद्धि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में मामूली ऋणात्मक और चौथी तिमाही में धनात्मक रहने की संभावना है। वह कहते हैं कि पूरे वर्ष में संकुचन 9 फीसदी के अनुमानों से कम रहने के आसार हैं। उन्होंने किसानों के विरोध-प्रदर्शन, विनिर्माण, उपभोक्ता मांग, राजकोषीय घाटे आदि पर बातचीत की। बातचीत के अंश :

दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों के बाद आपने सुधार की रफ्तार को सुखद आश्चर्य बताया है, लेकिन यह दूसरी छमाही में बनी रहेगी?
मैं ऐसा मानता हूं। आर्थिक वृद्धि तीसरी तिमाही में मामूली ऋणात्मक और चौथी तिमाही में धनात्मक रहने की संभावना है। पूरे वित्त वर्ष 2021-22 में संकुचन 9 फीसदी के अनुमानों से कम रहेगा। अगले वित्त वर्ष में वृद्धि दो अंक में रहेगी।

आपके मुताबिक जीडीपी कितना सिकुड़ेेगा? 
मैं कोविड-19 की अनिश्चितता को मद्देनजर रखते हुए इस समय कोई सटीक अनुमान नहीं जता सकता हूं।
 
क्या आपको लगता है कि कोविड के मामलों से दूसरी तिमाही का परिदृश्य प्रभावित हो रहा है?
मेरी विशेषज्ञों से जो बात हुई है, उससे ऐसा लगता है कि मामले सितंबर में ही अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंच चुके हैं। हालांकि ऐसा लगता है कि कुछ अनिश्चितताएं हैं।

जीडीपी आंकड़ों में विनिर्माण का बेहतर प्रदर्शन रहा है। हालांकि यह चार तिमाहियों में संचुकन के बाद 0.6 फीसदी बढ़ा है। क्या इसमें किसी तरह का सुधार है या यह महज आधार प्रभाव ही है?
यह दोनों है। इसमें आधार प्रभाव का भी योगदान है क्योंकि विनिर्माण में संकुचन पिछले साल की दूसरी तिमाही से शुरू हुआ था। लेकिन इसमें विनिर्माण क्षेत्र के प्रदर्शन का भी योगदान है। इसमें वित्त वर्ष 2021 की पहली तिमाही में 39.3 फीसदी गिरावट आई थी और यह दूसरी तिमाही में धनात्मक वृद्धि के दायरे में पहुंच गया है।

कृषि एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जिसमें दोनों तिमाहियों में वृद्धि हुई है। लेकिन किसान कृषि कानूनों को लेकर आक्रोशित हैं? क्या इससे आगामी महीनों में कृषि वृद्धि प्रभावित होगी?
मुझे नहीं लगता कि किसान आक्रोशित हैं। किसानों का केवल एक छोटा समूह विरोध कर रहा है। यह पूरे देश के किसानों का विरोध नहीं है। यह राजनीतिक है। कृषि कानून किसानों को चोट पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि उनके भविष्य को संवारने के लिए बनाए गए हैं। मुझे नहीं लगता कि किसानों के एक छोटे समूह के विरोध-प्रदर्शन से कृषि वृद्धि पर असर पड़ेगा।

लेकिन क्या इन विधेयकों के प्रावधानों के बारे में किसानों को उचित जानकारी नहीं दी गई?
नहीं, यह धारणा सही नहीं है। किसानों के साथ काफी चर्चा हुई थी। नीति आयोग में मेरे सहकर्मी रमेश चंद ने खुद कृषि अधिनियमों पर किसानों से बात की थी। विधेयक बनाते समय किसानों के सुझावों को ध्यान में रखा गया था।

दूसरी तिमाही में सकल स्थायी पूंजी निर्माण संकुचन 7.3 फीसदी के ऊंचे स्तर पर था। क्या आपको लगता है कि यह रुझान दूसरी छमाही में पलटेगा?
हां, यह एक चिंता है। ऋण वृद्धि तेज नहीं हो रही है। सरकार ने निवेश बढ़ाने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं। मेरा मानना है कि निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए और कदम उठाने के बारे में विचार किया जाना चाहिए।

दूसरी तिमाही में निजी अंतिम उपभोग व्यय में संकुचन भी 11.3 फीसदी के ऊंचे स्तर पर था। दूसरी तिमाही के बाद हाल में उपभोक्ता व्यय में बढ़ोतरी त्योहारों की वजह से हुई है। क्या यह त्योहारी महीनों के बाद बरकरार रहेगी?
आप देख रहे हैं कि वाहन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उपभोक्ता काफी खर्च कर रहे हैं। यह निश्चित रूप से त्योहारी महीनों के बाद बनी रहेगी। जैसा कि मैंने कहा है कि चौथी तिमाही में जीडीपी में धनात्मक वृद्धि दिखेगी।

बजट बनाने की प्रक्रिया चल रही है। आप आर्थिक मंदी को मद्देनजर रखते हुए वित्त मंत्री को क्या सलाह देंगे?
मैं इस पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी नहीं करूंगा।

क्या आपको लगता है कि सरकार अगले साल से राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की राह पर लौटने में सफल होगी या अब इस रोडमैप को बदलना होगा?
यह निश्चित रूप से इस समय सबसे महत्त्वपूर्ण मुद्दा नहीं है। सबसे अहम मुद्दा आर्थिक वृद्धि को उबारना और इसे 2021-22 में दो अंकों में ले जाना और आगे बरकरार रखना है। मैं इस बात पर जोर दूंगा कि इस समय राजकोषीय घाटा मुख्य चिंता नहीं है।

First Published - November 29, 2020 | 11:26 PM IST

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