भारत ने वित्त वर्ष 2022-23 को आधार वर्ष बनाकर आज नई राष्ट्रीय आय श्रृंखला जारी। इसके आधार पर चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था की वास्तविक वृद्धि दर 7.6 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है जो बीते तीन वित्त वर्ष में सबसे अधिक वृद्धि है। मगर इसने नॉमिनल जीडीपी वृद्धि आधार को कम कर दिया है। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र के दमदार प्रदर्शन से जीडीपी वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही, जो दूसरे अग्रिम अनुमान को भी दर्शती है।
आधार वर्ष 2011-12 के साथ पहले अग्रिम अनुमान में चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि 8.2 फीसदी और पूरे वित्त वर्ष के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था। नई श्रृंखला में नए सेगमेंट और आंकड़े शामिल किए गए हैं, जिसमें माल एवं सेवा कर का आंकड़ा भी शामिल है।
आंकड़े जारी करने के बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में अनुमानित वृद्धि दर 7.3 फीसदी या इससे अधिक होनी चाहिए ताकि पूरे साल की जीडीपी वृद्धि दर 7.6 फीसदी तक पहुंच सके।
हालांकि नई श्रृंखला में नॉमिनल जीडीपी वृद्धि को पहले अग्रिम अनुमान की तुलना में अप्रत्याशित रूप से कम कर दिया गया। बजट में वित्त वर्ष 2026 के लिए नॉमिनल जीडीपी 357.13 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था जबकि नई श्रृंखला के आधार पर इसके 345.47 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। वैसे, वित्त वर्ष 2026 के लिए नॉमिनल जीडीपी वृद्धि अनुमान को बढ़ाकर 8.6 फीसदी कर दिया गया जो पहले 8 फीसदी था।
कम नॉमिनल जीडीपी की वजह से वित्त वर्ष 2026 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.5 फीसदी हो गया है जबकि बजट में इसके 4.4 फीसदी (संशोधित अनुमान) रहने का अनुमान लगाया गया था।
बैंक ऑफ अमेरिका ने एक रिसर्च नोट में कहा, ‘नॉमिनल जीडीपी के आधार को ज्यादा संशोधित किए जाने की संभावना थी लेकिन इसके घटाए जाने से राजकोषीय घाटा और ऋण अनुमान थोड़े बढ़ सकते हैं।’
नागेश्वरन ने कहा कि राजकोषीय घाटा सही रास्ते पर है। उन्होंने आगे कहा, ‘जीडीपी में बदलाव से इस समय केंद्र सरकार की राजकोषीय स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा।’ नई श्रृंखला में विभिन्न क्षेत्र के भार में भी बदलाव हुआ है। कृषि और उससे संबंधित क्षेत्र तथा विनिर्माण का भार ज्यादा है जबकि सेवाओं का हिस्सा पहले की तुलना में कम रहने का अनुमान है।
तीसरी तिमाही में जीडीपी में मजबूत वृद्धि मुख्य रूप से विनिर्माण क्षेत्र में सुधार के कारण हुई। पुराने आंकड़ों में विनिर्माण वृद्धि औसतन 6.3 फीसदी रही जो पिछले रुझान से उलट है।
डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा, ‘इस तिमाही के दौरान औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के मजबूत प्रदर्शन के कारण बेहतर विनिर्माण वृद्धि की उम्मीद थी और संशोधित जीडीपी आंकड़े बताते हैं कि यह क्षेत्र पहले अनुमान से भी बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। यह दर्शाता है कि पूरे साल विनिर्माण क्षेत्र की गति पहले के अनुमान से अधिक रही है।’
सेवा क्षेत्र में वृद्धि थोड़ी बढ़कर 9.5 फीसदी हो गई। इसमें व्यापार, होटल, परिवहन, संचार और प्रसारण के साथ वित्त, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं में क्रमिक सुधार हुआ और ये क्षेत्र दो अंकों की वृद्धि दर्ज कर रहे हैं। निर्माण और सार्वजनिक प्रशासन में वृद्धि धीमी रही क्योंकि इस तिमाही में सरकारी पूंजीगत व्यय में तेज कमी आई जबकि राजस्व व्यय कम बना रहा। कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की वृद्धि दर तीसरी तिमाही में अच्छे मॉनसून के बावजूद 1.4 फीसदी पर रही।