facebookmetapixel
Advertisement
सरकार लाई नया Tax Amendment Bill, गिफ्ट सिटी, विदेशी निवेश कोष और डेटा सेंटर को मिलेंगी टैक्स में छूटManufacturing PMI जुलाई में पांच साल के निचले स्तर पर, कमजोर मांग और बिक्री से सुस्त पड़ा विनिर्माण क्षेत्रFCNR(B) जमा बढ़ने से बैंकों की CD पर निर्भरता घटी, जुलाई में 95 हजार करोड़ रुपये जुटाएकांग्रेस ने मुझे रोका नहीं होता तो मैं भारत का मूल सुधारक होता, 1991 के बजट भाषण में मेरे बजट के कई अंश: यशवंत सिन्हासड़क हादसे रोकने के लिए सरकार का बड़ा कदम, नए दोपहिया और चारपहिया वाहनों में V2V सिस्टम होगा जरूरीटैक्स दबाव के बाद आईटीसी में सुधार के संकेत, शेयर 4% चढ़कर पहुंचा ₹292.50छात्र प्रदर्शन मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना रुख किया साफ, गंभीर अपराध छोड़ बाकी छात्रों को मिलेगी राहतउपचुनाव में भाजपा को बड़ा झटका, बांकीपुर में प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत, दतिया भी नहीं जीत सकी BJPअल-नीनो और कमजोर मॉनसून के बीच पानी पर बढ़ी सियासत, कावेरी से महानदी तक फिर गरमाए राज्यों के विवादक्लोजिंग ऑक्शन से बाजार हैरान, सेंसेक्स 544 अंक चढ़ा तो निफ्टी में 391 अंकों की बढ़त

टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं वाली फर्मों की सप्लाई चेन में सुधार

Advertisement

कोविड से पहले वाले स्तर पर लौटी सप्लाई, वाहन कंपनियों के मामले में अब भी सुधार बाकी

Last Updated- February 15, 2023 | 9:17 PM IST
निजी बंदरगाहों पर ढुलाई तेजी से बढ़ी, सरकारी बंदरगाहों की वृद्धि दर कम , Private, state ports' growth outpaces central counterparts till Q3 FY24

कलपुर्जों के लिए चीन पर निर्भर रहने वाली वाहन और टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं की कंपनियां (Automotive and consumer durables companies) को चीन द्वारा अपनी जीरो कोविड नीति खत्म किए जाने के बाद सप्लाई चेन की बाधाएं कम होती दिख रही हैं।

असल में टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं की फर्मों ने पिछले दो साल के दौरान जिन बाधाओं का सामना किया है, वे बाधाएं न केवल कम हुई हैं, ब​ल्कि सप्लाई भी कोविड से पहले वाले स्तर पर लौट आई है। हालांकि वाहन क्षेत्र के मामले में अब भी सुधार बाकी है।

वै​श्विक महामारी से पहले टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं की कंपनियों के कजपुर्जे 20 से 30 दिनों में भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचते थे। लेकिन महामारी के दौरान इन कलपुर्जों को बंदरगाहों तक पहुंचने में 45 दिन से अधिक का समय लगता था। अब वह स्थिति लौटकर महामारी से पहले वाली प्रवृत्ति में आ गई है।

आपूर्ति भले ही तेज हो गई हो, लेकिन कंपनियां कमोडिटी की कीमतों पर बारीकी से नजर रख रही हैं। उन्हें इस बात का डर है कि ये कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं क्योंकि चीन की अर्थव्यवस्था खुल रही है और इसके साथ ही धातुओं की मांग और दामों में इजाफा हो रहा है।

टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं की फर्मों के मामले में ​कलपुर्जों के दामों में पहले ही तेजी है, खास तौर पर टेलीविजन पैनल के दाम। किसी टेलीविजन पैनल में 60 प्रतिशत का योगदान करने वाले ओपन सेल के दामों में पांच से सात प्रतिशत का इजाफा हुआ है। कुछ अन्य कमोडिटी के दामों में भी इजाफा हो रहा है।

कोडक ब्रांड की लाइसेंसधारक सुपर प्लास्ट्रोनिक्स के निदेशक (director) और मुख्य कार्या​धिकारी (CEO) अवनीत सिंह मारवाह ने कहा कि प्रतिबंधों में ढील दी गई है और कारखाने पूरे जोरों पर चल रहे हैं। अब आपूर्ति श्रृंखला कोविड से पहले वाले स्तर पर लौट आई है।

गोदरेज ऐंड बॉयस की शाखा गोदरेज एप्लायंसेज के कारोबार प्रमुख और कार्यकारी उपाध्यक्ष कमल नंदी भी मारवाह के नजरिये से इत्तेफाक रखते हैं। उन्होंने कहा कि हम अपने उत्पादन पर आधारित कलपुर्जों का फिर से स्टॉक करने लगे हैं क्योंकि सप्लाई चेन की दिक्कतें अब मौजूद नहीं हैं।

मारवाह ने कहा कि हालांकि कंपनी उसी तरह अ​धिक स्तर का स्टॉक रख रही है, जैसा महामारी के दौरान किया गया था, लेकिन हालात बदलने के मामले में अगली तिमाही में स्टॉक कम हो जाएगा।

वाहन क्षेत्र

वाहन क्षेत्र में भी कंपनियां कमोडिटी की कीमतों को लेकर सतर्क हैं। महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के कार्यकारी निदेशक राजेश जेजुरिकर ने तीसरी तिमाही के परिणाम की बैठक में कहा है कि जिसों के मूल्य निर्धारण का परिदृश्य अनि​श्चित है। फिलहाल हम जिस बात को देखने का इंतजार कर रहे हैं, वह यह है कि चीन के खुलने के बाद क्या होता है।

उन्होंने कहा कि यदि चीन की अर्थव्यवस्था वास्तव में आगे बढ़ती है, तो मांग के लिहाज से यह वैश्विक वातावरण को पूरी तरह से बदल सकती है।

उन्होंने कहा कि हमने भारत सहित कई देशों में यह देखा है कि किसी व्यापक लॉकडाउन से बाहर आना उत्पादन, मांग, खपत वगैरह के मामले में एक बहुत बड़ी शुरुआत होती है। चीन में शायद सबसे लंबा लॉकडाउन रहा है। तो, अब देखने वाली बात यह है कि चीन की कहानी का क्या रहती है। यूरोपीय संघ और अमेरिका वगैरह में मंदी से इसकी भरपाई हो सकती है। इसलिए यह कहना बहुत मुश्किल है कि जिंसों की कीमतों के मामले में क्या होगा। जिंसों की कीमतों में नरमी की वजह से तीसरी तिमाही में मार्जिन में सुधार हुआ है।

Advertisement
First Published - February 15, 2023 | 9:17 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement