बीएस बातचीत
इंडिया सीमेंट्स अपनी स्थापना के 75वें वर्ष का जश्न मना रही है। कंपनी के वाइस चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक एन श्रीनिवासन ने शाइन जैकब से बातचीत में कंपनी की विकास गाथा और आगे की राह के बारे में विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी ने किस प्रकार 2 अरब टन चूना पत्थर भंडार के साथ सुरक्षित स्थिति में है। लेकिन चेन्नई सुपर किंग्स से संबंधित विवाद ने उन्हें काफी आहत किया। पेश हैं मुख्य अंश:
आप इंडिया सीमेंट्स के पिछले 75 वर्षों की विकास गाथा को कैसे देखते हैं?
कॉरपोरेट क्षेत्र के मद्देनजर 75 साल का सफर पूरा करना और अब भी अपनी प्रासंगिकता को बरकरार रखना काफी महत्त्वपूर्ण माना जाता है। संस्थापकों ने 1946 में इस कंपनी की स्थापना की थी। उन्होंने उस समय 1 करोड़ रुपये का सार्वजनिक निर्गम तैयार किया जो स्वतंत्र भारत का संभवत: पहला सार्वजनिक निर्गम था। अंतत: 1949 में सीमेंट का उत्पादन शुरू हुआ। (उसी वर्ष शंकर सीमेंट को भी लॉन्च किया गया था) हमने सालाना 1 लाख टन क्षमता के साथ अपनी शुरुआत की थी। आज हमारी क्षमता सालाना 1.6 करोड़ टन तक पहुंच चुकी है। सबकुछ बदल चुका है। यह एक ऐसा उद्योग है जहां मुझे लगता है कि मैं किसी से भी अच्छा हूं अथवा मैं अधिकतर लोगों से बेहतर हो सकता हूं। हमारे उद्योग ने हमेशा मांग के मुकाबले अधिक क्षमता का निर्माण किया और उसके बिना देश में सीमेंट की किल्लत हो जाती।
आपके पास चूना पत्थर का विशाल भंडार मौजूद है। आप उसका उपयोग करने के लिए क्या योजना बना रहे हैं?
हमारे पास करीब 2 अरब टन चूना पत्थर भंडार उपलब्ध है। सीमेंट कंपनियों की पीढिय़ों के लिए यह काफी आकर्षक है। मैं अपना चूना पत्थर भंडार नहीं बेचूंगा। सीमेंट उत्पादक लंबे समय तक बने रहना चाहता है और हम लंबे समय से बराकरार हैं। अब, 2021 में भी हमारी मौजूदा क्षमता पर परिचालन के लिए 50 साल का चूना पत्थर बचा है। देश में चूना पत्थर की करीब 35 फीसदी क्षमता दक्षिण भारत में है। उत्तर अथवा पूर्वी भारत में चूना पत्थर नहीं है। इसलिए दक्षिण में मुख्य तौर पर क्षमता विस्तार किया जाएगा।
कोविड की मौजूदा स्थिति के मद्देनजर आप भारत में सीमेंट उद्योग का आकलन किस प्रकार करेंगे?
भारत में सीमेंट उद्योग दुनिया के किसी अन्य देश की तरह ही आधुनिक है। चीन 2.6 अरब टन के साथ सबसे बड़ा उत्पादक देश है। उसके बाद भारत 40 करोड़ टन क्षमता (पिसाई इकाइयों को छोड़कर) के साथ दूसरे पायदान पर है। अमेरिका 6 से 7 करोड़ टन क्षमता के साथ तीसरे पायदान पर है। यदि आप इस पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि पश्चिम और हमारे बीच बहुत बड़ा अंतर है। यदि सरकार उम्मीद के मुताबिक काम करेगी तो इस उद्योग में विकास की गुंजाइश काफी है। इंडिया सीमेंट्स ने बिना किसी नुकसान के कोविड संकट का मुकाबला किया है। जहां तक उद्योग का संबंध है तो लॉकडाउन ने हमारे उत्पादन और मांग को प्रभावित किया। मुझे विश्वास है कि मांग की वापसी होगी। पिछले साल हमारी क्षमता उपयोगिता पहली तिमाही में 37 फीसदी, दूसरी तिमाही में 50 फीसदी, तीसरी तिमाही में 60 फीसदी और चौथी तिमाही में 77 फीसदी रही। इस साल पहली तिमाही में क्षमता उपयोगिता करीब 45 फीसदी रह सकती है। मुझे विश्वास है कि चालू वित्त वर्ष पिछले साल से बेहतर होगा।
आपने मुख्य तौर पर सीमेंट उद्योग पर ही ध्यान केंद्रित किया। कारोबार का विविधीकरण क्यों नहीं किया?
मैंने सीमेंट उद्योग में देखा कि हम जो भी पैसा कमाते हैं उसे उसी उद्योग में लगाते हैं। कभी भी अन्य उद्योगों या क्षेत्रों में जाने या विविधता लाने की कोशिश नहीं करते हैं। यही कारण है कि इस उद्योग में हमने कभी बैंकिंग प्रणाली को परेशान नहीं किया। हमने विविधीकरण के लिए अन्य क्षेत्रों में पूंजी निवेश नहीं किया। हमारे पास इंडोनेशिया में कोयला खदानें हैं क्योंकि मैं उस कोयले को अपने बिजली संयंत्रों के लिए लाता हूं। हमने बुनियादी ढांचे के विकास और आवास में विविधीकरण किया जिससे सीमेंट बनाना आसान हो गया। लेकिन इंडिया सीमेंट्स अपने मुख्य कारोबार सीमेंट पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अन्य क्षेत्रों से बाहर हो गई। मेरा कहना है यह कि मैं जो जानता हूं वह बेहतर करता हूं। अन्य कारोबार में जाने से जोखिम बरकरार रहेगा। मैंने देखा कि हर कोई दूरसंचार कारोबार में बहुत बड़ा होता जा रहा है और उसने मुझे लुभाया भी। लेकिन अब, मुझे खुशी है कि मैंने उस कारोबार की ओर कदम नहीं बढ़ाया।
फिर आप चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) की ओर क्यों गए?
यह कंपनी हमेशा खेल पर केंद्रित थी। 1960 के दशक के आरंभ में दस में से नौ रणजी ट्रॉफी खिलाड़ी इंडिया सीमेंट्स में कार्यरत थे। फिर हमने तमिलनाडु लीग में टीमों का संचालन किया। इसलिए सीएसके में जाना एक स्वाभाविक विस्तार था। यदि कोई और कम बोली लगाता तो चेन्नई को फ्रेंचाइजी नहीं मिलती। इससे चेन्नई को और देश के दक्षिणी हिस्से को नुकसान होता।
आप विवादों और संकट के दौर को किस प्रकार देखते हैं?
जब हम पर दो साल का प्रतिबंध लगा दिया गया था, तब अपनी वापसी तक मैंने आईपीएल को बिल्कुल नहीं देखा था। मुझे ठेस पहुंचा। इसमें न मेरी कोई गलती थी और न ही किसी अन्य की। यह एक तरह का विच-हंट (मीडिया के कुछ वर्गों सहित) था और इसका कोई सबूत भी नहीं था। आज क्रिकेट जगत में हर कोई इसे जानता है। वे चाहते थे कि एक क्रिकेटर मेरे खिलाफ बात करे लेकिन किसी ने ऐसा नहीं किया। मैं अकेला दक्षिण भारतीय था जो आगे चलकर बीसीसीआई का अध्यक्ष बना और क्रिकेट जगत में आवाज उठाई। अपने समय में मैंने सुनिश्चित किया कि खिलाडिय़ों को उचित भुगतान किया जाए। बीसीसीआई का अस्तित्व खिलाडिय़ों की वजह से है तो आप पैसे कैसे ले सकते हैं और उसे नहीं दे सकते। किसी भी क्रिकेटर ने मेरे खिलाफ एक शब्द नहीं बोला।