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वाहन क्षेत्र के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना ने बाजार में विकृतियां पैदा की हैं और नवाचार पर आधारित इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन विनिर्माताओं को बाहर कर दिया है। यह योजना लागत के लाभ को निर्यात की प्रतिस्पर्धी क्षमता में तब्दील करने में विफल रही है। इसमें निर्यात का 77 प्रतिशत वॉल्यूम गैर-पीएलआई मॉडल से संचालित होता हैं। सेंटर फॉर डोमेस्टिक इकॉनमी पॉलिसी रिसर्च (सी-डीईपी) की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
अध्ययन में कहा गया है कि नवाचार क्षमता, वाहन विकास और बौद्धिक संपदा निर्माण के संबंध में स्तर-आधारित पात्रता सीमा को प्राथमिकता देकर इस योजना ने अनजाने में ही भारत के ई-दोपहिया क्षेत्र के भीतर प्रतिस्पर्धा को विकृत कर दिया है।
इसमें कहा गया है कि शुरुआती दौर वाले मूल उपकरण विनिर्माताओं (ओईएम) को उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन से बाहर रखा गया। हालांकि वे ई-दोपहिया तकनीक में अग्रणी रहे, अनुसंधान एवं विकास (आरऐंडडी) में निवेश किया तथा अधिक देसी मूल्यवर्धन (डीवीए) हासिल किया, जिसमें पुर्जों और विनिर्माण की हिस्सेदारी भारत में ही रही तथा बौद्धिक संपदा पोर्टफोलियो का निर्माण किया।
केंद्रीय मंत्रिमंडल से 15 सितंबर, 2021 को मंजूर ऑटो पीएलआई योजना में पांच वर्षों के दौरान 25,938 करोड़ रुपये का व्यय शामिल था। इसका मकसद वृद्धिशील बिक्री से जुड़े प्रोत्साहनों के जरिये आधुनिक वाहन तकनीक के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना था। 115 आवेदकों में से 82 कंपनियों को मंजूरी दी गई थी। इनमें वाहन विनिर्माता और उनके पुर्जे बनाने वाली कंपनियां शामिल थीं। नियमों के तहत ओईएम को पहले वर्ष में कम से कम 125 करोड़ रुपये मूल्य के पात्र वाहनों की बिक्री करनी थी तथा प्रोत्साहन हासिल करते रहने के लिए इस बिक्री को कम से कम 10 प्रतिशत सालाना बढ़ाना था।
घरेलू विनिर्माण बढ़ाने के उद्देश्य के संबंध में रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि इस योजना से समूचे उत्पादन के वॉल्यूम में वृद्धि हुई है, लेकिन इससे बाजार में खासी विकृति भी आई है। वित्त वर्ष 2023 और वित्त वर्ष 2025 के बीच गैर-पीएलआई वाली कंपनियों के बीच वृद्धि में तेजी से गिरावट आई है। उनकी बिक्री की वृद्धि दर वित्त वर्ष 22 के 407 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 24 में -33 प्रतिशत और वित्त वर्ष 25 में -11 प्रतिशत रह गई।
विश्लेषण में शामिल गैर-पीएलआई कंपनियों में एथर, एम्पीयर, बीगॉस, रिवोल्ट, वार्डविजार्ड, प्योरवी, काइनेटिक ग्रीन और ओकाया शामिल हैं, जबकि पीएलआई का लाभ लेने वाली कंपनियों में हीरो मोटोकॉर्प, ओला, टीवीएस और बजाज शामिल हैं।