न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ प्रधानमंत्री मोदी | फाइल फोटो
भारत न्यूजीलैंड को 20 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) करने में विफल रहने की स्थिति में ‘छूट अवधि’ या ‘अतिरिक्त समय’ देने के मामले में निगरानी समिति का गठन करेगा। भारत और न्यूजीलैंड ने 22 दिसंबर को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत पूरी होने की घोषणा की थी। इस बातचीत के तहत न्यूजीलैंड ने भारत में अगले 15 वर्षों के दौरान 20 अरब डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है।
न्यूजीलैंड की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश समिति एफटीए के अंतर्गत निवेश नहीं होने की स्थिति में ‘पुनर्संतुलन तंत्र’ के तहत काम करेगी। ऐसे ही उपबंध यूरोपियन मुक्त व्यापार एसोसिएशन (ईएफटीए) के साथ किए गए हैं।
भारत-ईएफटीए व्यापार समझौता यूरोप के देशों को निवेश की प्रतिबद्धता पूरी नहीं करने की स्थिति में तीन वर्ष का अतिरिक्त समय की अनुमति देता है। लेकिन ऐसी समयावधि न्यूजीलैंड के साथ समझौते के मामले में नहीं दी गई है।
सरकारी अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘15 वर्ष की अवधि में एफडीआई की प्रतिबद्धता निवेश की मात्रा या किसी अन्य महत्त्वपूर्ण कारण कारक से पूरा नहीं होने की स्थिति में इस समिति के पास उचित दंड या अतिरिक्त समय मुहैया कराने का अधिकार होगा। इस बारे में निर्णय वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व वाली समिति लेगी।’ फिलहाल समझौते के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
अभी भारत में जनवरी 2000 से सितंबर 2025 में न्यूजीलैंड का कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 882.4 लाख डॉलर .था। अब तक कंपनियों ने विनिर्माण और अवसंरचना से संबंधित क्षेत्रों में निवेश करने में स्पष्ट रुचि दिखाई है।