facebookmetapixel
Q3 Preview: घरेलू बिक्री बढ़ी, दवा कंपनियों की Q3 आमदनी में 8-11% तक उछालUPI को ग्लोबल बनाने की जरूरत, छोटे मर्चेंट्स के लिए सेटलमेंट को सही करने की जरूरत: Pay10 के फाउंडरवर्कप्लेस पर तेजी से बढ़ रहा है AI का इस्तेमाल, लेकिन ट्रेनिंग में पीछे छूट रही हैं कंपनियां: रिपोर्टMauni Amavasya 2026: प्रयागराज में संगम पर उमड़ी करोड़ों की श्रद्धालुओं की भीड़, शंकराचार्य विवाद में फंसेदुनिया भर में बढ़ रही भारतीय दवाओं की मांग, नाइजीरिया और ब्राजील बने नए बड़े ठिकानेMarket Outlook: इस हफ्ते शेयर बाजार की चाल तय करेंगे Q3 नतीजे और ग्लोबल संकेतMCap: मार्केट में SBI और Infosys का जलवा, Reliance समेत कई कंपनियों की वैल्यू में गिरावटनेविल टाटा की सर रतन टाटा ट्रस्ट में नियुक्ति की कोशिश फिर फेल, बोर्ड मीटिंग क्वोरम पूरा न होने से रद्दत्योहारी रफ्तार से दौड़ा ऑटो सेक्टर, Q3FY26 में कमाई के नए रिकॉर्ड के संकेतFPIs का बिकवाली दौर जारी, जनवरी में निकाले ₹22,530 करोड़

Manufacturing PMI: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार हुई सुस्त, सितंबर में 8 माह के निचले स्तर पर पहुंची

मौसमी रूप से समायोजित ‘एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण क्रय प्रबंधक सूचकांक’ (पीएमआई) सितम्बर में 56.5 रहा, जो अगस्त में 57.5 था।

Last Updated- October 01, 2024 | 1:25 PM IST
December Manufacturing PMI

Manufacturing PMI: देश के मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि दर सितंबर में आठ महीने के निचले स्तर पर आ गई। मैनुफेक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि में सुस्ती का कारण फैक्ट्री उत्पादन और बिक्री में नरम विस्तार था, जो वर्ष की शुरुआत के बाद से सितंबर में सबसे कमजोर स्तर पर रहा। मंगलवार को जारी एक मासिक सर्वे में यह जानकारी दी गई।

मौसमी रूप से समायोजित ‘एचएसबीसी इंडिया मैन्युफेक्चरिंग पर्चेसिंग मैनेजर इंडेक्स’ (PMI) सितम्बर में 56.5 रहा, जो अगस्त में 57.5 था। पीएमआई के तहत 50 से ऊपर इंडेक्स होने का मतलब उत्पादन गतिविधियों में विस्तार है जबकि 50 से नीचे का आंकड़ा गिरावट को दर्शाता है।

सर्वेक्षण के अनुसार, कारोबारी आत्मविश्वास मोटे तौर पर इसके लॉन्ग टर्म एवरेज के अनुरूप रहा। कीमतों के मोर्चे पर, वस्तु उत्पादकों को सितम्बर के दौरान इनपुट लागत और बिक्री शुल्क में मध्यम वृद्धि हुई है।

सर्वे में कहा गया, “सितंबर के आंकड़ों से पता चला कि पूरे भारत में विनिर्माण वृद्धि को हल्का झटका लगा है। लगातार तीसरे महीने फैक्टरी उत्पादन और बिक्री में विस्तार की दर में गिरावट आई है, जो कि साल के अंत के बाद से सबसे कमजोर स्तर पर है। अंतर्राष्ट्रीय ऑर्डर में पिछले डेढ़ साल में सबसे धीमी गति से वृद्धि हुई है।”

एचएसबीसी के मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि गर्मी के महीनों के दौरान देखी गई मजबूत वृद्धि के बाद सितंबर में भारत के विनिर्माण क्षेत्र की गति नरम हो गई। ऐसा इसलिए क्योंकि उत्पादन और नए ऑर्डर धीमी गति से बढ़े।”

First Published - October 1, 2024 | 1:17 PM IST

संबंधित पोस्ट