facebookmetapixel
Advertisement
WhatsApp के नए ‘यूजरनेम’ फीचर पर सरकार की नजर, फर्जी पहचान और धोखाधड़ी का बढ़ा खतरादिल्ली को मिलेगी 6-लेन टनल, द्वारका एक्सप्रेसवे से वसंत कुंज तक सफर होगा आसान, ₹6,970 करोड़ की परियोजना मंजूरभारतीय बाजार कमजोर नहीं, SIP जारी रखें; राधिका गुप्ता ने दिया निवेश का बड़ा मंत्रक्या महिलाएं ब्रांड देखकर चुनती हैं म्युचुअल फंड? रिपोर्ट में हुए चौंकाने वाले खुलासेEPFO Portal Down: PF क्लेम अटका, पासबुक नहीं होगी डाउनलोड; जानें कब बहाल होंगी सेवाएंSIP की बेस्ट डेट और फ्रीक्वेंसी कौन-सी? मार्केट गिरने पर क्या करें… WhiteOak MF की रिपोर्ट में मिले जवाबPassport New Rules 2026: 1 जुलाई से पासपोर्ट बनवाना पड़ेगा महंगा! जानिए नई फीसIT सेक्टर पर AI का बड़ा असर! Emkay ने बताया किन शेयरों में है दम और कौन रहेगा पीछेChoice Overnight Fund: सुर​क्षित निवेश के साथ रेगुलर इनकम का ऑप्शन, ₹1000 से कर सकते हैं शुरुआतHDFC Bank Credit Card यूजर्स को झटका! SmartBuy Rewards के नियम बदले, अब वाउचर से नहीं मिलेगा पहले जैसा फायदा

विप्रो का माल भी हजम कर गई नॉटर्ल

Advertisement
Last Updated- December 09, 2022 | 10:07 PM IST

भारत की तीसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सेवा निर्यात करने वाली कंपनी विप्रो लिमिटेड ने कहा है कि नॉटर्ल  के पास उसका 75 करोड़ रुपये बकाया है।


यह घोषणा तब की गई है, जब नॉटर्ल को अमेरिका में चैप्टर 11 के तहत दिवालिया घोषित कर दिया गया है। विप्रो ने यह भी कहा है कि उसके कुल आईटी कारोबार का 1.5 फीसदी नॉटर्ल के साथ होता है और यह लगभग 200 करोड़ रुपये के करीब है।

चैप्टर 11 अमेरिकी दिवालिया संहिता का 11 वां अध्याय है। जो कंपनी कर्ज नहीं चुकाती है, उसकी संरचना इस चैप्टर के तहत न्यायालय के निरीक्षण में फिर से की जाती है।

यह कदम उधार देने वाली संस्था के बचाव के लिए उठाया जाता है, ताकि कंपनी के दिवालिया होने पर उसके दावे को अस्थायी तौर पर सुरक्षित किया जा सके।

जब किसी कंपनी को चैप्टर 11 के तहत नामित किया जाता है, तो वह कंपनी काम तो करती है, लेकिन कंपनी के महत्वपूर्ण निर्णय की मंजूरी जज से लेनी होती है। आम तौर पर चैप्टर 11 के तहत दिवालिया कंपनी की परिसंपत्तियों को बेचकर उधार देने वाले की रकम वापस करने का प्रयास किया जाता है।

विप्रो के लिए विश्व बैंक द्वारा सीधे कारोबार पर प्रतिबंध लगाने के बाद यह दूसरा झटका है। विश्व बैंक ने विप्रो के साथ 2007 से 2011 तक के लिए सीधे कारोबार पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि विप्रो ने कहा है कि पिछले छह साल में विश्व बैंक के साथ पांच करोड़ रुपये से कम का ही कारोबार हुआ है।

साथी का सितम


विप्रो ने किया खुलासा, नॉटर्ल के पास है उसका 75 करोड़ रुपये बकाया

दोनों कंपनियों के बीच होता था 200 करोड़ रुपये का कारोबार

Advertisement
First Published - January 15, 2009 | 11:19 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement