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कोयला मंत्रालय अगले वित्त वर्ष में बिजली क्षेत्र की मांग को पूरा करने को तैयार : जोशी

जोशी ने कहा कि कोयला आयात में कमी से केवल एक साल में 82,264 करोड़ रुपये की बचत हुई है। सरकार का लक्ष्य 2026 तक कोयले का आयात ‘शून्य’ करने का भी है।

Last Updated- March 13, 2024 | 2:16 PM IST
Coal import

केंद्रीय कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बुधवार को कहा कि कोयला मंत्रालय वित्त वर्ष 2024-25 में बिजली क्षेत्र की 87.4 करोड़ टन कोयले की मांग को पूरा करने के लिए तैयार है। 31 मार्च को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए बिजली मंत्रालय ने 82.1 करोड़ टन की मांग रखी थी। जोशी ने बुधवार को ‘कोयला क्षेत्र में पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ पुस्तिका के विमोचन के मौके पर पीटीआई-भाषा से यह बात कही।

जोशी ने कहा कि उनकी (बिजली मंत्रालय की) मांग पूरी हो गयी है। उन्होंने 82.1 करोड़ टन की मांग की थी और इसकी आपूर्ति कर दी गई है। उन्होंने कहा, ‘‘वित्त वर्ष 2024-25 के लिए बिजली मंत्रालय ने 87.4 करोड़ टन कोयला मांगा है। हम उनकी इस जरूरत को भी पूरा करेंगे। हम इस साल मार्च तक एक अरब टन कोयला उत्पादन के आंकड़े को पार करने जा रहे हैं।’’

जोशी ने कहा कि मिश्रण के उद्देश्य के लिए आयातित कोयले की हिस्सेदारी पिछले वित्त वर्ष की तुलना में चालू वित्त वर्ष में कम हो गई है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 में मिश्रण के लिए कोयले का आयात लगभग 2.22 करोड़ टन था, जबकि वित्त वर्ष 2022-23 में यह 3.08 करोड़ टन था।

जोशी ने कहा कि कोयला आयात में कमी से केवल एक साल में 82,264 करोड़ रुपये की बचत हुई है। सरकार का लक्ष्य 2026 तक कोयले का आयात ‘शून्य’ करने का भी है। जोशी ने कहा कि कोयला मंत्रालय रैक की उपलब्धता के लिए रेल मंत्रालय के साथ भी संपर्क में है। मंत्री ने कहा कि कोयले के परिवहन के लिए रैक की औसत उपलब्धता भी पिछले वित्त वर्ष में 369 रैक प्रतिदिन से बढ़कर अब 392 रैक प्रति दिन हो गई है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी रैक की उपलब्धता में सुधार होगा।

First Published - March 13, 2024 | 2:16 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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