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अमेरिकी टैरिफ से किसानों को बचाने के लिए सरकार तलाश रही वैकल्पिक बाजार और नए आयात स्रोत

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सरकार अमेरिकी टैरिफ से किसानों को बचाने के लिए वैकल्पिक निर्यात बाजार और आयात स्रोत तलाश रही है, आईसीएआर ने कहा कि आत्मनिर्भरता और किसानों के हितों पर लगातार चर्चा हो रही है

Last Updated- September 08, 2025 | 10:25 PM IST
Trump Tariffs
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सरकार अमेरिका के आयात शुल्क (टैरिफ) के प्रभाव से किसानों की रक्षा के लिए वैकल्पिक निर्यात स्थलों और आयात में बदलाव की रणनीतियों पर विचार कर रही है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), डी.के. यादव ने सोमवार को यह जानकारी दी।

वह ‘डायलॉग नेक्स्ट’ संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से बात कर रहे थे, जो अमेरिका में वर्ल्ड फूड प्राइज फाउंडेशन द्वारा भारत में पहली बार आयोजित की जाने वाली एक विमर्श श्रृंखला है। यादव ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए सभी विकल्प तलाशने की कोशिश कर रही है। जहां तक निर्यात का सवाल है, संबंधित मंत्रालय पहले ही विभिन्न जिंसों के निर्यात के लिए वैकल्पिक देशों की तलाश कर रहे हैं।’

आनुवंशिक रूप से संवर्धित सोयाबीन और मक्का, साथ ही दूध और दूध उत्पादों के आयात के मुद्दे पर यादव ने कहा कि सरकार का ‘बहुत स्पष्ट रुख’ है और वह वैकल्पिक आयात स्रोतों की पहचान कर रही है। वहीं, संवाददाता सम्मेलन में मौजूद अन्य विशेषज्ञों ने कहा कि आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) फसलें वास्तव में कृषि से जुड़ी विशेष तरह की चुनौतियों के लिए लक्षित समाधान पेश कर सकती हैं। लेकिन उनकी प्रभावशीलता, विभिन्न फसलों और विशेषताओं के अनुसार काफी अलग होती है।

नोबेल पुरस्कार विजेता नॉर्मन बोरलॉग के कथन का हवाला देते हुए, अमेरिका स्थित वर्ल्ड फूड प्राइज फाउंडेशन की वरिष्ठ निदेशक (सामरिक संचार), निकोल बेरेका प्रेन्गर ने कहा, ‘किसी भी संभावित समाधान पर सभी को विचार करना चाहिए। यह हर एक किसान के लिए सही समाधान नहीं हो सकता है, लेकिन जीएम एक ऐसी चीज है जिस पर हमें विचार करना चाहिए।’

यादव ने कहा, ‘हमारे अपने तंत्र में भी, हम यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि किस तरह के आयात की गुंजाइश है और कैसे आत्मनिर्भर बनना है। देश के शीर्ष नेतृत्व के कार्यालय से लेकर सभी विभागों तक इन निर्णयों पर विचार चल रहा है ताकि हम अपनी उत्पादित वस्तुओं पर अधिक निर्भर रहें और किसानों को अच्छी कीमतें मिल सके।’

यादव ने कहा कि पिछले दो से तीन महीनों में जिन कार्यक्रमों पर चर्चा हुई है, उनका जोर उन वस्तुओं में आत्मनिर्भरता हासिल करने पर है, जिनके लिए भारत, अमेरिका और अन्य देशों पर बहुत अधिक निर्भर रहता है। उन्होंने कहा, ‘फिलहाल चल रहे सभी प्रयासों और सरकारी नीतियों के साथ, किसानों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा जैसा कि प्रधानमंत्री बार-बार दोहराते भी रहते हैं। हमारे मंत्री भी इन बिंदुओं पर नियमित रूप से चर्चा करते हैं।’ आईसीएआर के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि किसानों का हित सर्वोपरि है।

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First Published - September 8, 2025 | 10:25 PM IST

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