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Micron का प्लांट 28 फरवरी से होगा चालू, पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन; चिप उत्पादन में बढ़ेगा भारत का रुतबा

माइक्रॉन के पास दुनिया भर में विभिन्न देशों में 13 प्रमुख विनिर्माण साइट हैं, जिनमें अमेरिका, चीन, सिंगापुर, ताइवान, मलेशिया, जापान आदि शामिल हैं

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सुरजीत दास गुप्ता   
Last Updated- February 27, 2026 | 10:52 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के साणंद में शनिवार को माइक्रॉन टेक्नॉलजी के कारखाने का उद्घाटन करेंगे। इस एटीएमपी (असेंबली, टेस्ट, मार्किंग और पैकिंग) कारखाने से भारत को सेमीकंडक्टर की दुनिया में अपना कद ऊंचा करने का मौका मिलेगा। माइक्रॉन टेक्नॉलजी 37.4 अरब अमेरिकी डॉलर की मेमोरी सॉल्यूशंस की दिग्गज कंपनी है और दुनिया की ऐसी शीर्ष तीन कंपनियों में भी शामिल है। गुजरात के साणंद में पूर्ण संचालन के बाद यह फैक्टरी माइक्रोन के वैश्विक उत्पादन का 10 प्रतिशत हिस्सा बनेगी। यह घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के लिए भी काम करेगी।

माइक्रॉन के पास दुनिया भर में विभिन्न देशों में 13 प्रमुख विनिर्माण साइट हैं, जिनमें अमेरिका, चीन, सिंगापुर, ताइवान, मलेशिया, जापान आदि शामिल हैं। अब भारत भी इस विशेष समूह में शामिल होगा।

इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, ‘भारत में पूर्ण क्षमता वाले एटीएमपी संयंत्र की माइक्रॉन के वैश्विक उत्पादन में10 फीसदी हिस्सेदारी होगी। इस संयंत्र का क्षेत्र छह से सात क्रिकेट मैदानों के बराबर होगा और देश में मेमोरी चिप की बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ-साथ यह निर्यात भी करेगा।’

अधिकारियों का कहना है कि यह कदम महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह ऐसे समय में उठाया गया है जब माइक्रॉन चीन पर अपनी निर्भरता घटाकर भारत और अमेरिका में निवेश बढ़ा रहा है। चीन की घरेलू कंपनियां, जैसे वाईएमटीसी वास्तव में सरकार की नीति का सहारा लेकर अपने देश के मेमोरी स्पेस में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं। इस कदम की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई जब चीन की सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों के चलते माइक्रॉन के उत्पादों को महत्त्वपूर्ण सूचना से जुड़े बुनियादी ढांचे में इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगा दिया था।

सरकार की 10 अरब डॉलर की भारतीय सेमीकंडक्टर योजना के तहत कंपनियों को एटीएमपी या आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (ओएसएटी) फैक्टरी बनाने के लिए 50 फीसदी लागत का प्रोत्साहन दिया गया और माइक्रॉन इसी योजना का पहला लाभार्थी बन गया। कंपनी ने गुजरात के साणंद में अपनी फैक्टरी बनाने के लिए 22,516 करोड़ रुपये का निवेश किया। इस संयंत्र में डायनैमिक रैंडम एक्सेस मेमोरी, एनएएनडी (स्टोरेज उपकरणों में इस्तेमाल किए जाने वाली फ्लैश मेमोरी) की असेंबली और टेस्टिंग होगी। इसके अलावा यह सॉलिड स्टेट स्टोरेज डिवाइस भी तैयार करेगी। पूर्ण क्षमता के साथ यह संयंत्र 5,000 लोगों को सीधे रोजगार देगी।

शुरुआत में, वेफर कंपनी के वैश्विक संयंत्र से आयात किए जाएंगे और फिर भारत में असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग के बाद तैयार मेमोरी उत्पाद को निर्यात करने के साथ-साथ देश में ग्राहकों को बेचा जाएगा। माइक्रॉन ने संयंत्र स्थापित करने के लिए मलेशिया के पेनांग से कुछ मशीनें भारत भेजी हैं।

माइक्रॉन के अधिकारियों के अनुसार, संयंत्र का मुख्य हिस्सा क्लीन रूम होगा, जिसका आकार 10 लाख वर्ग फुट होगा जो एटीएमपी संयंत्र में दुनिया के सबसे बड़े क्लीन रूमों में से एक है। इसे धूल-मुक्त रखना जरूरी होगा जिसमें प्रति वर्ग मीटर केवल 1,000 छोटे कण रह सकते हैं, जो ऑपरेटिंग थिएटर के मानक का सिर्फ दसवां हिस्सा है। इसके दुनिया के सबसे स्वचालित एटीएमपी संयंत्र में से एक बनने की संभावना है और यह उत्पाद में 10 से 40 फीसदी तक का मूल्य वर्द्धन करेगा।

माइक्रोन संयंत्र के उद्घाटन के बाद, दिसंबर 2026 तक भारत में और तीन एटीएमपी/ओेएसएटी संयंत्र शुरू होने की उम्मीद है। इनमें से कई कंपनियां पहले से ही प्रायोगिक स्तर पर उत्पादन कर रही हैं, बाय-बैक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के साथ ही अगले विस्तार के लिए तैयारी में हैं। इनमें केंस टेक्नॉलजी और सीजी पावर शामिल है जो गुजरात के साणंद में मौजूद हैं और इसके अलावा टाटा समूह का एक संयंत्र असम में है।

First Published : February 27, 2026 | 10:47 PM IST