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नवंबर में ई-चालान में आई तेजी

Last Updated- December 14, 2022 | 8:30 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत ई-इन्वॉयसिंग प्रणाली अब जोर पकड़ रही है। अक्टूबर की तुलना में नवंबर में ई-इन्वॉयस (चालान) जेनरेशन में 17 फीसदी की तेजी आई है। नवंबर में करीब 5.6 करोड़ ई-इन्वॉयस जेनरेट किए गए जबकि अक्टूबर में 4.6 करोड़ ई-चालान जेनरेट किए गए थे। इससे संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था में मांग सुधर रही है और ई-इन्वॉयसिंग व्यवस्था में स्थायित्व आ रहा है। दीवाली से पहले 6 नवंबर को 32.6 लाख ई-चालान जेनरेट किए गए, जो 1 अक्टूबर को इसके लागू होने के बाद सबसे ज्यादा आंकड़ा है। 500 करोड़ रुपये सालाना कारोबार वाली कंपनियों के लिए ई-चालान अनिवार्य है, वहीं 1 जनवरी से 100 करोड़ रुपये कारोबार वाली कंपनियां भी इसके दायरे में आ जाएंगी और 1 अप्रैल से 50 करोड़ रुपये सालाना कारोबार वाली फर्मों के लिएभी बिजनेस-टु-बिजनेस ई-चालान अनिवार्य होगा। प्रतिदिन चालान जेनरेशन में सुधार हो रहा है और यह रोजाना 25 से 27 लाख के करीब है जबकि अक्टूबर में औसतन प्रतिदिन 15 लाख ई-चालान जारी हो रहे थे।
 
एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि इसे लेकर अब कोई शिकायत नहीं है। ई-चालान प्रणाली को उन्नत बनाया गया है और हम 1 जनवरी से इसका अगला चरण शुरू करने की तैयारी में हैं। ई-चालान का मकसद बिक्री की जानकारी में ज्यादा पारदर्शिता लाना, त्रुटि और मिसमैच को न्यूनतम करना तथा अनुपालन में सुधार लाना है। इससे कर चोरी रोकने में भी मदद मिलेगी। 500 करोड़ रुपये कारोबार की श्रेणी में करीब 20,000 जीएसटीआईएन हैं, वहीं 1 जनवरी से 90,000 फर्में और ई-चालान के दायरे में आ जाएंगी।
 
अनुपालन को सुगम बनाने के लिए शुक्रवार से जीएसटीआर-1 या बिक्री रिटर्न में ई-चालान के आंकड़े अपने आप भरें होंगे। अधिकारी ने कहा, ‘ई-चालान अलग से ई-वे बिल की जरूरत को भी दूर कर देगा।’ ईवाई में टैक्स पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा कि 500 करोड़ रुपये से ज्यादा कारोबार वाली कंपनियां शुरू में थोड़ी तकनीकी समस्या के बाद अब सुगमता से ई-चालान को अपना रही हैं, जिसकी वजह से ई-चालान की संख्या बढ़ रही है। 100 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वाली कंपनियों के इसमें शामिल होने से कर चोरी में भी कमी आएगी। मध्यम अवधि में यह ई-वे बिल प्रणाली की जगह ले लेगी।
 

First Published - December 6, 2020 | 9:26 PM IST

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