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पूंजीगत खर्च केंद्रित वृद्धि पर जोर

Last Updated- December 12, 2022 | 8:51 AM IST

यदि सेंसेक्स में आई 5 प्रतिशत की तेजी को एक मानक के तौर पर देखा जाए तो संकेत मिलता है कि वित्त वर्ष 2022 के लिए बजट में कई मोर्चों पर ध्यान दिया गया है। वित्त मंत्री ने न सिर्फ सरकारी खर्च की जिम्मेदारी ली है बल्कि निवेशकों को यह भी संकेत दिया है कि पारंपरिक क्षेत्रों – इन्फ्रास्ट्रक्चर, धातु, सीमेंट और संबद्घ निर्माण क्षेत्रों पर भी पुन: जोर दिया गया।
यह पिछले 10-12 वर्षों से खपत-केंद्रित वृद्धि के बजाय इन्फ्रास्ट्रक्चर खर्च-आधारित वृद्घि पर ध्यान देने की कोशिश है। पिछली बार सेंसेक्स 1999 में बजट के दिन 5 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा था और तब यशवंह सिन्हा के ‘अप्रत्याशित अनुकूल’ बजट पर सूचकांक ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाई थी। डीएएम कैपिटल के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी धर्मेश मेहता ने कहा, ‘हां, मुझे काफी समानताएं दिखी हैं।’ उनका मानना है कि खपत थीम अपने चरम के नजदीक था। उन्होंने कहा, ‘खपत-केंद्रित अर्थव्यवस्था होने की अपनी सीमाएं हैं, और इन्फ्रास्ट्रक्चर, निर्माण और धातु जैसे व्यवसायों ने वापसी की है।’
इसे वृद्घि बहाली की गंभीर कोशिश करार देते हुए आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के शोध प्रमुख पंकज पांडे का कहना है कि अर्थव्यवस्था पर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोत्साहन का जो व्यापक असर देखा जा सकता है वह है लगभग 1.4 गुना का अनुमानित व्यय। उन्होंने कहा, ‘वित्त वर्ष 2021 के लिए नैशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन 7,400 करोड़ रुपये के आसपास है, जो सालाना आधार पर 20,000 करोड़ रुपये खर्च हो सकता है।’ सरकार पूंजी और राजस्व प्राप्तियों के जरिये इन्फ्रास्ट्रक्चर परिव्यय का विकल्प चुन रही है, और आयकर दर (चाहे यह लोगों के लिए हो या कंपनियों के लिए) नहीं बढ़ा रही है , जिसे एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। वित्तीय क्षमता में अंतर भी महत्वपूर्ण है।
पांडे लिखते हैं, ‘संदेश स्पष्ट है – वृद्धि पर फोकस बना हुआ है, न कि राजकोषीय घाटे पर’
जहां यह आर्थिक समीक्षा के सुझावों के अनुरूप है, वहीं तथ्य यह है कि रुपये पर वित्त वर्ष 2022 की जीडीपी के 6.8 प्रतिशत राजकोषीय घाटे के अनुमान को लेकर नकारात्मक असर नहीं दिखा है। इससे पता चलता है कि बाजार फिलहाल विपरीत नजरिया नहीं अपना सकता है। इन्फ्रास्ट्रक्चर पर सरकार द्वारा ध्यान दिए जाने से निजी पूंजी खर्च का प्रतिफल सुधर सकता है।
एक घरेलू सलाहकार फर्म में रणनीति शोध के वरिष्ठ प्रमुख का कहना है कि इसमें 12-18 अन्य महीने लग सकते हैं, क्योंकि राजस्व वृद्घि कमजोर है। हालांकि पूंजीगत खर्च में सालाना आधार पर 24 प्रतिशत की वृद्घि के बावजूद उनका मानना है कि इन्फ्रा खर्च वित्त वर्ष 2022 के कुल खर्च के 16 प्रतिशत पर अनुमानित है, जो वित्त वर्ष 2021 के 18 प्रतिशत से कम है। वह कहते हैं, ‘हालांकि हम इसे 25 प्रतिशत पर देखना चाहते हैं।’
जहां एलऐंडटी और सीमेंस जैसी इन्फ्रा कंपनियों के शेयरों में सोमवार को 6-8 प्रतिशत की तेजी आई, वहीं निफ्टी बैंक ने 8.3 प्रतिशत की तेजी के साथ एक नई ऊंचाई को छुआ और 33,000 के निशान को पार किया था, क्योंकि बैंक शेयरों में शानदार तेजी देखी गई। रिटेल व्यवसाय में वृद्घि कमजोर रहने से कंपनियों से बैंकों के लिए मांग फिर से बढ़ गई है।

First Published - February 2, 2021 | 11:34 PM IST

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