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वित्त वर्ष 2022 में दो अंक की वृद्घि पाना मुश्किल

Last Updated- December 12, 2022 | 3:58 AM IST

प्रमुख अर्थशास्त्रियों और अग्रणी रेटिंग एजेंसियों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था के दो अंक की वृद्घि दर हासिल करना मुश्किल लग रहा है और वृद्घि दर 8 से 9 फीसदी के बीच रह सकती है जबकि साल की अनुमानित वृद्घि दर 11.5 फीसदी है।
वृद्घि अनुमान को घटाकर 10 फीसदी किए जाने की बड़ी वजहों में राज्यों द्वारा प्रतिबंधों को कठोर किया जाना, टीकाकरण की अपेक्षाकृत धीमी रफ्तार और महामारी की तीसरी लहर की आशंका है। हालांकि, उनका कहना है कि असर पहली लहर जितना भयानक नहीं होगा और वे उम्मीद करते हैं कि पहली तिमाही में धनात्मक वृद्घि नजर आएगी।   
भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने कहा, ‘यह अच्छी बात है कि वित्त वर्ष 2020-21 के लिए सकल घरेलू अनुपात (जीडीपी) में आशंका से थोड़ा कम संकुचन आया लेकिन मुश्किल बात यह है कि वित्त वर्ष 2022 के जीडीपी वृद्घि अनुमान में अब संशोधन किया जाएगा और यह एक अंक में रहेगी क्योंकि आधार को संशोधित कर काफी हद तक कम कर दिया गया है। टीकाकरण की रफ्तार को देखते हुए नहीं लगता कि साल की दूसरी तिमाही तक बड़ी संख्या में लोगों का टीकाकरण हो पाएगा। समग्र वृद्घि की संभावना निराश करती है।’
वित्त वर्ष 2021 में जहां जीडीपी में 7.3 फीसदी का संकुचन आया वहीं चालू वित्त वर्ष में दूसरी लहर से मुकाबले के लिए तेजी से टीकाकरण होने की उम्मीद थी जिसकी बदौलत आर्थिक वृद्घि की रफ्तार तेजी से जोर पकडऩे और इसके दो अंक में जाने की उम्मीद जताई जा रही थी।    
ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डी के श्रीवास्तव ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2021 में जीडीपी में कम संकुचन आने के साथ साथ सकल मूल्य वर्धन से वित्त वर्ष 2022 में कई एजेसिंयों ने तीव्र रिकवरी की उम्मीद जताई थी जैसे कि अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 12.5 फीसदी और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 10.5 फीसदी वृद्घि का अनुमान जताया था। ये अनुमान दूसरी लहर के असर से पहले जताये गए थे। कोविड की दूसरी लहर और संशोधित आधार प्रभाव के मिश्रण से वित्त वर्ष 2022 में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जीडीपी वृद्घि कम रह सकती है। चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्घि 9 से 9.5 फीसदी रह सकती है।’
इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनैशनल इकोनॉमिक रिलेशंस में वृहत अर्थशास्त्र में आरबीआई चेयर प्रोफेसर आलोक शील ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2021 के जीडीपी वृद्घि के संबंध में अस्थायी अनुमान थोड़ा बेहतर है लेकिन बड़ी तस्वीर के बदलने की संभावना नहीं है। इन संख्याओं को संतुलित करने की जरूरत होगी जिसके लिए वित्त वर्ष 2022 के लिए मौजूद जीडीपी वृद्घि अनुमानों को घटाना होगा। कोविड की दूसरी लहर को देखते हुए जीडीपी वृद्घि को लेकर आमराय वाला अनुमान 10 फीसदी से नीचे है।’

First Published - June 6, 2021 | 9:28 PM IST

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