दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में गिरावट के कारण राजकोषीय घाटा थोड़ा बढ़ गया है और ऋण अनुपात भी थोड़ा अधिक हो गया है। लिहाजा आने वाले समय में अधिक तीव्र समेकन की आवश्यकता होने की उम्मीद है। दरअसल, 345.47 लाख करोड़ रुपये के नॉमिनल जीडीपी को आधार मानने से वित्त वर्ष 2026 के लिए राजकोषीय घाटा 10 आधार अंक बढ़कर 4.5 प्रतिशत हो जाएगा और ऋण से जीडीपी अनुपात लगभग 58 प्रतिशत होगा।
वित्त वर्ष 2027 में नॉमिनल जीडीपी में 10 प्रतिशत की वृद्धि मानकर अगले वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य भी बजट में अनुमानित 4.3 प्रतिशत के मुकाबले थोड़ा बढ़कर 4.46 प्रतिशत हो जाएगा।
आईसीआरए की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘इसका असर ऋण समेकन की योजना पर भी पड़ेगा। कारण यह है कि वित्त वर्ष 2027 के लिए ऋण से जीडीपी अनुपात 1.9 प्रतिशत अंक बढ़कर 57.5 प्रतिशत हो गया है जबकि बजट में 55.6 प्रतिशत का लक्ष्य रखा गया था। इससे वित्त वर्ष 2031 तक समेकन का मार्ग पहले के अनुमानों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक कठिन हो जाएगा।’
सरकार ने वित्त वर्ष 2027 से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात में ऋण के नए राजकोषीय आधार के लिए बजट तैयार किया है। इसमें नॉमिनल जीडीपी में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर मानते हुए वित्त वर्ष 2027 में इसे केवल 50 आधार अंकों की कमी के साथ 55.6 प्रतिशत तक लाने का प्रावधान किया गया है जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह 56.1 प्रतिशत था।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनाविस ने कहा, ‘हम वित्त वर्ष 2027 में 7 से 7.5 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद करते हैं। हमें नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर के आधार पर राजकोषीय आंकड़ों में कोई खास बदलाव की उम्मीद नहीं है…रीयल और नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दरों के बीच का अंतर वित्त वर्ष 2026 की तुलना में घटकर मात्र 1 प्रतिशत रह गया है और वित्त वर्ष 2027 में बढ़कर 3 प्रतिशत हो जाएगा।’
राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (एनएसओ) ने शुक्रवार को 2022-23 को आधार वर्ष मानकर जीडीपी और सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) के नए आंकड़े जारी किए। इन आंकड़ों में उत्पादन क्षेत्रों व मांग खंडों के सापेक्ष भार में बदलाव, अतिरिक्त व अधिक विस्तृत आंकड़ों का उपयोग और अनौपचारिक क्षेत्र व एमसीए डेटाबेस में शामिल नहीं होने वाली कंपनियों की आर्थिक गतिविधियों को मापने के बेहतर तरीकों को शामिल किया गया है।
ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने कहा, ‘इन बदलावों से आईएमएफ द्वारा किसी देश के राष्ट्रीय आय आंकड़ों की विश्वसनीयता का आकलन करने के ढांचे के अनुसार एनएसओ आंकड़ों की भारत की रेटिंग ‘सी’ श्रेणी से बेहतर श्रेणी में आ जाएगी।’
लेखा महानियंत्रक के शुक्रवार को जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल-जनवरी अवधि के लिए सरकार का राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 63 प्रतिशत रहा जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 74.5 प्रतिशत था।
राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2025 की अप्रैल-जनवरी अवधि में 11.69 लाख करोड़ रुपये से घटकर वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल-जनवरी अवधि में 9.8 लाख करोड़ रुपये रह गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में 16 प्रतिशत की कमी दर्शाता है।
वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल-जनवरी अवधि के लिए पूंजीगत व्यय बजट अनुमान का 77 प्रतिशत रहा जो पिछले वर्ष के 74.4 प्रतिशत से अधिक है। इस वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियां बजट अनुमान का 89 प्रतिशत रहीं जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 49.5 प्रतिशत थीं।