facebookmetapixel
Advertisement
Share Marke: सेंसेक्स 331 अंक टूटा, निफ्टी 23,767 पर बंद! अब क्या करें निवेशक?National Testing Agency के 47 अफसरों को सरकार ने किया बर्खास्त, कुछ अधिकारियों पर होगी क्रिमिनल कार्रवाईBank of India Q1 Results: मुनाफा ₹3,068 करोड़ पर पहुंचा, NII में 12.61% की बड़ी बढ़ोतरीTata Consumer Q1 Results: Q1 में मुनाफा 29% बढ़कर ₹427 करोड़ हुआ, रेवेन्यू भी 12% उछलाUTI म्यूचुअल फंड ने WhatsApp पर शुरू की निवेश और पेमेंट की सुविधा, ऐप बदले बिना पूरा होगा निवेशक्या सिर्फ PF के भरोसे सुरक्षित रहेगा आपका रिटायरमेंट? एक्सपर्ट्स ने समझें निवेश का सही फॉर्मूलाभारत में बैटरी बनेगी तो क्या EV सस्ती हो जाएगी? सरकार के प्लान की पूरी सच्चाईकेमिकल सेक्टर के लिए कैबिनेट का बड़ा फैसला: ‘BHAVYA Rasayan’ योजना को मंजूरी, डेवलप होंगे 3 केमिकल पार्क‘प्रिजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम’ का उठाने जा रहे हैं फायदा? ITR Filing से पहले समझ लें नियम, नहीं तो आएगा नोटिसEPFO ने मेंबर्स को भेजना शुरू किया FY26 का 8.25% ब्याज, ऐसे चेक करें अपना PF बैलेंस

आरबीआई के दायरे में आया कमोडिटी सेक्टर

Advertisement
Last Updated- December 06, 2022 | 1:04 AM IST

बैंकों द्वारा जिंस क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋणों पर अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की निगाहें रहेंगी।


केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति में यह फैसला किया है कि जिंस क्षेत्र को दिया जाने वाला ऋण रिजर्व बैंक की निगरानी समीक्षा के दायरे में रहेगा।रिजर्व बैंक ने बैंकों से यह भी कहा है कि वे चावल, गेहूं, तिलहन और दालों जैसे कृषि जिंसों के लिए व्यापारियों को दिए जाने वाले ऋण की समीक्षा करें।बैंकों को यह निर्देश दिया गया है कि कारोबारियों को ऋण मुहैया कराते समय सावधानी बरतें, ताकि बैंक की राशि का इस्तेमाल जमाखोरी के लिए न किया जाए।


गौरतलब है कि  बैंक खातों की पहली समीक्षा आगामी 15 मई तक पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद इस की निगरानी समीक्षा के लिए रिजर्व बैंक के पास भेज दिया जाएगा।आरबीआई के गर्वनर वाई वी रेड्डी ने बताया, ‘हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि किसी भी गलत काम, खासतौर से जमाखोरी के लिए बैंक राशि का गलत इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसके अलावा बैंकिंग चैनल के जरिए आम लोगों को सेवाएं मुहैया कराई जाएगी।’


उल्लेखनीय है कि बैंक कमोडिटी फाइनैंशियल क्षेत्र में काफी सक्रिय है। बैंक वेयरहॉउस रिसीट फाइनैंसिंग के जरिए अग्रिम राशि मुहैया कराती है। इंडसइंड बैंक के एमडी और सीईओ रमेश सोबती ने बताया, ‘आरबीआई द्वारा उठाया गया कदम इस बात को आश्वस्त करने के लिए है कि जिंसों का भंडारण कहीं जमाखोरी में तब्दील न हो जाए।


बैंकों द्वारा कभी-कभी वेयरहॉउसिंग रिसीट फाइनैंसिंग के जरिए कारोबारियों को राशि मुहैया कराई जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बैंक उन राशि पर नजर रखना चाहती है, जो जमाखोरी को बढ़ावा देती है और जिसके परिणामस्वरूप जिंसों के मूल्यों पर बेतहाशा दबाव पड़ता है।’ सोबती ने यह भी बताया, ‘आरबीआई द्वारा समीक्षा का मुख्य उद्देश्य बैंकों के जरिए मुहैया कराई जाने वाली राशि पर नजर रखना है।’

Advertisement
First Published - May 1, 2008 | 11:22 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement