facebookmetapixel
Advertisement
Nippon India MF ने रचा इतिहास, 4 करोड़ फोलियो पार करने वाली देश की पहली AMC बनीIndia-US Trade Talks: अमेरिका के अतिरिक्त टैरिफ पर भारत को बड़ी राहत, जेनेरिक दवाओं और स्मार्टफोन को छूटUpcoming IPO This Week: निवेशक पैसा रखें तैयार! अगले हफ्ते खुल रहे हैं तीन मेनबोर्ड वाले IPOStock Market Outlook: इस हफ्ते कैसी रहेगी बाजार की चाल? इन ग्लोबल और घरेलू कारकों पर रहेगी नजरबिकवाली के दबाव में फिसला बाजार: टॉप-10 कंपनियों के डूबे ₹2.74 लाख करोड़, HDFC Bank को सबसे बड़ा झटकाPM मोदी ने ‘मन की बात’ में कारगिल के वीरों को किया नमन, विक्रम-1 रॉकेट, ‘हर घर तिरंगा’ और युवाओं पर भी रखी बातवैश्विक अनिश्चितता के बावजूद रफ्तार पकड़ेगा देश का टू-व्हीलर निर्यात, हीरो-बजाज और TVS ने साफ की स्थितिUpcoming IPO: रेलवे के लिए उपकरण बनाने वाली कंपनी का IPO 30 जुलाई को खुलेगा, जानें डिटेल्सदिल्ली में आज छाए रहेंगे बादल, पर देश के कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट; असम में बाढ़ से 66 की मौतअमेरिका-ईरान जंग में नया मोड़: 13 दिनों की बमबारी के बाद थमे एयरस्ट्राइक, क्या रुकेगी 5 महीने पुरानी जंग?

गोल्डमैन ने घटाया अनुमान

Advertisement
Last Updated- December 08, 2022 | 2:47 AM IST

वैश्विक वित्तीय संकट के मद्देनजर गोल्डमैन सैक्स ने चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत में विकास का अनुमान 9 प्रतिशत से घटाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है।


उसने कहा है कि पिछले कुछ महीनों में वित्तीय संकट ने भारतीय शेयर बाजार का भट्ठा बिठा दिया है, जिससे घरेलू और विदेशी मांग कम हुई है। इसी वजह से भारत का विकास अनुमान भी कम हो गया है।

वैश्विक वित्तीय संकट की भंवर में फं सकर  अमेरिका का दिग्गज निवेश बैंक लीमन ब्रदर्स दिवालिया क्या हुआ, भारत के शेयर बाजार में भी जबरदस्त गिरावट आ गई। इसी साल जनवरी में 21,000 का रिकॉर्ड स्तर पार करने वाला सेंसेक्स इस समय 10,000 अंकों से भी नीचे है।

गोल्डमैन सैक्स की मानें, तो अगले वित्त वर्ष का कारोबार लक्ष्य भी इस मंदी की भेंट चढ़ने वाला है। अगले वित्त वर्ष के लिए उसने कारोबारी लक्ष्य को 7 फीसद से घटाकर 5.8 फीसद कर दिया है।

इस बारे में गोल्डमैन ने कहा, ‘हमें भविष्य में कारोबार में और भी ज्यादा गिरावट का खतरा साफ नजर आ रहा है।?वित्तीय बाजार में इस गिरावट की एक बड़ी वजह रियल एस्टेट के बाजार में मंदी का दौर कायम रहना भी है।

निवेश बैंक के विश्लेषकों का मानना है कि तेजी से पांव पसार रही इस मंदी से निपटने के लिए भारत में सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं।?इसकी वजह यह भी है कि सरकारी खजाने पर पहले से ही बड़ा बोझ है और वह खस्ता हालत में है।

हालांकि अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर 5 फीसद रहने के अनुमान हैं।?इसकी मुख्य वजह सरकार के मौद्रिक उपाय, अच्छी फसल के आसार, जिंस की घटती कीमतें और विनिर्माण क्षेत्र पर हो रहा निवेश हैं।

Advertisement
First Published - November 10, 2008 | 9:28 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement