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Covid के कारण भारत ने दो भूटान के बराबर टैक्स पेयर खोए

Last Updated- February 20, 2023 | 1:25 AM IST
Net direct tax collection rises 7%

कोविड महामारी के कारण हुई आर्थिक तबाही के बाद भारत में आयकरदाताओं की संख्या कम हो गई। करदाताओं की सूची से बाहर होने वाले लोगों की संख्या 20 लाख से अधिक थी जो भूटान की कुल आबादी के मुकाबले 2.6 गुना है।

कर निर्धारण वर्ष 2021-22 में 6.3 करोड़ लोग करदाता थे, जबकि 2020 में 6.5 करोड़ लोग आयकर देते थे। विश्व बैंक के 2021 के आंकड़ों के अनुसार भूटान की आबादी 77 लाख है।

कर निर्धारण वर्ष मोटे तौर पर पिछले वित्त वर्ष से मेल खाता है। 13 फरवरी को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में यह आंकड़ा सामने आया था। इसमें कहा गया कि वित्त वर्ष 22 के लिए आंकड़ा संकलन के अधीन था क्योंकि रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर, 2022 थी।

व्यक्तिगत करदाताओं की वृद्धि से एक अस्थिर रुझान का पता चलता है, लेकिन कुछ संकेत कोविड-19 महामारी से पहले भी दिखे थे।
निर्धारण वर्ष 2020 में वृद्धि दर घटकर कर 10.7 फीसदी रह गई जो कर निर्धारण वर्ष 2019 में 18.7 फीसदी थी। कर निर्धारण वर्ष 2021 के दौरान इसमें 3.7 फीसदी की ऋणात्मक वृद्धि दिखी है। इसके अगले साल 0.6 फीसदी की वृद्धि दिखी थी।

आंकड़ों में आयवर्ग का भी उल्लेख था। शून्य से पांच लाख तक के आयवर्ग में करदाताओं की संख्या कर निर्धारण वर्ष 2022 में घटकर 4.12 करोड़ रह गई जो कर निर्धारण वर्ष 2020 में 4.99 करोड़ थी। करदाताओं की संख्या में 87 लाख की इस गिरावट का भरपाई उच्च श्रेणियों में करदाताओं की संख्या में हुई वृद्धि से हो गई। पांच से दस लाख के आयवर्ग में करदाताओं की संख्या 1.06 करोड़ से बढ़कर 1.41 करोड़ हो गई। इस प्रकार इसमें 34 लाख लोगों की बढ़त हुई।

इसी अवधि के दौरान दस लाख से अधिक के आयवर्ग में करदाताओं की संख्या 49 लाख से बढ़कर 81 लाख हो गई। इस प्रकार इसमें 32 लाख की वृद्धि हुई। उच्च आय वाले श्रेणी में वृद्धि निम्नतम-आय वर्ग में होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं थी, जो 20 लाख से कम थी।

इस गिरावट के बावजूद व्यक्तिगत करों के रूप में एकत्रित धन की मात्रा में वृद्धि हुई है। यह वित्त वर्ष के संदर्भ में दिया गया है।
वित्त वर्ष 2022 में 6.7 लाख करोड़ रुपये का आयकर संग्रह हुआ, जबकि वित्त वर्ष 2019 में यह 4.6 लाख करोड़ रुपये ही था। कॉरपोरेट कर की धीमी वृद्धि हुई। इसी अवधि के दौरान यह 6.6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 7.1 लाख करोड़ रुपये हो गया।

First Published - February 20, 2023 | 1:25 AM IST

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