अर्थव्यवस्था

India UAE Trade: भारत-यूएई व्यापार 100 अरब डॉलर पार, फिर भी घाटा क्यों बढ़ रहा है?

सीईपीए के बाद व्यापार बढ़ा, लेकिन आयात तेज़ होने से भारत का घाटा भी बढ़ा

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यश कुमार सिंघल   
Last Updated- January 23, 2026 | 8:43 AM IST

हाल ही में कुछ घंटों के लिए भारत दौरे पर आए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। खासकर 2022 में व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) के कार्यान्वयन के बाद यह बैठक हुई। दोनों देशों के बीच व्यापार वित्त वर्ष 25 में 100 अरब डॉलर को पार कर गया। अब हाल की बैठक में राष्ट्रपति जायद और प्रधानमंत्री मोदी ने व्यापक चर्चा के बाद 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 200 अरब डॉलर करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़ा तो है, लेकिन यह यूएई के पक्ष में झुका हुआ है। वित्त वर्ष 25 में यूएई के साथ भारत का व्यापार घाटा लगभग 27 अरब डॉलर रहा। यूएई को भारत का निर्यात वित्त वर्ष 15 में 33 अरब डॉलर से वित्त वर्ष 25 में 36.64 अरब डॉलर पर लगभग स्थिर रहा। लेकिन इस अवधि में यूएई से भारत का आयात 26.14 अरब डॉलर से दोगुना होकर 63.4 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया।

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और अबू धाबी नैशनल ऑयल कंपनी गैस (एडीएनओसी गैस) के बीच बिक्री और खरीद समझौता हुआ है, जिसमें एचपीसीएल एडीएनओसी गैस से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) खरीदेगा। पिछले दशक में यूएई से भारत के कुल आयात में ऊर्जा आयात की हिस्सेदारी कम हुई है।

वित्त वर्ष 26 (अप्रैल-नवंबर) में यूएई को भारत से रत्न और आभूषण, रेडीमेड कपड़े, वस्त्र, ऑटो उपकरण, चमड़ा उत्पाद, कांच, सिरेमिक और सीमेंट के निर्यात में वृद्धि हुई है, जो वित्त वर्ष 25 (अप्रैल-नवंबर) की तुलना में अधिक है। इसका मतलब है कि कारोबार में विविधीकरण प्रयासों के बीच खासकर डॉनल्ड टैरिफ के बाद यूएई को भारत का निर्यात बढ़ा है।

First Published : January 23, 2026 | 8:43 AM IST