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वैश्विक घटनाक्रम से गिरावट का जोखिम

Last Updated- December 11, 2022 | 8:42 PM IST

अर्थव्यवस्था की स्थिति पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मासिक रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल और अन्य जिंसों के दाम कई साल के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं, जिससे भारत की वृद्घि दर में गिरावट का जोखिम बना हुआ है।
कोविड महामारी की तीसरी लहर से अर्थव्यवस्था के उबरने के बाद भी रिपोर्ट में वैश्विक संकट के मद्देनजर भारत की चुनौतियां बताई गई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘रूस-यूक्रेन विवाद बढऩे से तेल और जिंसों के दाम कई साल के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं और शेयर बाजार में भारी बिकवाली के कारण वित्तीय बाजार पर भी इसका असर दिख रहा है।’
यूक्रेन पर रूसी हमले के कारण कच्चा तेल 2014 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा था। 130 डॉलर प्रति बैरल का आंकड़ा छूने के बाद अब बें्रट क्रूड थोड़ा नरम होकर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रहा है, जिससे शेयर बाजार को भी थोड़ी राहत मिली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भू-राजनीतिक जोखिम ऐसे समय में उभरा है, जब कई देश मुद्रास्फीति में तेजी से जूझ रहे हैं। मौद्रिक नीति सामान्य करना जरूरी है, जिससे वैश्विक वित्तीय स्थिति आगे और सख्त होगी। रिपोर्ट के अनुसार, ‘उभरते बाजारों की मुद्राओं में गिरावट आ रही है और एफपीआई बिकवाली कर  रहे हैं। विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी  हुई है।’    
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊंची मुद्रास्फीति और वित्तीय अस्थिरता के जोखिम से वैश्विक वृद्घि का परिदृश्य चिंताजनक है। संकट का जल्द समाधान नहीं हुआ तो वैश्विक सुधार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है और 2022 तथा आगे के लिए वैश्विक वृद्घि के अनुमान में कमी करनी पड़ सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार इस चुनौती के समय भारत घरेलू मोर्चे पर निरंतर प्रगति कर रहा है। भारत की वृहद आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है। लेकिन वैश्विक घटनाक्रम से गिरावट का जोखिम बना हुआ है।
रिपोर्ट में आरबीआई ने कहा है कि उपभोक्ता और कारोबार का विश्वास बढ़ रहा है तथा मांग में भी सुधार हुआ है। आपूर्ति पक्ष की बात करें तो कृषि क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन और औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र में निरंतरता से सुधार को बल मिल रहा है। कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान में खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 31.61 करोड़ टन रहने की उम्मीद जताई गई है।
रिपोर्ट में उधारी चक्र में भी सुधार का उल्लेख किया गया है। नवंबर 2021 से जनवरी 2022 में उधारी मांग 65,298 करोड़ रुपये रही, जो अप्रैल-अक्टूबर 2021 में 61,983 करोड़ थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि उधारी मांग बढऩे से कुछ बैंकों ने साविध जमा दरों में इजाफा भी किया है।
फरवरी के मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर रिपोर्ट में कहा गया है कि कीमतों में 24 आधार अंक के इजाफे में से 19 आधार अंक अनुकूल आधार प्रभाव की वजह से बढ़े हैं। इस कारण जनवरी से फरवरी के बीच वास्तविक वृद्घि 5 आधार अंक रही।

First Published - March 17, 2022 | 11:14 PM IST

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