facebookmetapixel
Advertisement
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर RSS ने दिया पहला बयान, कहा: घटना दुर्भाग्यपूर्ण, दोषियों को मिले कड़ी सजाEditorial: दिल्ली की नई EV नीति सही दिशा में, लेकिन अभी भी कई बड़े सुधार की जरूरतभारत को अपना AI मॉडल बनाने का जरूरत नहीं, मजबूत AI इकोसिस्टम पर दांव लगाना सही कदमहिमाचल में 2027 की चुनावी बिसात: खस्ताहाल खजाना और गुटबाजी के बीच सुक्खू सरकार की बढ़ी बेचैनीविदेशी निवेशकों से रुपये में लिया जाएगा रेगुलेटरी शुल्क, FPI और FVCI के लिए SEBI बदलने जा रहा है नियमकॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में आई जबरदस्त रौनक, भारतीय कंपनियों ने एक ही दिन में जुटाए ₹15,960 करोड़Nifty IT इंडेक्स 30% टूटा, फिर भी पैसिव फंड्स का एयूएम 23% बढ़कर ₹5,800 करोड़ के पार‘विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू म्युचुअल फंड बने शेयर बाजार की ढाल’, SEBI का बड़ा दावाअल नीनो और महंगे ईंधन की दोहरी मार: होटलों की कमाई पर मंडराया संकट, पानी की कमी ने बढ़ाई मुश्किलेंईरान युद्ध के बीच IPO बाजार में म्युचुअल फंडों का जलवा, कई सालों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची हिस्सेदारी

बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने से भारतीय उद्योग जगत की उधारी लागत बढ़ी

Advertisement

तीन वर्षीय कॉरपोरेट बॉन्डों पर प्रतिफल 8 फरवरी को आरबीआई की नीतिगत बैठक के बाद से 15 आधार अंक बढ़ा है

Last Updated- February 22, 2023 | 10:59 PM IST
Six steps to improve your credit or CIBIL score, check steps below

मौद्रिक सख्ती के चक्र से जुड़ी नई चिंताओं की वजह से घरेलू बॉन्ड बाजारों में आए उतार-चढ़ाव से कंपनियों के लिए उधारी लागत में इजाफा हुआ है, क्योंकि निजी फर्मों द्वारा जारी बॉन्डों पर प्रतिफल बढ़ा है।

कॉरपोरेट बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि काफी हद तक सरकारी बॉन्डों पर प्रतिफल के अनुरूप रही है। सरकारी बॉन्ड निजी क्षेत्र द्वारा जुटाए जाने वाले ऋण का मूल्य निर्धारण करने के लिए मानक हैं। बॉन्ड कीमतों और प्रतिफल के बीच विपरीत संबंध है।

ब्लूमबर्ग के आंकड़े से पता चलता है कि तीन वर्षीय कॉरपोरेट बॉन्डों पर प्रतिफल 8 फरवरी को आरबीआई की नीतिगत बैठक के बाद से 15 आधार अंक बढ़ा है, जबकि पांच वर्षीय बॉन्डों पर प्रतिफल 12 आधार अंक चढ़ा है। डेट के जरिये कॉरपोरेट कोष उगाही का बड़ा हिस्सा इन्हीं परिपक्वताओं से संबं​धित है। 10 वर्षीय कॉरपोरेट बॉन्डों में 15 आधार अंक की तेजी आई है।

समान अव​धि के दौरान तीन वर्षीय और पांच वर्षीय सरकारी बॉन्डों पर प्रतिफल 17-17 आधार अंक बढ़ा, जबकि 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड के लिए इसमें 6 आधार अंक की तेजी आई। सॉवरिन बॉन्डों में उतार-चढ़ाव के अनुरूप, कॉरपोरेट बॉन्ड प्रतिफल पिछले कई महीनों से सपाट रहा।

यह ​​स्थिति खासकर पिछले कुछ महीनों के दौरान अल्पाव​धि बॉन्ड प्रतिफल में बड़ी तेजी की वजह से दर्ज की गई।आरबीआई द्वारा दर वृद्धि की तेज रफ्तार और आगामी सख्ती को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता से भी बॉन्ड प्रतिफल में तेजी देखने को मिली। अल्पाव​धि बॉन्डों को अल्पाव​धि ब्याज दर अनुमानों के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

ब्याज दरों से जुड़ी चिंताओं के अलावा, विश्लेषकों ने वित्त वर्ष के अंत में दर्ज किए गए कई मौसमी कारकों को भी इसके लिए जिम्मेदार माना है, जिनमें बैंकों द्वारा जमा पत्रों के निर्गमों में तेजी भी मुख्य रूप से शामिल है।

अस्पष्ट दृ​ष्टिकोण

भारतीय डेट बाजारों में बड़ी बिकवाली के मुख्य कारकों में ब्याज दरों से संबं​धित प्रतिकूल रुझानों का ताजा दौर भी रहा है, जिससे बाजार धारणा प्रभावित हुई। 8 फरवरी को अपने नीतिगत बयान में आरबीआई ने अपनी दर वृद्धि पर विराम लगाने के बारे में कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया, जिससे ज्यादातर कारोबारियों को निराशा हुई। कुछ ही दिन बाद पेश किए गए आंकड़े से जनवरी में भारत की उपभोक्ता कीमतों में बड़ी तेजी आने का पता चला, जिससे आरबीआई के मुद्रास्फीति अनुमान को लेकर जो​खिम पैदा हो गया तथा अन्य दर वृद्धि की आशंका मजबूत हुई।

एक अ​धिकारी ने कहा, ‘एनबीएफसी बॉन्डों को लेकर भी दिलचस्पी नहीं है। इसे लेकर समस्या यह है कि ये तीन वर्षीय और पांच वर्षीय अव​धि से जुड़े हैं। एसबीआई के जो एटी-1 बॉन्ड पांच वर्षीय कॉल ऑप्श्न के साथ 7.75 प्रतिशत की दर पर जारी किए गए थे, वे अब बाजार में 8.10-8.15 प्रतिशत पर उपलब्ध हैं।’

ट्रेजरी अ​धिकारियों ने कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा नियामकीय रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म के उन्नत वर्जन पर अमल किए जाने से पैदा हुई समस्याओं का भी जिक्र किया है।

Advertisement
First Published - February 22, 2023 | 10:59 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement