facebookmetapixel
Grok controversy: X ने मानी गलती, महिलाओं की सुरक्षा के लिए दिया भरोसाIran Protest: ईरान में विरोध का तीसरा सप्ताह, सड़कों पर खौफनाक संघर्ष; मौतों का आंकड़ा बढ़ाWeather Update: उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड, कश्मीर में माइनस तापमान; दक्षिण में भारी बारिश का अलर्टNSE IPO को लेकर बड़ी खबर, इस महीने मिल सकती है सेबी की मंजूरी‘हमें अमेरिकी बनने का कोई शौक नहीं’, ग्रीनलैंड के नेताओं ने ट्रंप की बात को ठुकराया, कहा: हम सिर्फ ‘ग्रीनलैंडर’Bonus Issue Alert: अगले हफ्ते दो कंपनियां अपने निवेशकों को देंगी बोनस शेयर, रिकॉर्ड डेट फिक्सDMart Q3 Results: Q3 में मुनाफा 18.28% बढ़कर ₹855 करोड़ के पार, रेवेन्यू ₹18,100 करोड़ पर पहुंचाभारत पहुंचे US के नए राजदूत गोर,कहा: वापस आकर अच्छा लग रहा, दोनों देशों के सामने कमाल के मौकेCorporate Action: स्प्लिट-बोनस-डिविडेंड से बढ़ेगी हलचल, निवेशकों के लिए उत्साह भरा रहेगा अगला हफ्ताIran Protest: निर्वासित ईरानी शाहपुत्र पहलवी का नया संदेश- विरोध तेज करें, शहरों के केंद्रों पर कब्जे की तैयारी करें

वेदांत लेगी एलआईसी से कर्ज

Last Updated- December 11, 2022 | 6:00 PM IST

अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने से भारतीय फर्मों के लिए विदेशी बॉन्ड बाजार से पैसा जुटाना महंगा हो गया है। ऐसे में खनन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वेदांत ने 10 साल के बॉन्ड के जरिये संभवत: भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) से 4,809 करोड़ रुपये जुटाने का करार कर लिया है। कई सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है।
नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर एक वरिष्ठ ट्रेजरी अधिकारी ने कहा, ‘वेदांत डबल एए रेटिंग वाली कंपनी है और वह 10 साल की प्रतिभूति के जरिये एलआईसी से पैसे जुटा रही है। यह ब्याज दर की बाध्यता से मुक्त प्रत्यक्ष सौदा है।’
सूत्रों के अनुसार इस तरह के ऋण की ब्याज दर 10 वर्षीय सरकारी प्रतिभूतियों के ब्याज से 100 आधार अंक ज्यादा यानी करीब 8.50 फीसदी रह सकता है। 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल आज 7.41 फीसदी पर बंद हुआ। कई सूत्रों ने कहा कि इस तरह के सौदे का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया जाता है, लेकिन सौदे का आकार देखकर लगता है कि एलआईसी इसमें शामिल हुई होगी। वेदांत 18 महीने की प्रतिभूतियां बेचकर 1,800 से 2,000 करोड़ रुपये जुटाने की संभावना भी तलाश रही है। मगर सूत्रों ने इसमें शामिल निवेशकों का जिक्र नहीं किया। वेदांत और एलआईसी को इस सौदे की पुष्टि के लिए ईमेल भेजे गए थे मगर खबर लिखने तक उनका जवाब नहीं आया।
सूत्रों के अनुसार 10 वर्षीय बॉन्ड का सौदा पूरा हो चुका है और 18 महीने के बॉन्ड पर अभी बातचीत चल रही है। वेदांत इस रकम का उपयोग मौजूदा कर्ज चुकाने और पूंजीगत व्यय में करेगी। वेदांत ने इससे पहले दिसंबर 2021 में स्थानीय मुद्रा बॉन्ड में पूंजी जुटाई थी। इस साल की शुरुआत में क्रिसिल और इंडिया रेटिंग्स सहित कई रेटिंग एजेंसियों ने वेदांत की रेटिंग बढ़ाकर एए कर दी थी।
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसलने के कारण पिछले हफ्ते वेदांत रिसोर्सेस को 2024 में परिपक्व होने वाला डॉलर मद के कर्ज में काफी नुकसान हुआ था। 22 जून को डॉलर के मुकाबले रुपया 78.39 के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ था। इस साल अब तक रुपये में करीब 5 फीसदी की नरमी आ चुकी है। अमेरिका में उच्च ब्याज दर, कच्चे तेल में तेजी और विदेशी निवेशकों की भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली के बीच रुपये में नरमी से देसी कंपनियों के लिए विदेशी कर्ज चुकाना महंगा हो गया है। फरवरी 2021 में वेदांत ने विदेशी बॉन्ड के जरिये 1.2 अरब डॉलर की रकम जुटाई थी।
इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च में निदेशक सौम्यजित नियोगी ने कहा, ‘बीते दो वर्षों में विदेशी बाजार से कर्ज जुटाना भारतीय फर्मों के लिए आसान और सस्ता था लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं।’ उन्होंने कहा कि विकसित देशों में ब्याज दरें काफी बढ़ गई हैं, खास तौर पर अल्पावधि के ऋण पर। इस अवधि के लिए विदेशी बाजार का कर्ज फ्लोटिंग दर से जुड़ा होता है। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में नरमी से गणित और बिगड़ गया है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड रिसर्च द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि मार्च 2022 में भारतीय फर्मों ने विदेशी बाजार से 670 करोड़ डॉलर जुटाए थे मगर जून 2022 में केवल 5 करोड़ डॉलर जुटाए गए।
मार्च 2022 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी मौद्रिक नीति में सख्ती शुरू की थी और उसी महीने ब्याज दर में 25 आधार अंक का इजाफा किया था। उसके बाद से फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर में 125 आधार अंक की बढ़ोतरी और की है।
पिछले कुछ महीनों से भारतीय कंपनियों के लिए कर्ज महंगा हो गया है क्योंकि ऊंची मुद्रास्फीति को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। मई से अब तक आरबीआई ने रीपो दर में 90 आधार अंक का इजाफा किया है। इसलिए कर्ज लेने वाले बैंक का रुख कर रहे हैं। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार जून की शुरुआत में बैंकों से कर्ज 13.1 फीसदी बढ़ गया, जो तीन साल में सबसे अधिक बढ़ोतरी है।
इस बीच 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल भी 96 आधार अंक बढ़ गया है। अप्रैल से जून के बीच इसमें 57 आधार अंक की वृद्धि हुई है। सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल ही कॉरपोरेट बॉन्ड का पैमाना होता है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार एएए रोटिंग वाले 10 वर्षीय कॉरपोरेट बॉन्ड का प्रतिफल 31 मार्च के 7 फीसदी से बढ़कर 24 जून को 7.77 फीसदी हो गया। इसी दौरान एए रेटिंग वाले 10 वर्षीय कॉरपोरेट बॉन्ड का प्रतिफल 7.79 फीसदी से बढ़कर 8.48 फीसदी हो गया।

First Published - June 27, 2022 | 11:56 PM IST

संबंधित पोस्ट